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मालेगांव ब्लास्ट केस: साध्वी प्रज्ञा सिंह को क्लीन चिट, भोपाल में उमा भारती के बंगले पर क्यों मनाया जश्न,जानिए

Malegaon Blast Case News: 17 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष NIA कोर्ट द्वारा भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और छह अन्य आरोपियों को बरी किए जाने का फैसला 31 जुलाई 2025 को आया। इस फैसले ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में उत्सव का माहौल बना दिया।

विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ BJP नेत्री उमा भारती के बंगले पर आतिशबाजी, मिठाई वितरण, और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया गया। साध्वी प्रज्ञा के समर्थकों और BJP कार्यकर्ताओं ने "साध्वी प्रज्ञा अमर रहें" और "जय श्रीराम" के नारे लगाकर अपनी खुशी का इजहार किया। कार्यकर्ताओं ने इसे "सत्य की जीत" और "हिंदू आतंकवाद की साजिश का पर्दाफाश" करार दिया।

Malegaon Blast Sadhvi Pragya Singh gets clean chit celebration at Uma Bharti bungalow in Bhopal

भोपाल में जश्न का माहौल: उमा भारती के बंगले पर उत्सव

31 जुलाई 2025 की शाम को भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित उमा भारती के बंगले पर साध्वी प्रज्ञा के समर्थकों और BJP कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखने को मिला। करीब 500 से अधिक लोग बंगले के बाहर जमा हुए, जहां आतिशबाजी की गई, मिठाइयां बांटी गईं, और ढोल-नगाड़ों के साथ उत्साहपूर्ण नारेबाजी हुई। "साध्वी प्रज्ञा अमर रहें," "जय श्रीराम," और "भारत माता की जय" के नारे गूंजते रहे। कई कार्यकर्ताओं ने भगवा झंडे लहराए और साध्वी प्रज्ञा की तस्वीरों के साथ पोस्टर प्रदर्शित किए।

उमा भारती ने इस मौके पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "साध्वी प्रज्ञा को 17 साल तक अपमान और यातना सहनी पड़ी। यह फैसला न केवल उनकी जीत है, बल्कि सनातन धर्म और हिंदुत्व की जीत है। हिंदू आतंकवाद का झूठा नैरेटिव बनाने वालों को करारा जवाब मिला है।" उन्होंने साध्वी प्रज्ञा को बधाई देते हुए विशेष NIA कोर्ट के जज ए.के. लाहोटी की निष्पक्षता की सराहना की।

मालेगांव ब्लास्ट केस: फैसले का सार

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में भीकू चौक पर हुए बम विस्फोट में 6 लोगों की मौत और 101 लोग घायल हुए थे। इस मामले में महाराष्ट्र ATS ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, और अन्य को आरोपी बनाया था। ATS ने दावा किया था कि विस्फोट में इस्तेमाल मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम पर थी और कर्नल पुरोहित ने RDX उपलब्ध कराया था।

2011 में जांच NIA को सौंप दी गई, जिसने 2016 में अपर्याप्त सबूतों के आधार पर मकोका हटाने और नई चार्जशीट दाखिल की। 31 जुलाई 2025 को विशेष NIA कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा और छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियां आरोप साबित करने में नाकाम रहीं। प्रमुख बिंदु:

  • सबूतों की कमी: बाइक का चेसिस नंबर रिकवर नहीं हुआ, RDX का कोई सबूत नहीं मिला।
  • गवाहों की विश्वसनीयता: 323 गवाहों में से 39 अपने बयान से पलट गए, और 26 की मृत्यु हो गई।
  • UAPA और MCOCA: जरूरी मंजूरी की कमी और अवैध बयानों के कारण आरोप खारिज।

जांच में खामियां: फिंगरप्रिंट, डंप डेटा, और पंचनामा में लापरवाही।

कोर्ट ने पीड़ित परिवारों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, साथ ही कहा, "आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।"

"हिंदू आतंकवाद" के नैरेटिव का अंत?

BJP कार्यकर्ताओं और साध्वी प्रज्ञा के समर्थकों का कहना है कि यह फैसला "हिंदू आतंकवाद" या "भगवा आतंकवाद" के झूठे नैरेटिव को तोड़ने वाला है। 2008 में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह ने इस शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसे BJP ने हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश करार दिया। भोपाल के BJP कार्यकर्ता रवि परमार ने कहा, "कांग्रेस ने साध्वी प्रज्ञा को फंसाने के लिए यह साजिश रची थी। कोर्ट ने सत्य को सामने लाकर हिंदुत्व की जीत सुनिश्चित की।"

उमा भारती के बंगले पर मौजूद कार्यकर्ता राकेश मिश्रा ने X पर लिखा, "हिंदू आतंकवाद का झूठा नैरेटिव अब ध्वस्त हो गया है। साध्वी प्रज्ञा को सताया गया, लेकिन सत्य जीता।" कार्यकर्ताओं ने दिग्विजय सिंह और कांग्रेस पर सांप्रदायिक साजिश का आरोप लगाया, और इसे 2024 लोकसभा चुनाव में BJP की जीत से जोड़ा।

साध्वी प्रज्ञा का बयान

साध्वी प्रज्ञा ने कोर्ट के बाहर भावुक होकर कहा, "मुझे 17 साल तक अपमानित किया गया। 13 दिन तक हिरासत में टॉर्चर सहना पड़ा। मुझे आतंकवादी कहा गया, जबकि मैं एक सन्यासी हूं। यह भगवा और सनातन की जीत है।" उन्होंने महाराष्ट्र ATS और तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे पर यातना देने का आरोप लगाया। साध्वी ने उमा भारती और BJP नेताओं को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

उमा भारती की भूमिका

उमा भारती, जो साध्वी प्रज्ञा की तरह ही सन्यासी जीवन और हिंदुत्व की प्रबल समर्थक रही हैं, ने इस मामले में शुरू से प्रज्ञा का समर्थन किया। 2019 में जब साध्वी प्रज्ञा भोपाल से BJP प्रत्याशी थीं, तब उमा भारती ने उनके लिए प्रचार किया था। उनके बंगले पर जश्न का आयोजन इस समर्थन का प्रतीक था। उमा भारती ने कहा, "साध्वी प्रज्ञा निर्दोष थीं। यह कोर्ट का निष्पक्ष फैसला हिंदुओं के खिलाफ साजिश को उजागर करता है। मैं इस फैसले का स्वागत करती हूं।"

विपक्षी नेताओं ने इस फैसले और जश्न पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, "मैंने कभी RSS को आतंकवादी नहीं कहा, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि ब्लास्ट में मारे गए छह लोगों का जिम्मेदार कौन है?" AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, "यह फैसला निराशाजनक है। पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा?"

विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञ डॉ अनिल वर्मा ने कहा, "NIA कोर्ट का फैसला सबूतों की कमी पर आधारित है। जांच में खामियां थीं, लेकिन पीड़ितों के लिए न्याय का सवाल अनुत्तरित है। ऊपरी अदालत में अपील हो सकती है।" सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा ने कहा, "जश्न का माहौल सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकता है। इस मामले को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखने की बजाय न्याय के दृष्टिकोण से देखना चाहिए।"

यह फैसला कई सवाल खड़े करता है:

पीड़ितों का न्याय: छह मृतकों और 101 घायलों के लिए जिम्मेदार कौन है? पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी कर रहे हैं।

सांप्रदायिक माहौल: "हिंदू आतंकवाद" के नैरेटिव को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच तनाव बढ़ सकता है।

जांच की विश्वसनीयता: ATS और NIA की जांच में खामियों ने विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।

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