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“औकात में रहो…” से गरमाई विधानसभा, कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर बवाल, मुख्यमंत्री को मांगनी पड़ी माफी

kailash vijayvargiya News: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का चौथा दिन उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गया जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस ने सियासी तापमान बढ़ा दिया।

बहस के दौरान विजयवर्गीय ने सिंघार को "औकात में रहो..." कह दिया, जिसके बाद सदन में हंगामा खड़ा हो गया और विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। मामला इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को हस्तक्षेप कर माफी मांगनी पड़ी, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी स्थिति पर टिप्पणी करते हुए संयम की नसीहत दी।

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कैसे शुरू हुआ विवाद - तीखी बहस से बिगड़ा माहौल

सूत्रों के अनुसार विवाद उस समय शुरू हुआ जब उमंग सिंघार ने सदन में सरकार और Adani Group के बीच हुए कथित समझौतों को लेकर सवाल उठाए और दस्तावेज होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि वे प्रमाण सदन में पेश करेंगे। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनसे सबूत रखने को कहा, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

बहस के दौरान माहौल इतना गरमा गया कि विजयवर्गीय ने गुस्से में सिंघार से "औकात में रहो..." कह दिया। इस टिप्पणी पर विपक्षी सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सदन में शोरगुल बढ़ गया।

विजयवर्गीय का स्पष्टीकरण - "मेरे सब्र का बांध टूट चुका है"

मामला बिगड़ता देख कैलाश विजयवर्गीय ने बाद में दुख जताते हुए कहा कि वे स्वयं भी अपने व्यवहार से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा: "आज मैं अपने आप से संतुष्ट नहीं हूं... मेरे सब्र का बांध टूट चुका है... मुझे पहली बार सदन में इतना गुस्सा आया... उमंग की बॉडी लैंग्वेज सही नहीं थी, लेकिन परिस्थितियों में मुझसे यह हो गया।"

उनके इस बयान ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी कि आखिर किस कारण से मंत्री इतने भावुक और आक्रामक हुए।

मुख्यमंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप

स्थिति को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में कहा कि वे सभी की ओर से माफी मांगते हैं और सदन की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद माहौल कुछ शांत हुआ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा कि वे विकास के मुद्दों पर सहयोग के लिए तैयार हैं।

तोमर की टिप्पणी - "गुस्सा दिखे, शब्दों में नहीं"

विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने घटना पर कहा कि दुर्भाग्य से असहज स्थिति बनी और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की वह सीख याद आ गई कि गुस्सा दिख सकता है, लेकिन शब्दों में नहीं झलकना चाहिए। उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की।

राजनीतिक गलियारों में तेज चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इंदौर सहित कई राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर मंत्री विजयवर्गीय के "सब्र का बांध टूटने" के पीछे क्या कारण हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे लंबे समय से चल रहे सियासी तनाव और व्यक्तिगत राजनीतिक दबावों से जोड़कर देख रहे हैं।

विपक्ष का आरोप - सरकार असहिष्णु

विपक्षी दलों का कहना है कि यह घटना सरकार की असहिष्णुता को दर्शाती है और सदन में सवाल उठाने पर इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि बहस के दौरान भावनाएं भड़क सकती हैं और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।

आगे क्या?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में भी सियासी बयानबाजी का मुद्दा बना रह सकता है। विधानसभा की कार्यवाही और राजनीतिक माहौल पर इसका असर देखने को मिल सकता है, खासकर तब जब विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बनाए हुए है।

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