MP के सरकारी स्कूलों की कैसे हुई बदहाली, 3.50 लाख कम प्रवेश, 5000 स्कूल बंद होने की कगार पर, जानिए कैसे
MP government schools News: मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की स्थिति "बेहद चिंताजनक और शर्मनाक" है। पिछले सालों की तुलना में सरकारी स्कूलों में 3.50 लाख कम प्रवेश हुए हैं और 5,000 से अधिक स्कूल बंद होने की कगार पर हैं।
सिंघार ने सवाल उठाया - बच्चे पढ़ाई क्यों छोड़ रहे हैं? क्योंकि स्कूल दूर होते जा रहे हैं, शिक्षक कम हैं और शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर की जा रही है। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में एक किलोमीटर की दूरी भी बच्चों के लिए दीवार बन जाती है। गरीब परिवार न बस का किराया उठा सकते हैं, न बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगा सकते हैं। उन्होंने सरकार से तुरंत जवाब मांगा - "बच्चों को स्कूल से बाहर क्यों धकेला जा रहा है? शिक्षा को आखिरी प्राथमिकता क्यों बना दिया गया?"

यह बयान विधानसभा में शिक्षा विभाग की समीक्षा और हालिया आंकड़ों के आधार पर आया है। कांग्रेस ने इसे "शिक्षा पर भाजपा सरकार की उदासीनता" का प्रमाण बताया। वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए नेता प्रतिपक्ष के आरोपों का पूरा विवरण, सरकारी स्कूलों के आंकड़े, बंद होने की कगार पर स्कूलों की वजहें और शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का तीखा हमला: "शर्मनाक हालत, बच्चों का भविष्य दांव पर"
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उमंग सिंघार ने कहा:
- "मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है।"
- "पिछले सालों के मुकाबले 3.50 लाख कम प्रवेश।"
- "5,000 से अधिक स्कूल बंद होने की कगार पर।"
- "बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं क्योंकि स्कूल दूर, शिक्षक कम और व्यवस्था कमजोर।"
- "ग्रामीण-आदिवासी इलाकों में 1 किमी दूरी भी दीवार बन जाती है।"
- "गरीब परिवार बस किराया या सुरक्षा का जोखिम नहीं उठा सकते।"
- "सरकार जवाब दे - बच्चों को स्कूल से बाहर क्यों धकेला जा रहा है?"
- "शिक्षा को सबसे आखिरी प्राथमिकता क्यों बना दिया?"
- "अगर आज स्कूल बंद होंगे, तो कल सपने, रोजगार और भविष्य सब बंद हो जाएंगे।"
सिंघार ने शिक्षा मंत्री को घेरते हुए कहा कि बजट बढ़ाने के दावे खोखले हैं, जब जमीन पर सुविधाएं नहीं।
सरकारी स्कूलों के चौंकाने वाले आंकड़े: प्रवेश गिरा, स्कूल बंद होने की कगार
शिक्षा विभाग के आंकड़ों और RTE फोरम की रिपोर्ट से:
- प्रवेश में गिरावट: 2024-25 में सरकारी स्कूलों में 3.50 लाख कम नामांकन।
- कम छात्र वाले स्कूल: 5,000+ स्कूलों में 50 से कम बच्चे। मर्जर या बंद होने की कगार।
- शिक्षक कमी: हजारों पद खाली। एक शिक्षक पर 50+ बच्चे।
- दूरी की समस्या: ग्रामीण क्षेत्रों में हाई स्कूल 5-10 किमी दूर।
- ड्रॉपआउट: गरीबी, दूरी और सुविधा कमी से बढ़ा।
RTE एक्टिविस्ट: "मर्जर नीति से गांव के स्कूल बंद, बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे।"
बंद होने की कगार पर स्कूल: मर्जर नीति का असर
सरकार की "रेशनलाइजेशन" नीति:
- कम छात्र वाले स्कूल मर्ज।
- शिक्षक ट्रांसफर।
- लेकिन परिवहन या हॉस्टल सुविधा नहीं।
- आदिवासी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर।
कांग्रेस का आरोप: "यह शिक्षा को निजी हाथों में सौंपने की साजिश।"
सरकार का पक्ष: बजट बढ़ा, सुविधाएं दीं
शिक्षा मंत्री ने कहा:
- बजट 37,000 करोड़ तक बढ़ा।
- नए स्कूल भवन, शिक्षक भर्ती।
- PM पोषण, साइकिल योजना जारी।
- "कम छात्र वाले स्कूल मर्ज कर संसाधन बेहतर उपयोग।"
बच्चों का भविष्य दांव पर
नेता प्रतिपक्ष का हमला शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर रहा है। 3.50 लाख कम प्रवेश और 5000 स्कूल बंद होने की कगार - यह चिंता की बात है। सरकार जवाब देगी या सुधार? बच्चों का भविष्य दांव पर है। वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।
(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी, भोपाल ब्यूरो)












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