MP News: नेपाल हिंसा में फंसे छतरपुर के चार परिवार काठमांडू से कैसे निकले सुरक्षित, जानिए पूरी कहानी
नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ 'जेन-ज़ी' आंदोलन हिंसक प्रदर्शनों में बदल गया, जिसके चलते हजारों भारतीय पर्यटक काठमांडू सहित अन्य शहरों में फंस गए। इनमें मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के चार परिवार भी शामिल थे, जिनमें कुल 14 लोग थे।
ये परिवार गुरुवार को बड़ी मुश्किलों के बाद काठमांडू से अपने घर छतरपुर के लिए रवाना हुए। नेपाल में भड़की हिंसा, आगजनी और कर्फ्यू ने इन परिवारों को डर के साये में जीने को मजबूर कर दिया था। हालांकि, भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन की मदद से ये लोग सुरक्षित निकल पाए, लेकिन उनकी यात्रा अनिश्चितता और भय से भरी रही।

छतरपुर के परिवारों की कहानी
छतरपुर के गल्ला मंडी क्षेत्र के रहने वाले व्यापारी पप्पू मातेले, ट्रांसपोर्ट कारोबारी निर्देश अग्रवाल, गुड्डू अग्रवाल और एक कुशवाहा परिवार नेपाल घूमने गए थे। इन परिवारों में 6 बच्चे भी शामिल थे। ये लोग 6 सितंबर को निजी वाहनों से नेपाल रवाना हुए थे और 7 सितंबर को पोखरा पहुंचे। 9 सितंबर की रात को काठमांडू पहुंचने के बाद 10 सितंबर की सुबह अचानक हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, और कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी, जिसके बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लागू हो गया।
निर्देश अग्रवाल ने एक वीडियो जारी कर बताया, "हम लोग पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के लिए काठमांडू आए थे। अचानक हिंसा भड़क गई। होटल के आसपास इमारतें जल रही थीं, पुलिस चौकियां लूटी जा रही थीं। हम डर के मारे होटल में ही बंद रहे। खाने-पीने की चीजें भी खत्म हो गई थीं।" उन्होंने बताया कि दो दिन तक भूखे रहना पड़ा, क्योंकि होटल के बाहर जाना जोखिम भरा था। बच्चों और महिलाओं को मामूली ब्रेड और नमकीन से काम चलाना पड़ा।
नेपाल में हिंसा की स्थिति
नेपाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, इंस्टाग्राम, X, टिकटॉक) पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ 'जेन-ज़ी' आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के आवास, और कई सरकारी इमारतों में आगजनी की। पुलिस के साथ झड़पों में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से अधिक घायल हैं। काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया, जिसके चलते कई पर्यटक फंस गए। नेपाल की सेना ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मोर्चा संभाला और देशव्यापी कर्फ्यू लागू किया गया।
छतरपुर के परिवारों की निकासी
छतरपुर के चार परिवार, जिनमें 14 लोग शामिल थे, गुरुवार को चार निजी गाड़ियों में सवार होकर काठमांडू से भारत की ओर रवाना हुए। इन परिवारों ने बताया कि नेपाल की सेना ने उन्हें बॉर्डर तक जाने की अनुमति नहीं दी थी, क्योंकि हिंसा के कारण सड़कें असुरक्षित थीं। भारतीय दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन शुरू में कोई ठोस मदद नहीं मिली। बाद में, छतरपुर की विधायक ललिता यादव और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हस्तक्षेप के बाद केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास ने इन परिवारों की सुरक्षित निकासी के लिए कदम उठाए।
निर्देश अग्रवाल ने मीडिया को बताया, "हमने भारतीय दूतावास से संपर्क किया, लेकिन शुरू में कोई जवाब नहीं मिला। बाद में विधायक ललिता यादव ने हमसे वीडियो कॉल पर बात की और आश्वासन दिया कि हमें सुरक्षित निकाला जाएगा।" गुरुवार को इन परिवारों को गाड़ियों के जरिए बॉर्डर तक पहुंचाया गया, जहां से वे छतरपुर के लिए रवाना हुए। हालांकि, नेपाल-भारत सीमा पर सख्त जांच और हिंसा का डर उनकी यात्रा को जोखिम भरा बनाए रहा।
स्थानीय और केंद्रीय प्रशासन की भूमिका
छतरपुर की विधायक ललिता यादव ने फंसे हुए परिवारों से वीडियो कॉल के जरिए बात की और मध्य प्रदेश सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास किए। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इसकी जानकारी दी गई है। हमारी सरकार पहले भी विदेशों में फंसे लोगों को सुरक्षित लाई है, और इस बार भी ऐसा ही होगा।" मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं और भारत सरकार के साथ मिलकर छतरपुर के लोगों को सुरक्षित लाने के प्रयास जारी हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी विदेश सचिव से बात कर नेपाल में फंसे लगभग 1,000 भारतीयों की सुरक्षित वापसी का आश्वासन लिया। एयर इंडिया ने भी विशेष उड़ानें शुरू की हैं, ताकि फंसे हुए यात्रियों को काठमांडू से निकाला जा सके।
ग्रामीणों और परिजनों में दहशत
छतरपुर में फंसे परिवारों के परिजनों में उस समय दहशत फैल गई थी, जब उन्हें नेपाल में हिंसा और आगजनी की खबरें मिलीं। निर्देश अग्रवाल ने होटल की खिड़की से हिंसा और आगजनी का वीडियो बनाकर अपने परिजनों को भेजा, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई। एक परिजन ने बताया, "हमें रात भर नींद नहीं आई। टीवी पर नेपाल की खबरें देखकर डर लग रहा था।" सौभाग्य से, इन परिवारों की सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन नेपाल में बिगड़ते हालात ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।












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