MP News: विदिशा में नशे का जाल, ₹1.10 लाख की ब्राउन शुगर के साथ एक गिरफ्तारी, लेकिन सप्लाई चेन अब भी रहस्य
Vidisha News: विदिशा जिले में नशे का अवैध कारोबार लगातार तेजी से फैलता जा रहा है, लेकिन इसे रोकने में पुलिस की भूमिका पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। हाल ही में सिविल लाइन थाना पुलिस ने ₹1.10 लाख की ब्राउन शुगर के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार कर जरूर सुर्खियां बटोरीं, लेकिन इस कार्रवाई के बाद कई अहम सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में नशे का नेटवर्क लगातार सक्रिय है, तो पुलिस सिर्फ छोटे स्तर के आरोपियों तक ही क्यों सिमट कर रह जाती है? ब्राउन शुगर आखिर कहां से आई, किस रूट से विदिशा पहुंची और जिले में किन-किन इलाकों में इसकी सप्लाई की जा रही थी - इन बिंदुओं पर पुलिस के पास कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आ सकी है।

10 ग्राम ब्राउन शुगर जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार
थाना सिविल लाइन पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर करैया खेड़ा रोड बायपास के पास दबिश देकर एक आरोपी को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से करीब 10 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई, जिसकी अनुमानित कीमत ₹1,10,000 बताई जा रही है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध क्रमांक 959/25, धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है।
सवालों के घेरे में पुलिस की कार्यप्रणाली
हालांकि यह कार्रवाई कागजों में प्रभावी दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आती है। जिले में लगातार बढ़ते नशे के मामलों के बावजूद अब तक किसी बड़े सप्लायर या नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाया है। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि पुलिस सिर्फ छोटे आरोपियों को पकड़कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नशे का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
एसपी से संपर्क की कोशिशें नाकाम
विदिशा एसपी रोहित कश्वनी से जब भी इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, वे लगातार "व्यस्त" नजर आए। ऐसे में आम जनता और मीडिया के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिले में बढ़ते नशे जैसे गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से क्यों बच रहे हैं?
पुलिस कार्यालयों में सूचना देने से परहेज?
आरोप यह भी हैं कि विदिशा पुलिस के कई कार्यालयों में आम जनता को जानकारी देने से साफ तौर पर बचा जाता है। एसपी कार्यालय के बाहर नोटिस लगाए जाने की चर्चा आम है, जिनमें लिखा रहता है कि "यहां जानकारी नहीं दी जाती।"
लाइसेंस शाखा में पदस्थ अधिकारी SI प्रीतम रघुवंशी द्वारा कार्यालय के बाहर लगाया गया नोटिस - "यहां लाइसेंस संबंधी जानकारी न पूछें" - प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। जब लाइसेंस शाखा में ही लाइसेंस से जुड़ी जानकारी नहीं मिलेगी, तो नागरिक आखिर कहां जाए?
जनता के पैसे से वेतन, फिर जवाबदेही क्यों नहीं?
आम लोगों का कहना है कि पुलिस अधिकारी और कर्मचारी जनता के टैक्स के पैसों से वेतन लेते हैं, इसके बावजूद यदि न तो उन्हें जानकारी दी जाए और न ही पत्रकारों के सवालों का जवाब मिले, तो इसे क्या कहा जाए? यह रवैया न केवल पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना के भी खिलाफ है।
नशे के खिलाफ ठोस रणनीति की जरूरत
विदिशा में नशे के बढ़ते कारोबार को देखते हुए अब सिर्फ प्रतीकात्मक कार्रवाइयों से काम नहीं चलेगा। जरूरत है कि पुलिस सप्लाई चेन, बड़े तस्करों और उनके नेटवर्क तक पहुंचे। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही और सूचना व्यवस्था में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जाए।
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो नशे का यह जाल आने वाले समय में पूरे जिले के युवाओं के भविष्य को अंधेरे में धकेल सकता है।












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