Indore MP News: लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा, जानिए कैसे SI धमेन्द्र राजपूत को 1 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा
Lokayukta News: मध्य प्रदेश के इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने एक और पुलिसकर्मी को बेनकाब किया। आजाद नगर थाने के उप निरीक्षक धमेन्द्र राजपूत को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त निर्देशों के तहत इंदौर लोकायुक्त इकाई ने अंजाम दी।
धमेन्द्र राजपूत पर आरोप है कि उन्होंने एक हत्या के मामले में आवेदक संतोष कुमार तोमर और उनके पिता रामचन्द्र सिंह तोमर को झूठा फंसाने की धमकी देकर रिश्वत की मांग की थी। इस सनसनीखेज मामले ने पुलिस की साख पर सवाल उठाए हैं और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर किया है। आइए, इस ट्रैप ऑपरेशन की पूरी कहानी, साजिश, और इसके प्रभाव को विस्तार से जानते हैं।

हत्या के केस में झूठा फंसाने की धमकी, रिश्वत की मांग
आवेदक संतोष कुमार तोमर (35 वर्ष), जो इंदौर के केदार नगर, स्कीम नंबर 51, संगम नगर के पास रहते हैं, एक्स कैप्टन सिक्योरिटी सर्विस में प्रबंधक हैं। उनके पिता रामचन्द्र सिंह तोमर इस सिक्योरिटी कंपनी के संचालक हैं। पुलिस थाना आजाद नगर में दर्ज प्रकरण क्रमांक 504/2025 (हत्या का मामला) में उप निरीक्षक धमेन्द्र राजपूत ने संतोष और उनके पिता को झूठा फंसाने की धमकी दी। धमेन्द्र ने पहले 1.5 लाख रुपये की रिश्वत मांगी, ताकि इस मामले में कोई कठोर कार्रवाई न हो और संतोष के पिता की मदद की जाए।
संतोष ने बताया कि उनके पिता को पहले ही इस केस में अग्रिम जमानत मिल चुकी थी। इसके बावजूद, धमेन्द्र ने उन्हें थाने बुलाकर दबाव बनाया और कहा कि 1.5 लाख रुपये दो, वरना केस में और सख्ती करेंगे। संतोष ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), इंदौर को की। शिकायत के सत्यापन में रिश्वत की मांग सही पाई गई। इसके बाद, लोकायुक्त ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।
ट्रैप ऑपरेशन: 1 लाख रुपये लेते रंगे हाथों पकड़ा गया
15 सितंबर 2025 को इंदौर लोकायुक्त इकाई ने एक ट्रैप दल का गठन किया। इस दल में कार्यवाहक निरीक्षक सचिन पटेरिया, सउनि मोहम्मद रहीम खान, और आरक्षक विजय कुमार, शैलेन्द्र सिंह बघेल, कमलेश परिहार, मनीष माथुर, चेतन सिंह परिहार, श्रीकृष्ण अहिरवार, और चालक शेरसिंह ठाकुर शामिल थे।
लोकायुक्त की सटीक योजना के तहत, संतोष को 1 लाख रुपये की रिश्वत राशि के साथ धमेन्द्र राजपूत के पास भेजा गया। जैसे ही धमेन्द्र ने रिश्वत की राशि ली, लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। यह कार्रवाई आजाद नगर क्षेत्र में की गई। धमेन्द्र के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है, और जांच जारी है।
धमेन्द्र राजपूत: कौन है यह पुलिसकर्मी?
धमेन्द्र राजपूत (46 वर्ष), आजाद नगर थाने में उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे। वे मूल रूप से शाजापुर जिले के नीलकण्ठेश्वर कॉलोनी, तहसील शुजालपुर के निवासी हैं। वर्तमान में वे इंदौर के न्यूयॉर्क सिटी, निहालपुर मुंडी, सेज यूनिवर्सिटी के सामने रहते हैं। लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार, धमेन्द्र पहले भी विवादों में रहे हैं, और उनके खिलाफ कई शिकायतें मिली थीं। इस बार रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
आवेदक की कहानी, सिक्योरिटी कंपनी और हत्या का केस
संतोष कुमार तोमर और उनके पिता रामचन्द्र सिंह तोमर की सिक्योरिटी कंपनी एक्स कैप्टन सिक्योरिटी सर्विस इंदौर में जानी-मानी है। पुलिस थाना आजाद नगर में दर्ज हत्या के मामले (प्रकरण क्रमांक 504/2025) में रामचन्द्र को आरोपी बनाया गया था। संतोष का दावा है कि यह केस झूठा है और पुलिस ने उन्हें और उनके पिता को जानबूझकर फंसाने की कोशिश की।
संतोष ने बताया, "धमेन्द्र ने पहले 1.5 लाख रुपये मांगे। जब पिताजी को जमानत मिली, तो भी उसने हमें परेशान किया। हमने लोकायुक्त को बताया, क्योंकि हम रिश्वत देने के खिलाफ थे।" लोकायुक्त की त्वरित कार्रवाई ने संतोष की शिकायत को सही साबित किया।
लोकायुक्त की सख्ती, योगेश देशमुख का निर्देश
महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। उनके निर्देश पर इंदौर लोकायुक्त इकाई ने हाल के महीनों में कई ट्रैप ऑपरेशन किए हैं। इससे पहले भी बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर, नगर निगम कर्मचारी, और रोजगार सहायकों को रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने कहा, "यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।" लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि यह भ्रष्टाचार का एक और काला अध्याय उजागर करता है।
पुलिस की साख पर सवाल
यह मामला इंदौर में चर्चा का विषय बन गया है। आम लोग और सामाजिक संगठन पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इंदौर नागरिक मंच के संयोजक अमित शर्मा ने कहा, "पुलिस का काम लोगों की रक्षा करना है, लेकिन जब पुलिस ही रिश्वत ले, तो जनता का भरोसा कैसे बनेगा?"
सियासी तौर पर, विपक्ष ने इस मुद्दे को लपक लिया। मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विपिन वानखेड़े ने कहा, "BJP सरकार में पुलिस भ्रष्टाचार में डूबी है। यह अकेला मामला नहीं, आए दिन पुलिसकर्मी रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं।" जवाब में BJP प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने कहा, "लोकायुक्त की कार्रवाई सरकार की सख्ती का सबूत है। दोषी कोई भी हो, उसे सजा मिलेगी।"
भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की जंग
इंदौर लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम रंग ला रही है। धमेन्द्र राजपूत जैसे पुलिसकर्मी, जो हत्या जैसे गंभीर मामले में रिश्वत मांगते हैं, समाज के लिए खतरा हैं। यह मामला पुलिस सुधारों की जरूरत को रेखांकित करता है। सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, या यह सिलसिला चलता रहेगा? इंदौर की जनता और लोकायुक्त की नजर अब अगली सुनवाई और सजा पर टिकी है।












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