MP News: जीतू पटवारी का आरोप: शिवराज सरकार के दौरान अदानी ने किए 80,000 करोड़ रुपये के निवेश के वादे
Bhopal news: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज पत्रकार वार्ता में गंभीर आरोप लगाए और अदानी समूह के खिलाफ घोटाले का मुद्दा उठाया।
उन्होंने बताया कि अदानी समूह ने अमेरिकी कंपनी एजयोर पावर के साथ मिलकर भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन इस प्रोजेक्ट को भारत में समस्याएं आने लगीं, क्योंकि बिजली महंगी थी और कोई भी राज्य उस कीमत पर बिजली खरीदने के लिए तैयार नहीं था।

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार ने अदानी समूह से जुड़े कई बड़े निवेश के वादे किए थे, जिनमें लगभग 80,000 करोड़ रुपये का निवेश शामिल था। उन्होंने बताया कि इस निवेश के अंतर्गत फूड पार्क, लॉजिस्टिक पार्क, पावर प्लांट और अन्य परियोजनाएं शामिल थीं।
पटवारी ने कहा, "शिवराज सिंह की सरकार के दौरान 80,000 करोड़ रुपये के निवेश के वादे किए गए थे, जिसमें 500 करोड़ रुपये का फूड पार्क, 1500 करोड़ रुपये का लॉजिस्टिक पार्क, 39,000 करोड़ रुपये का नवकारिणी ऊर्जा प्रोजेक्ट, 15,000 करोड़ रुपये का सिंगरौली पावर प्लांट, 3,500 करोड़ रुपये का सीमेंट प्लांट देवास में और 25,000 करोड़ रुपये का केन-बेतवा परियोजना शामिल थे। इसके अलावा उज्जैन के कन्वेंशन में 75,000 करोड़ रुपये के निवेश के वादे किए गए।"
उन्होंने कहा कि देश की जनता इन कंपनियों के सरकार से पोषित समर्थन और शेयर बाजार में शेयर की बढ़ती कीमतों के कारण इन कंपनियों में निवेश कर रही थी, लेकिन अब इन निवेशों से जुड़े बड़े वादे और निवेश के परिणाम सामने आ रहे हैं।
अदानी और छोटे निवेशकों का बड़ा नुकसान
पटवारी ने आगे कहा, "अमेरिका में अदानी के खिलाफ वारंट जारी होने के बावजूद, भारत में गरीब निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ। एक ही दिन में 2,26,531 करोड़ रुपये की पूंजी डूब गई है, जिससे छोटे निवेशकों, खुदरा व्यापारियों और गरीबों का जीवन संकट में पड़ गया है।" उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में 600 मिलियन डॉलर के ब्रांड को एक दिन पहले बिक्री से वापस लेना पड़ा, जिससे अदानी की कंपनियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
पटवारी ने कहा कि अदानी समूह की कारगुजारियों ने न केवल भारतीय कारपोरेट जगत की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाया है, बल्कि इसकी वजह से कई ईमानदार और नामचीन भारतीय कंपनियों को भी लाखों करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
कांग्रेस की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने कांग्रेस पार्टी की तरफ से यह भी मांग की कि इस घोटाले की जांच संसद की जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) से कराई जाए और उन अधिकारियों एवं सरकारों को जांच के दायरे में लाया जाए, जिन्होंने रिश्वत दी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारत सरकार अमेरिकी जांच एजेंसियों से जांच के तथ्य मांगकर अदानी समूह के खिलाफ जांच शुरू करेगी।
पटवारी ने कहा कि इस सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी नागरिकों से 25,000 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इस रकम में से 2,236 करोड़ रुपये की घूस देने के प्रमाण अमेरिकी ग्रांड ज्यूरी ने सही पाए हैं। इन घूस की रकम का इस्तेमाल भारत में पावर परचेज आर्डर (PPA) प्राप्त करने के लिए किया गया। एफबीआई और अमेरिकी बाजार रेगुलेटर एसईसी (SEC) द्वारा की गई जांच में यह भी सामने आया कि अदानी ने भारत के बाजार रेगुलेटर सेबी से भी झूठ बोला और भारतीय निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।
उन्होंने कहा, "अमेरिका में अदानी के खिलाफ जांच चल रही है और गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है। इसके बावजूद भारत में इस मामले में कोई जांच नहीं शुरू की गई और न ही सेबी ने कोई कार्रवाई की। क्या भारत सरकार इस घोटाले के आधार पर अमेरिकी सरकार से जांच के तथ्य मांग कर यहां भी मामला दर्ज करेगी?"
पटवारी ने यह भी कहा कि अदानी समूह सदा से भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) की सरकारों को लाभ पहुंचाने के लिए काम करता रहा है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव की सरकारों के दौरान अदानी ने लाखों करोड़ों रुपये के निवेश के वादे किए और इन सरकारों को जीवनदान देने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि शिवराज सिंह सरकार के दौरान 80,000 करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया गया, जिसमें फूड पार्क, लॉजिस्टिक पार्क, पावर प्लांट और अन्य बड़ी परियोजनाओं का समावेश था।
पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका में अदानी के खिलाफ जांच के बावजूद भारतीय छोटे निवेशकों का भारी नुकसान हुआ है, जिनके 2,26,531 करोड़ रुपये एक ही दिन में डूब गए। उन्होंने कहा कि अदानी की कंपनियों के धोखाधड़ी की वजह से भारतीय कारपोरेट जगत की प्रतिष्ठा पर भी दाग लगा है, और कई ईमानदार कंपनियां भी इसका शिकार हुई हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने इस घोटाले की जांच के लिए संसद की जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) से जांच कराए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उन सरकारों और अधिकारियों को जांच के दायरे में लाया जाए, जिन्होंने 2,000 करोड़ से अधिक की रिश्वत ली।
पटवारी ने कांग्रेस पार्टी की तरफ से मांग की कि इस मामले में सख्त कार्रवाई हो और भारत में भी रिश्वतखोरी के गंभीर अपराध पर मुकदमा दर्ज किया जाए।












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