Bhopal News: भोपाल में 20% बढ़ गए आई फ्लू के मरीज, आंखों में जलन के साथ दर्द, 15 दिन में और बढ़ेगा संक्रमण
Bhopal News: बारिश का मौसम आते ही राजधानी सहित प्रदेश के कई जिलों में आई फ्लू (कंजंक्टिवाइटिस) का खतरा बढ़ गया है। शहर के अलग-अलग अस्पतालों की ओपीडी में आई फ्लू के लक्षण वाले मरीजों की संख्या में 20 फीस दी का इजाफा हुआ है।
भोपाल के डॉक्टरों का कहना है कि अभी जो संक्रमण सामान्य है, माह के अंत तक यह दो गुना बढ़ जाएगा। लोगों को चाहिए कि वह आई फ्लू के संक्रमण से बचने के उपायों को अपनाएं।

जेपी अस्पताल के पूर्व नेत्र रोग चिकित्सक डॉक्टर केके अग्रवाल के मुताबिक इस मौसम में भी नमी ज्यादा होती है। इससे आई फ्लू होने की संभावना बढ़ जाती है। उमस और मौजूदा तापमान आई फ्लू के लिए सबसे अनुकूल होता है। ओपीडी में आने वाले मरीजों की आंखों में लालीपन, पानी का आना, पलकों का चिपक जाना जैसे दूसरे लक्षण देखने को मिल रहे हैं।

डॉक्टर के अनुसार यह सावधानी बरतें
- अपने हाथों को साफ रखें, उसे सेनीटाइज करते रहें
- बिना साबुन से हाथ धोएं आंखों को न छुए
- डॉक्टर की सलाह लेकर ही दवा लें
- काला चश्मा पहन करी धूप में निकले
- संक्रमित लोगों से दूर रहे, उनके किसी चीज को शेयर ना करें
आई फ्लू के लक्षण
आंखों में लालीपन और सूजन आना, खुजली होना, पीले रंग का पीप निकलना, पलकों का चिपक जाना, आई फ्लू होने पर बुखार भी हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह से लें आए ड्रॉप, बार-बार आंखों को न छुए
भोपाल के सरकारी अस्पताल के डॉक्टर के के श्रीवास्तव के मुताबिक इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि संक्रमित व्यक्ति के बिस्तर, रुमाल टोलियां आदि शेयर ना करें। बार-बार आंखों को न छुए। चार से सात दिन एंटीबायोटिक ड्रॉप लेने से यह ठीक हो जाता है। किसी भी आई ड्रॉप का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले।
आई फ्लू में ऐसा बिल्कुल ना करें
हमीदी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से कुबरी बताते हैं कि यहां का सफेद हिस्सा और पलकों की सट्टा कंजेक्टिवा नाम की एक पतली सी झिल्ली से ढकी होती है। इसी झिल्ली में अगर सूजन आ जाए या लाल हो जाए तो उसे कंजंक्टिवाइटिस कहते हैं। मानसून के समय वायरस बैक्टीरिया, क्लाइमेड़िया की वजह से संक्रमण होने का डर रहता है।












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