मध्य प्रदेश : प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी, गाय के आहार के लिए हर महीने मिलेंगे 900 रुपये
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती करने वाला किसान अगर गाय खरीदा, तो उससे हर महीने 900 रुपए गाय के आहार के लिए दिए जाएंगे।
भोपाल, 18 मई। सीएम शिवराज ने आज निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीहोर जिले के नसरूल्लागंज में आयोजित प्राकृतिक खेती कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। किसानो को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल कर्मकांड नहीं है, धरती को बचाने का अभियान भी है। नदियों को बचाने का अभियान है। इंसान की जिंदगी को भी बचाने का अभियान है। ये धरती केवल मनुष्यों के लिए नहीं है, पशु-पक्षी, कीट-पतंगे, जीव-जंतुओं के लिए भी है।

केमिकल फर्टिलाइजर के उपयोग पर जताई चिंता
सीएम ने कहा कि केमिकल फर्टिलाइजर ने अनकों जीव-जंतु, कीट मित्रों को भी समाप्त कर दिया है। धरती का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है।
हम जितनी मात्रा में रासायनिक खाद डाल रहे हैं। कीटों को मारने के लिए अलग-अलग दवाइयां डालते हैं। उससे सिर्फ कीट नहीं मरते, वो फसल जब हम हम भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं तो उससे हमारी सेहत को नुकसान पहुंचता है। कैंसर जैसी घातक बीमारी को जन्म देता है।
केमिकल फर्टिलाइजर से धरती से मित्र कीट समाप्त हो रहे हैं। केंचुआ समाप्त हो रहे हैं। धरती का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। पंजाब में जाकर देखिए खेती की उर्वरा शक्ति समाप्त हो रही है।

गाय के आहार के लिए हर महीने 900 रुपये
सीएम शिवराज ने किसानों से कहा कि प्राकृतिक खेती से जो हम अन्न, सब्जियां, फल-फूल का उत्पादन करते है, उसका दाम भी हमें अच्छा मिलेगा। उन्होंने बताया कि आज से प्रदेश के 17 जिलों में प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ हुआ है।प्रदेश के सभी जिलों में प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेंगे।
उन्होंने कहा कि हमने तय किया है कि जो किसान प्राकृतिक खेती करेगा, उसके पास यदि गाय नहीं है और वह गाय खरीदता है तो गाय के आहार के लिए हर महीने 900 रुपए दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद
सीएम शिवराज ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi) जी को विशेष रूप से धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने धरती बचाने का अभियान चलाया है। मिट्टी बचाओ, धरती बचाओं।
हमें धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए रहने देना है या नहीं। ये धरती केवल अपनी बपौती नहीं है। हमारे बच्चों, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। उनको क्या स्वस्थ और जिंदा रहने का अधिकार नहीं है।
हम धीरे-धीरे रासायनिक खेती को कम कर प्राकृतिक की तरफ बढ़ें।अद्भुत है प्राकृतिक खेती। पिछले दिनों गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्री Acharya Devvrat जी मध्यप्रदेश प्रवास पर आए थे। उन्होंने प्राकृतिक खेती पर बहुत अच्छा मार्गदर्शन दिया।

प्राकृतिक खेती से उत्पादन नहीं घटता
सीएम शिवराज ने कहा कि मुझे बताते हुए खुशी है कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन नहीं घटता। चाहे वो गेहूं हो, धान हो, फल हो या सब्जियां हो, वो पूरी तरह से दोष रहित होती है। पौष्टिक तत्वों से भरपूर रहती है। स्वाद भी उनका अलग रहता है।
प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की खेती है। प्राकृतिक खेती मतलब केमेस्ट्री की लैब से निकलकर प्रकृति की लैब में ले जाने वाली खेती है।
प्राकृतिक खेती मतलब लागत कम, मुनाफा ज्यादा। रासायनिक खाद से उत्पादन तो खूब दिखता है, लेकिन जब किसान कर्ज चुकाता है तो खलिहान खाली हो जाता है। अधिकांश पैसा खाद, पेस्टिसाइड में खर्च हो जाता है।
प्राकृतिक खेती मतलब जीरो बजट की खेती। प्राकृतिक खेती मतलब आम के आम गुठलियों के दाम। प्राकृतिक खेती का मतलब हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती कैसे करें इस बारे में आपको स्वामी जी और विशेषज्ञ बताएंगे।

पांच एकड़ में सीएम शिवराज शुरू करेंगे प्राकृतिक खेती
मैंने स्वयं तय किया है कि पांच एकड़ भूमि में इसी खरीफ की फसल से मैं भी प्राकृतिक खेती शुरू करूंगा। मेरी किसान भाइयों से अपील है कि आप भी अपने खेत के आधे हिस्से में प्राकृतिक खेती शुरू कीजिए।
मेरे किसान मित्रों प्राकृतिक खेती के जो लाभ है यह पूरी तरह से कुदरती खेती है। यह भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ाती है। इसमें रासायनिक खाद, कीटनाशक की जरूरत नहीं पड़ती है। इसमें पानी भी कम लगता है।












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