Bhopal : ठिठुरती ठंड में AIIMS के बाहर बीमार बेटे को लेकर बैठी है बूढ़ी मां, 4 दिन बाद भी नहीं मिला इलाज
राजधानी भोपाल एम्स के भारत के रहने वाले मां बेटे इलाज के इंतजार में पिछले 4 दिनों से सड़क पर बैठे हुए हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा। मां ने बताया बेटे को चर्म रोग है।
भारत में जटिल बीमारियों के इलाज के लिए आम आदमी "अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान" (एम्स) की ओर बड़ी आशा के साथ जाता है, लेकिन जब उसे इलाज ना मिले तो, वे निराश हो जाता है। ऐसा ही मामला राजधानी भोपाल के एम्स सामने आया है। जहां बैरसिया के रहने वाले राजेंद्र कुमार जिनकी उम्र 35 साल है। वे अपनी बूढ़ी मां के साथ एम्स के बाहर सड़क पर कड़कड़ाती ठंड में इलाज के इंतजार में बैठे हुए हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है। राजेंद्र और उसकी मां के पास ओढ़ने के लिए ना गर्म कपड़े हैं ना सोने के लिए बिस्तर है। राजेंद्र कुमार की मां सावित्रीबाई ने बताया कि बेटे को चर्म रोग है शरीर में जगह जगह चट्टे हो गए हैं। उसके कारण वे ठीक से उठ बैठ भी नहीं पा रहा है।

4 दिन से इलाज का कर रहे हैं इंतजार
राजेंद्र कुमार की मां सावित्री बाई ने बताया कि उन्होंने भोपाल एम्स में 4 दिन पहले घंटों लाइन में लगकर बेटे को दिखाने की तारीख ली थी। सुबह 5 बजे लाइन में लगने के बाद 9 बजे अंदर जाने का मौका आया डॉक्टरों ने गंभीर बताकर और कहीं जाने की बात कह दी। प्राइवेट में इलाज कराने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं है उनके पास आयुष्मान और गरीबी कार्ड भी है पिछले 4 दिनों से अस्पताल के बाहर कड़ाके की ठंड में मां बेटे इलाज मिलने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन इन गरीब मां बेटे को इलाज नहीं बल्कि इंतजार मिल रहा है।
कई मरीज निराश होकर लौट रहे
आम आदमी को सुपर स्पेशलिस्ट इलाज मिलने के लिए जिस सपने के साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स की नींव रखी गई थी, वे साकार होती नजर नहीं आ रही है। यहां ओपीडी में मरीजों संख्या जरूर लगातार बढ़ रही है, जहां पहले 2000 मरीज रोजाना पहुंचे थे। अब उनकी संख्या बढ़कर 3000 तक पहुंच गई है, लेकिन गंभीर रोगों के मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अस्पताल में इलाज की आशा लेकर पहुंच रहे राजधानी भोपाल एम्स समेत अन्य शहरों के मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
भोपाल एम्स के PRO ने दी सफाई
इस मामले पर एम्स PRO केके पंडिता ने बताया कि अस्पताल में ऐसा कभी नहीं होता है, जो मरीज इलाज के लिए आया है और उसे इलाज नहीं मिला हो। कोई कारण रहा होगा उसका पता लगाएंगे कि मरीज को इलाज क्यों नहीं मिला।
बता दे कुछ दिन पहले सड़क दुर्घटना में चोटिल होने के बाद पैर व कमर दर्द से पीड़ित विदिशा निवासी राजू कई स्थानों से निराश होकर एम्स के दरवाजे आए थे। डॉक्टर तक पहुंचने से पहले गार्डों ने मौखिक रूप से ही उन्हें हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया। कहा कि वहां कम पैसे में इलाज हो जाएगा, यहा 15 दिन तक ओपीडी फुल है। वैसे भोपाल एम्स के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ आपको दिखाई देगी, जो घण्टे पर्चे के लिए लाइन में लगे रहते हैं।












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