झाबुआ में जिला आपूर्ति अधिकारी आशीष आजाद और सहायक जितेंद्र नायक 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

Lokayukta MP news: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त मुहिम को एक और सफलता मिली है। महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के निर्देश पर इंदौर लोकायुक्त इकाई ने आज झाबुआ जिले में दो सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

पहले आरोपी प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी आशीष आजाद और दूसरे आरोपी सहायक सेल्समैन जितेंद्र नायक ने एक उचित मूल्य दुकान के सेल्समैन से 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जो दुकान के निलंबन को हटाने और एफआईआर से बचाने के लिए वसूली जा रही थी।

Lokayukta Supply officers Ashish Azad and Jitendra Nayak arrested in Jhabua for accepting a bribe of Rs 50 000

यह कार्रवाई खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ी करती है, खासकर आदिवासी बहुल झाबुआ जैसे जिले में, जहां गरीबों को सस्ता राशन उपलब्ध कराना सरकारी प्राथमिकता है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 एवं धारा 61(2) बीएनएस 2023 के तहत कार्यवाही शुरू हो गई है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

उचित मूल्य दुकान का निलंबन और रिश्वत की मांग

झाबुआ जिला मध्य प्रदेश का एक पिछड़ा और आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां शासकीय उचित मूल्य की दुकानें गरीब परिवारों के लिए जीवनरेखा हैं। पीड़ित आवेदक श्री मनोज ताहेड़ (उम्र 32 वर्ष), पिता श्री जोरू ताहेड़, ग्राम नेगड़िया, पोस्ट अंतरवेलिया, तहसील व जिला झाबुआ के निवासी हैं। मनोज डॉ. भीमराव अंबेडकर बहुउद्देशीय सहकारी साख संस्था मर्यादित पिटोल बड़ी, जिला झाबुआ द्वारा मेंहदीखेड़ा में संचालित शासकीय उचित मूल्य की दुकान (कोड नंबर 2104088) पर सेल्समैन का काम करते थे। यह दुकान गरीबों को सस्ते दामों पर अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराती है।

घटना 19 सितंबर 2025 को हुई, जब जिला आपूर्ति अधिकारी झाबुआ ने मनोज की दुकान को बिना किसी पूर्व सूचना के निलंबित कर दिया। निलंबन के साथ ही दुकान को करूणा स्वयं सहायता नेगड़िया की शासकीय उचित मूल्य की दुकान (कोड नंबर 2104084) में संलग्न कर दिया गया। यह कदम कथित तौर पर दुकान में अनियमितताओं के आधार पर उठाया गया, लेकिन मनोज का कहना है कि यह बिना जांच के मनमाना फैसला था। निलंबन से न केवल मनोज का रोजगार छिन गया, बल्कि दुकान पर निर्भर कई परिवार प्रभावित हुए।

उसी दिन मनोज ने अपनी समस्या हल करने के लिए कलेक्टर कार्यालय झाबुआ स्थित खाद्य विभाग के ऑफिस जाने का फैसला किया। कलेक्टर ऑफिस के गेट पर उन्हें सहायक सेल्समैन जितेंद्र नायक मिल गए। मनोज ने निलंबन के बारे में चर्चा की, तो जितेंद्र ने कहा, "मैं तुम्हारी दुकान का निलंबन हटवा दूंगा और एफआईआर भी नहीं होने दूंगा, लेकिन इसके लिए जिला आपूर्ति अधिकारी श्री आशीष आजाद साहब को कुछ 'खर्चे का पानी' देना पड़ेगा।" मनोज ने पूछा कि कितनी रकम, तो जितेंद्र ने कहा कि वे साहब से बात करके बताते हैं।

कुछ देर बाद जितेंद्र लौटे और बताया कि पीजी ग्राउंड पर आशीष आजाद से बात हो गई है। उन्होंने एक लाख रुपये देने पर निलंबन हटाने और एफआईआर न करने का वादा किया है। मनोज ने कहा कि साहब से खुद मिलवाएं, तो जितेंद्र ने साफ मना कर दिया और कहा, "साहब नहीं मिलेंगे, जो बात करनी है मुझसे करो।" यह मध्यस्थता रिश्वत की साफ मांग को दर्शाती है, जो सरकारी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

शिकायत और ट्रैप कार्रवाई: रंगे हाथों गिरफ्तारी

मनोज ने इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया और 21 सितंबर 2025 को इंदौर लोकायुक्त कार्यालय के पुलिस अधीक्षक (विपक्ष) श्री राजेश सहाय को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की प्रारंभिक सत्यापन में बात सही पाई गई, जिसके बाद महानिदेशक लोकायुक्त श्री योगेश देशमुख के सख्त निर्देश पर 25 सितंबर 2025 को ट्रैप दल का गठन किया गया। डॉ. देशमुख ने हाल ही में प्रदेश स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति की घोषणा की थी, और यह कार्रवाई उसी का हिस्सा है।

ट्रैप टीम ने फर्जी रिश्वत राशि (50 हजार रुपये) के साथ मनोज को आरोपियों से मिलने भेजा। कार्रवाई आज दोपहर जिला आपूर्ति अधिकारी कार्यालय झाबुआ में हुई। आरोपी आशीष आजाद और जितेंद्र नायक ने रिश्वत की रकम स्वीकारते ही ट्रैप टीम के सदस्यों द्वारा घेर लिए गए। रिश्वत लेने के तुरंत बाद 'फिनाइल टेस्ट' किया गया, जो पॉजिटिव आया, और दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। दस्तावेजों और कार्यालय में छापा मारकर अन्य सुराग भी जब्त किए गए।

ट्रैप दल में निरीक्षक रेनू अग्रवाल, प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव, आरक्षक पवन पटोरिया, आरक्षक मनीष माथुर, आरक्षक आशीष आर्य और आरक्षक कृष्णा अहिरवार शामिल थे। टीम ने पूरे ऑपरेशन को अत्यंत गोपनीय रखा, जिससे कार्रवाई सफल रही। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को इंदौर लोकायुक्त थाने में रखा गया है, और पूछताछ जारी है।

आरोपियों का प्रोफाइल: खाद्य विभाग में जिम्मेदारी, लेकिन भ्रष्टाचार के चंगुल में

आरोपी नंबर 1 आशीष आजाद झाबुआ जिले के प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी हैं, जो खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में कार्यरत हैं। उनके पद की जिम्मेदारी उचित मूल्य दुकानों के निरीक्षण, लाइसेंसिंग और वितरण प्रक्रिया को सुचारू रखना है। लेकिन इस मामले में वे रिश्वत के जरिए निलंबन जैसे फैसलों को प्रभावित करने के आरोप में फंसे हैं।

आरोपी नंबर 2 जितेंद्र नायक सहायक सेल्समैन हैं, जो शासकीय उचित मूल्य की दुकान पीलिया खदान देवझिरी, झाबुआ में तैनात हैं। वे विभागीय मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए रिश्वत की मांग करते पाए गए। दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 (लोक सेवक द्वारा रिश्वत लेना) और बी.एन.एस. 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो 7 वर्ष तक की सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान रखती है। सूत्रों के अनुसार, जांच में अन्य शामिल लोगों का भी पता लगाया जा रहा है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की मुहिम: झाबुआ में बढ़ती कार्रवाइयां

मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन ने 2025 में अब तक 150 से अधिक ट्रैप कार्रवाइयां की हैं, जिनमें ज्यादातर निचले और मध्यम स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इंदौर इकाई ने इस वर्ष 40 से अधिक मामलों में सफलता हासिल की है, जो इंदौर, उज्जैन, धार और झाबुआ जैसे संभागों को कवर करती है। महानिदेशक श्री योगेश देशमुख ने जुलाई 2025 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "भ्रष्टाचार राज्य की प्रगति में सबसे बड़ा रोड़ा है। हम हर शिकायत को गंभीरता से लेंगे और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाएंगे।"

यह कार्रवाई विशेष रूप से झाबुआ जैसे आदिवासी जिले में महत्वपूर्ण है, जहां उचित मूल्य दुकानों से जुड़े भ्रष्टाचार गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। हाल ही में झाबुआ में एक मेडिकल ऑफिसर को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के लिए 40 हजार की रिश्वत लेते पकड़े जाने का मामला सामने आया था, जो विभागीय भ्रष्टाचार की जड़ों को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग और जन जागरूकता से इन अपराधों को रोका जा सकता है।

पीड़ित का बयान और आगे की कार्रवाई

पीड़ित मनोज ताहेड़ ने लोकायुक्त टीम को दिए बयान में कहा, "मेरी दुकान निलंबन से मेरा परिवार बर्बाद हो जाता। आरोपी ने रिश्वत की मांग करके न्याय का मजाक उड़ाया। लोकायुक्त ने मुझे न्याय दिया, अब मैं बेझिझक काम जारी रखूंगा।" ट्रैप के बाद स्थानीय प्रशासन ने दुकान का दोबारा निरीक्षण किया, जिसमें निलंबन के आधार पर सवाल उठे। आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी, और जांच में अन्य संलिप्त व्यक्तियों का भी पता लगाया जा रहा है।

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