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MP News: भोपाल में जमीयत प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बिगड़े बोल, मचा बवाल, जानिए पूरा मामला

MP News: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने रविवार (29 नवंबर 2025) को भोपाल में एक बड़ा धार्मिक-सामाजिक सम्मेलन में खुलकर न्यायपालिका पर हमला बोला। उन्होंने बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और ज्ञानवापी-काशी जैसे मामलों के फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर सरकार के दबाव में काम करने का सीधा आरोप लगाया।

मदनी ने कहा- "जब बाबरी मस्जिद का फैसला आया, तीन तलाक का फैसला आया, और अब 1991 के उपासना स्थल अधिनियम को दरकिनार करके एक के बाद एक मस्जिदों-दरगाहों पर सर्वे और दावे हो रहे हैं, तो ऐसा लगता है कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। संविधान में अल्पसंख्यकों को जो अधिकार दिए गए हैं, उनका खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

Jamiat chief Maulana Mahmood Madani controversial statement on Supreme Court in Bhopal

सुप्रीम कोर्ट तभी तक 'सुप्रीम' है, जब तक वहां संविधान सुरक्षित है। अगर संविधान सुरक्षित नहीं रहेगा, तो वह सुप्रीम कोर्ट इस नाम का हकदार नहीं रहेगा।" यह बयान भोपाल के इकबाल मैदान में आयोजित जमीयत उलेमा-ए-हिंद के विशाल सम्मेलन में आया, जिसमें देशभर से हजारों लोग पहुंचे थे।

1991 का उपासना स्थल अधिनियम क्यों बार-बार याद दिलाया?

मदनी ने खास तौर पर 1991 के Places of Worship Act का जिक्र किया। यह कानून नरसिम्हा राव सरकार ने लाकर पास किया था, जिसकी धारा-4 स्पष्ट कहती है कि "15 अगस्त 1947 को किसी भी धार्मिक स्थल का जो चरित्र था, वही रहेगा। उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।"

मदनी ने कहा, "बाबरी मस्जिद को छोड़कर बाकी सभी धार्मिक स्थलों को इस कानून से संरक्षण दिया गया था। लेकिन आज ज्ञानवापी, शाही ईदगाह मथुरा, अजमेर शरीफ की दरगाह, संभल की जामा मस्जिद - एक के बाद एक जगहों पर सर्वे हो रहे हैं, दावे हो रहे हैं। यह 1991 के कानून की खुली अवमानना है।

जब सुप्रीम कोर्ट ने खुद बाबरी फैसले में इस कानून को 'संविधान का अभिन्न अंग' बताया था, तो आज उसी कोर्ट के नीचे की अदालतें इस कानून को नजरअंदाज कर रही हैं - यह सवाल बहुत गंभीर है।"

तीन तलाक का फैसला भी निशाने पर

मदनी ने तीन तलाक को क्रिमिनल बनाने वाले कानून और सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले को भी निशाना बनाया। उन्होंने कहा, "तीन तलाक को आपराधिक बनाने का कानून सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए लाया गया। हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी - किसी भी समुदाय में तलाक के बाद कोई जेल नहीं जाता। सिर्फ मुसलमान जाता है।

यह समानता के अधिकार (आर्टिकल 14) का खुला उल्लंघन है। लेकिन अदालतें चुप हैं"

"संविधान खतरे में है" - मदनी का सबसे बड़ा आरोप, सम्मेलन में मदनी ने सबसे बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, "आज देश में संविधान और लोकतंत्र दोनों खतरे में हैं। न्यायपालिका का काम संविधान की रक्षा करना है, लेकिन जब वह सरकार के इशारे पर फैसले देने लगे, तो फिर संविधान कौन बचाएगा? हम चुप नहीं बैठेंगे। हम संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखेंगे, सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।"

मंच पर मौजूद बड़े नाम

सम्मेलन में मौलाना अरशद मदनी (जमीयत के दूसरे धड़े के अध्यक्ष), मौलाना सईदुर्रहमान नदवी (लखनऊ), इमाम उमर अहमद इलियासी (ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन), मौलाना हकीमुद्दीन कासमी समेत कई बड़े उलेमा मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में मदनी का समर्थन किया।

भाजपा का पलटवार

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने मदनी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी -"जो लोग संविधान की बात करते हैं, वे ही 1991 का कानून चुनिंदा तरीके से याद करते हैं। बाबरी मस्जिद का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर दिया था। ज्ञानवापी और अन्य मामलों में कोर्ट ने सिर्फ सर्वे की इजाजत दी है, फैसला अभी बाकी है। मदनी साहब को अदालत पर भरोसा रखना चाहिए, न कि राजनीति करनी चाहिए।"

मुस्लिम समाज में गुस्सा और चिंता

भोपाल के कई बुजुर्गों और युवाओं ने निजी बातचीत में कहा - "पहले लगा था कि बाबरी के बाद मामला खत्म हो जाएगा। लेकिन अब हर शहर में एक मस्जिद को निशाना बनाया जा रहा है। अदालतें सिर्फ हिंदू पक्ष की अर्जी पर सर्वे की इजाजत दे रही हैं, मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर सालों सुनवाई नहीं होती। मौलाना मदनी ने जो कहा, वह दिल की बात कही है।"

संविधान बचाओ या सुप्रीम कोर्ट?

मौलाना महमूद मदनी का भोपाल वाला बयान सिर्फ एक भाषण नहीं था - यह देश के मुस्लिम समाज में बढ़ती बेचैनी का आईना था। 1991 का उपासना स्थल कानून, बाबरी फैसला, ज्ञानवापी सर्वे, तीन तलाक कानून - ये सारे मुद्दे एक साथ जोड़कर मदनी ने सीधा सवाल उठाया है कि "क्या सच में न्यायपालिका अब भी संविधान के साथ खड़ी है?" यह सवाल अब सिर्फ मुसलमानों का नहीं रहा। यह सवाल पूरे देश के उन लोगों का हो गया है, जो संविधान को सर्वोपरि मानते हैं।
जमीयत ने ऐलान किया है कि दिसंबर में दिल्ली में विशाल संविधान बचाओ सम्मेलन होगा। उससे पहले भोपाल में दिया गया यह बयान पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

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