MP News: ग्वालियर अंबेडकर विवाद पर फूल सिंह बरैया का चैलेंज, एडवोकेट अनिल मिश्रा पर पर किया बड़ा खुलासा!
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा की विवादित टिप्पणी ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। इस घमासान के बीच कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने वन इंडिया हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में जोरदार चैलेंज दिया: "अगर डॉ. अंबेडकर संविधान के असली निर्माता नहीं हैं, तो सिद्ध करके दिखाओ। मैं सजा भुगतने को तैयार हूं।
" बरैया ने RSS और BJP पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि "सरकार की शह पर अनिल मिश्रा जैसे लोग बाबासाहेब का अपमान कर रहे हैं।" उन्होंने भीम आर्मी के 'जूता फेंक आंदोलन' का समर्थन न करने की बात कही, लेकिन संविधान के मुताबिक जवाब देने का संकल्प जताया।

मायावती के सवाल पर साइलेंट रहते हुए बरैया ने कहा, "यह वक्त अंबेडकर पर बोलने का है।" यह बयान ग्वालियर से भोपाल, इंदौर, रतलाम और जबलपुर तक फैले विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जहां FIR के बावजूद मिश्रा के समर्थन में रैलियां हो रही हैं।
यह विवाद ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना से शुरू हुआ, जो अब जातिगत तनाव का प्रतीक बन गया है। अनिल मिश्रा पर SC/ST एक्ट के तहत दो FIR दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन उनकी गिरफ्तारी न होने से आक्रोश बढ़ रहा है। कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का यह बयान न केवल दलित समाज को एकजुट करने का प्रयास है, बल्कि RSS-BJP पर राजनीतिक वार भी।
अनिल मिश्रा की टिप्पणी से भड़का आग्नेयास्त्र
विवाद 5 अक्टूबर 2025 को तब भड़का, जब ग्वालियर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने एक सोशल मीडिया लाइव शो 'आचरण ग्वालियर पर लाइव' में डॉ. अंबेडकर पर कथित अपमानजनक टिप्पणी की। मिश्रा ने अंबेडकर को "गंदा आदमी", "अंग्रेजों का एजेंट" और "झूठा व्यक्ति" कहा, और संविधान निर्माण में सर बी.एन. राव की भूमिका को प्रमुख बताया। यह टिप्पणी हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना के विरोध के संदर्भ में आई, जहां सवर्ण संगठनों ने सर बी.एन. राव की मूर्ति लगाने की मांग की। वीडियो वायरल होते ही दलित, आदिवासी और बहुजन संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया।
6 अक्टूबर को ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने मिश्रा के खिलाफ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(u), 3(2)(va) और IPC 153A (समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना) के तहत FIR दर्ज की। महाराष्ट्र में भी एक FIR दर्ज हुई। 7 अक्टूबर को मिश्रा खुद गिरफ्तारी देने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें लौटा दिया, जिससे आक्रोश बढ़ा। बसपा और अहिरवार समाज ने कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन सौंपे, जबकि परशुराम सेना जैसे संगठनों ने मिश्रा का समर्थन किया।
प्रतिमा विवाद की पृष्ठभूमि: हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा लगाने का प्रयास जून 2025 से चल रहा है, लेकिन सवर्ण विरोध के कारण रुका। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने जून में सामाजिक न्याय सम्मेलन में इसका समर्थन किया, जहां फूल सिंह बरैया ने RSS प्रमुख मोहन भागवत पर विवादित टिप्पणी की थी। अब यह विवाद जातिगत टकराव का रूप ले चुका है।
फूल सिंह बरैया का एक्सक्लूसिव बयान: चैलेंज और RSS-BJP पर वार
वन इंडिया हिंदी से फोन पर बातचीत में बरैया ने कहा, "अनिल मिश्रा का बयान संविधान का अपमान है। अगर डॉ. अंबेडकर संविधान के असली निर्माता नहीं हैं, तो सिद्ध करके दिखाओ। मैं सजा भुगतने को तैयार हूं।" उन्होंने RSS और BJP पर आरोप लगाया: "सरकार की शह पर ऐसे लोग बाबासाहेब का अपमान कर रहे हैं। यह RSS का एजेंडा है, जो अंबेडकर को कमतर दिखाकर संविधान बदलने की साजिश रच रहा है।" बरैया ने भीम आर्मी के आंदोलन पर कहा, "हम हिंसा या बवाल का समर्थन नहीं करते। संविधान के मुताबिक जवाब देंगे।" मायावती के सवाल पर साइलेंट रहते हुए बोले, "यह वक्त अंबेडकर पर बोलने का है, व्यक्तिगत राजनीति का नहीं।"
बरैया, जो भंडेर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, अंबेडकरवादी विचारधारा के प्रबल समर्थक हैं। जून 2025 में उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत पर "बलात्कार सह लेंगे, लेकिन अंबेडकर का अपमान नहीं" जैसा विवादित बयान दिया था। उनका यह चैलेंज दलित समाज को एकजुट करने का प्रयास लगता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: BJP-कांग्रेस आमने-सामने, CBI जांच की मांग
कांग्रेस ने मिश्रा पर गिरफ्तारी की मांग की। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी: "अंबेडकर का अपमान BJP की साजिश। CBI जांच हो।" पूर्व CM कमलनाथ: "संविधान रक्षा के लिए सड़क पर उतरेंगे।" दिग्विजय सिंह: "RSS का एजेंडा उजागर।"
BJP ने सफाई दी। ग्वालियर जिला अध्यक्ष: "मिश्रा का बयान व्यक्तिगत, पार्टी से कोई लेना-देना नहीं। जांच होगी।" मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर: "शांति बनाए रखें, कानून सबके लिए बराबर।" आजाद समाज पार्टी (ASP) के चंद्रशेखर आजाद: "अंबेडकर का अपमान देश का अपमान। सजा दो।" बसपा ने कलेक्ट्रेट घेराव किया
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