ज्योतिरादित्य सिंधिया पहुंचे बाढ़ से तबाह लिलवारा, ग्रामीणों से की सीधी बात, लाखों की मदद, राहत का भरोसा
Jyotiraditya Scindia News: गुना सांसद और केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज अपने संसदीय क्षेत्र के चार दिवसीय प्रवास के दौरान शिवपुरी जिले के कोलारस तहसील स्थित बाढ़ प्रभावित लिलवारा गाँव का दौरा किया। बाढ़ से बेहाल ग्रामीणों के बीच पहुँचकर उन्होंने सीधे संवाद किया और प्रशासन से मिल रही राहत-सुविधाओं की जानकारी ली।
सिंधिया ने गांव के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ में क्षतिग्रस्त मकानों को देखा, खेतों में हुए नुकसान का आकलन किया और फसल चौपट होने की पीड़ा झेल रहे किसानों का हाल जाना।

लिलवारा में बाढ़ का कहर और सिंधिया का दौरा
पिछले माह, 27 से 29 जुलाई 2025 के बीच गुना, शिवपुरी और अशोकनगर जिलों में भारी बारिश और सिंध नदी के उफान ने भारी तबाही मचाई थी। कोलारस तहसील के लिलवारा गांव उन क्षेत्रों में से एक है, जहां बाढ़ ने ग्रामीणों की जिंदगी को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। मकान ढह गए, फसलें तबाह हो गईं और कई परिवार बेघर हो गए। इस आपदा की घड़ी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सक्रियता दिखाते हुए राहत कार्यों की कमान संभाली थी। आज, 21 अगस्त 2025 को, वह लिलवारा गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मिलकर उनकी पीड़ा को समझा।
सिंधिया ने गांव में बाढ़ से प्रभावित मकानों, खेतों और बुनियादी ढांचे का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और प्रशासन द्वारा प्रदान की जा रही राहत सामग्री, जैसे खाद्यान्न, तिरपाल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है।
लगातार निगरानी और त्वरित राहत प्रयास
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाढ़ की शुरुआत से ही स्थिति पर पैनी नजर रखी थी। 27-29 जुलाई के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और सेना के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा। उनकी सक्रियता के परिणामस्वरूप, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत कार्य शुरू किए गए। सेना की मदद से करीब 500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, और हजारों परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई।
सिंधिया ने 4 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ शिवपुरी और गुना के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी किया था। इस दौरान उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और त्वरित सहायता का आश्वासन दिया। लिलवारा में आज के दौरे में भी उनकी यही संवेदनशीलता दिखाई दी।
लिलवारा को ₹23 लाख की आर्थिक सहायता
सिंधिया के प्रयासों से लिलवारा गांव के बाढ़ प्रभावित परिवारों को अब तक ₹23 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा, खाद्यान्न, तिरपाल, कपड़े और अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की गई है। गांव में पुनर्वास और विस्थापन कार्यों को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। सिंधिया ने आज के दौरे में इन कार्यों की प्रगति का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

प्रशासन की सक्रिय भूमिका
सिंध नदी का जलस्तर अब कम हो चुका है, जिसके बाद बाढ़ से हुए नुकसान का वास्तविक आकलन सामने आ रहा है। शिवपुरी जिला प्रशासन, जिसमें कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार शामिल हैं, लगातार प्रभावित गांवों का दौरा कर क्षति का सर्वे कर रहा है। लिलवारा में राहत सामग्री का वितरण निरंतर जारी है। कलेक्टर रविंद्र सिंह ने बताया कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा, भोजन और अस्थायी आवास प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में तैनात हैं, जो जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए दवाइयां और क्लोरीन टैबलेट वितरित कर रही हैं।
सिंधिया ने आज के दौरे में स्थानीय प्रशासन के साथ विस्तृत चर्चा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास कार्यों में कोई कोताही न बरती जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत मिले और दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं पर काम शुरू हो।
शोक संवेदना और मानवीय संवेदनशीलता
लिलवारा दौरे के बाद सिंधिया ने शिवपुरी के फतेहपुर रोड पर पार्षद सुधीर आर्या के दिवंगत पिता और भाई, साथ ही पार्षद मदन खटीक 'मट्टू' की दिवंगत माता जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने उनके घर पहुंचकर शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान उनके साथ स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। यह कदम उनकी मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो न केवल आपदा प्रबंधन में, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों के दुख-दर्द में शामिल होने को दर्शाता है।












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