MP News: भोपाल में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, पटवारी उज्जवल उपाध्याय 9000 रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

Bhopal News Lokayukta: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) योगेश देशमुख के मार्गदर्शन में भोपाल लोकायुक्त इकाई ने तहसील हुजूर के गोल खेड़ी क्षेत्र में तैनात पटवारी उज्जवल उपाध्याय को 9000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

यह कार्रवाई प्रदीप माली नामक आवेदक की शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पटवारी ने उनकी पैतृक जमीन का फौती नामांतरण करने के लिए रिश्वत की मांग की थी। यह घटना भोपाल के गोल खेड़ी स्थित नायरा पेट्रोल पंप पर हुई, और लोकायुक्त की ट्रैप टीम ने इसे अंजाम दिया।

Lokayukta takes action Patwari Ujjwal Upadhyay arrested red handed taking bribe of Rs 9000

घटना का विवरण

प्रदीप माली, जो भोपाल जिले के तहसील हुजूर के ग्राम गोल खेड़ी के निवासी हैं, ने लोकायुक्त पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी कि हल्का नंबर 23 के पटवारी उज्जवल उपाध्याय उनकी पैतृक जमीन का फौती नामांतरण करने के लिए 9000 रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत के सत्यापन पर सही पाए जाने के बाद, पुलिस अधीक्षक (लोकायुक्त, भोपाल) दुर्गेश राठौर ने तत्काल एक ट्रैप टीम गठित की।

30 जून 2025 को गोल खेड़ी के नायरा पेट्रोल पंप पर लोकायुक्त की ट्रैप टीम ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए पटवारी उज्जवल उपाध्याय को प्रदीप माली से 9000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। यह राशि पैतृक जमीन के नामांतरण की एवज में ली जा रही थी। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 13(1)(d) के तहत मामला दर्ज किया है, और आगे की कार्रवाई जारी है।

ट्रैप टीम का गठन

लोकायुक्त की इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली ट्रैप टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर दिलीप झरवड़े ने किया। टीम में उप पुलिस अधीक्षक मंजू सिंह पटेल और अन्य अधिकारी शामिल थे। ट्रैप ऑपरेशन को पूरी गोपनीयता और सावधानी के साथ अंजाम दिया गया। पुलिस अधीक्षक दुर्गेश राठौर ने बताया, "शिकायत मिलने के बाद हमने तत्काल सत्यापन किया और पाया कि पटवारी द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी। इसके बाद ट्रैप टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा।"

रिश्वतखोरी का बढ़ता मामला

यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सतर्कता और सक्रियता को दर्शाती है। हाल के वर्षों में, मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरी के मामलों में वृद्धि देखी गई है, खासकर राजस्व विभाग और तहसील स्तर पर। पटवारी और अन्य निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा नामांतरण, बंटवारा, और अन्य राजस्व कार्यों के लिए रिश्वत मांगने की शिकायतें आम हो गई हैं।

लोकायुक्त पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में मध्य प्रदेश में 150 से अधिक ट्रैप कार्रवाइयां की गईं, जिनमें सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों, और जनप्रतिनिधियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया। भोपाल में यह इस तरह की तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जो राजस्व विभाग से जुड़ी है।

सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव

इस कार्रवाई ने भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। प्रदीप माली जैसे आम नागरिकों की हिम्मत, जिन्होंने रिश्वत की मांग के खिलाफ आवाज उठाई, ने लोकायुक्त को त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित किया। स्थानीय निवासियों ने इस कार्रवाई की सराहना की है। गोल खेड़ी के एक निवासी रमेश चौधरी ने कहा, "पटवारी और तहसील कर्मचारी हर छोटे-बड़े काम के लिए रिश्वत मांगते हैं। लोकायुक्त की यह कार्रवाई अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए सबक है।"

प्रशासनिक कमियां और भ्रष्टाचार

यह घटना एक बार फिर राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करती है। पैतृक जमीन के नामांतरण जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी नागरिकों को रिश्वत देनी पड़ती है, जो प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल शर्मा ने कहा, "जब तक राजस्व विभाग में डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रियाएं लागू नहीं होंगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकेंगी नहीं। सरकार को ऑनलाइन नामांतरण और बंटवारा प्रक्रिया को और मजबूत करना होगा।"

मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई मौकों पर कहा है कि भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई को इस नीति के तहत एक कदम माना जा रहा है।

आगे की कार्रवाई

लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी उज्जवल उपाध्याय को हिरासत में ले लिया है, और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या उज्जवल उपाध्याय ने पहले भी इस तरह की रिश्वतखोरी की है। उनके बैंक खातों, संपत्तियों, और अन्य लेन-देन की जांच भी शुरू की गई है। लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार, यदि अन्य शिकायतें सामने आती हैं, तो मामले को और गहराई से जांचा जाएगा।

आवेदक प्रदीप माली ने लोकायुक्त की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा, "मैंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया और लोकायुक्त से शिकायत की। उनकी त्वरित कार्रवाई से मुझे न्याय मिला।" प्रदीप ने अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे रिश्वत की मांग होने पर चुप न रहें और लोकायुक्त से संपर्क करें।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सक्रियता

पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) योगेश देशमुख ने हाल के महीनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं। उनके नेतृत्व में लोकायुक्त ने न केवल निचले स्तर के कर्मचारियों, बल्कि बड़े अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। भोपाल लोकायुक्त इकाई ने 2025 में अब तक 20 से अधिक ट्रैप कार्रवाइयां की हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया है।

लोकायुक्त के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमारी प्राथमिकता आम नागरिकों को भ्रष्टाचार से राहत दिलाना है। हम हर शिकायत को गंभीरता से लेते हैं और त्वरित कार्रवाई करते हैं।" उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे रिश्वत की मांग की शिकायत बिना डर के लोकायुक्त कार्यालय में दर्ज कराएं।

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