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Bhopal News: डॉग लवर का ड्रामा, जाट खेड़ी की महिंद्रा ग्रीन वुड कॉलोनी में आवारा कुत्तों को लेकर हंगामा

MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जाट खेड़ी क्षेत्र में स्थित महिंद्रा ग्रीन वुड कॉलोनी में आवारा कुत्तों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कॉलोनी की रहवासी कामना मिश्रा, जो खुद को डॉग लवर बताती हैं, पर आरोप है कि वह आवारा कुत्तों को कॉलोनी में लाकर छोड़ रही हैं, जिससे बच्चों और राहगीरों को खतरा हो रहा है।

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि ये कुत्ते बच्चों और आने-जाने वालों को काट रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने मिसरोद थाने में कामना मिश्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। इस मामले ने तब तूल पकड़ा, जब कामना का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह कथित तौर पर कह रही हैं, "मैं तो रोज आऊंगी, यदि बच्चों को कुत्ते काटे तो इंजेक्शन लगवा लेना। पुलिस मेरा कुछ नहीं करेगी।" इस बयान ने कॉलोनी वासियों में गुस्सा और भय पैदा कर दिया है।

Drama of a dog lover uproar over stray dogs in Mahindra Green Wood Colony of Jat Khedi

विवाद की शुरुआत: आवारा कुत्तों का आतंक

महिंद्रा ग्रीन वुड कॉलोनी में पिछले कुछ समय से आवारा कुत्तों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। रहवासियों का कहना है कि इन कुत्तों ने कॉलोनी में आतंक मचा रखा है। बच्चों को खेलने में डर लगता है, और बुजुर्गों को सड़कों पर चलना मुश्किल हो गया है। कई लोगों ने दावा किया है कि इन कुत्तों ने बच्चों और राहगीरों को काटा है, जिसके चलते उन्हें रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पड़े।

स्थानीय निवासी राजेश शर्मा ने बताया, "कामना मिश्रा कॉलोनी में बाहर से आवारा कुत्तों को लाकर छोड़ देती हैं। ये कुत्ते न तो वैक्सीनेटेड हैं और न ही स्टेरलाइज्ड। इन्होंने कई बच्चों को काटा है, और अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग अपने घरों से निकलने में डरने लगे हैं।" एक अन्य रहवासी, अनीता वर्मा ने कहा, "हम जानवरों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले है। कामना का रवैया ठीक नहीं है। वह हमारी शिकायतों को नजरअंदाज कर रही हैं और उल्टा हमें ही धमका रही हैं।"

वायरल वीडियो ने बढ़ाया तनाव

इस विवाद ने तब और तूल पकड़ा, जब कामना मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में वह कथित तौर पर कॉलोनी वासियों से बहस करती नजर आ रही हैं। वीडियो में वह कहती हैं, "मैं तो रोज़ आऊंगी। यदि बच्चों को कुत्ते काटे तो इंजेक्शन लगवा लेना। मिसरोद थाने जाओ तो बता देना, मैं जागते रहूं या सो जाऊं। पुलिस मेरा कुछ नहीं करेगी।" इस बयान ने रहवासियों में गुस्सा और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा दिया।

रहवासियों का कहना है कि कामना का यह रवैया न केवल उकसाने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि वह अपनी जिम्मेदारी से भाग रही हैं। एक रहवासी, सुनील यादव ने कहा, "वह कुत्तों को लाकर छोड़ देती हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं करतीं। न तो वह इन कुत्तों को खाना देती हैं और न ही उनकी वैक्सीनेशन या स्टेरलाइजेशन की जिम्मेदारी लेती हैं। इससे कुत्ते आक्रामक हो रहे हैं।"

मिसरोद थाने में शिकायत

गुस्साए रहवासियों ने मिसरोद पुलिस थाने में कामना मिश्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। शिकायत में कहा गया है कि कामना द्वारा कॉलोनी में आवारा कुत्तों को लाना और उनकी देखभाल न करना कॉलोनी की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। रहवासियों ने पुलिस से मांग की है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए और कुत्तों को कॉलोनी से हटाने के लिए भोपाल नगर निगम (बीएमसी) के साथ समन्वय किया जाए।

मिसरोद थाने के एक अधिकारी ने बताया, "हमें रहवासियों की शिकायत मिली है। हम इस मामले की जांच कर रहे हैं। साथ ही, हम बीएमसी के पशु नियंत्रण विभाग से संपर्क कर रहे हैं ताकि कॉलोनी में आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान किया जा सके।"

कामना मिश्रा का पक्ष

कामना मिश्रा ने अपने बचाव में कहा कि वह एक पशु प्रेमी हैं और आवारा कुत्तों की देखभाल करना उनका जुनून है। उन्होंने दावा किया कि वह इन कुत्तों को खाना देती हैं और उनकी वैक्सीनेशन और स्टेरलाइजेशन की प्रक्रिया में मदद करती हैं। कामना ने रहवासियों के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश के चलते उनके खिलाफ शिकायत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "मैं इन कुत्तों को सड़कों पर भूखा मरने के लिए नहीं छोड़ सकती। कॉलोनी के लोग इन कुत्तों के प्रति क्रूरता दिखाते हैं और इन्हें भगाने के लिए पत्थर मारते हैं। मेरे खिलाफ शिकायत करने वाले लोग जानवरों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं।" कामना ने यह भी दावा किया कि वह बीएमसी के नियमों का पालन करती हैं और कुत्तों की देखभाल के लिए एनजीओ के साथ काम करती हैं।

आवारा कुत्तों की समस्या, भोपाल में बढ़ता संकट

भोपाल में आवारा कुत्तों की समस्या कोई नई बात नहीं है। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या ने कई कॉलोनियों में रहवासियों के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। मध्य प्रदेश बाल संरक्षण आयोग ने हाल ही में बीएमसी को पत्र लिखकर शहर को आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों से मुक्त करने के लिए प्रभावी योजना बनाने को कहा था। आयोग के अध्यक्ष डॉ. डेविड मोरे ने कहा था कि मिनाल रेजिडेंसी में एक छह महीने के बच्चे की आवारा कुत्तों द्वारा मौत का मामला दिल दहलाने वाला था।

सुप्रीम कोर्ट और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई) के दिशानिर्देशों के अनुसार, आवारा कुत्तों को मारना गैरकानूनी है। इसके बजाय, उनकी स्टेरलाइजेशन और वैक्सीनेशन की प्रक्रिया को बढ़ावा देना जरूरी है। हालांकि, भोपाल में बीएमसी की ओर से इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। कई रहवासियों का कहना है कि बीएमसी कुत्तों को पकड़ने के बाद उन्हें दूसरी कॉलोनियों में छोड़ देता है, जिससे कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं।

रहवासियों की चिंता, बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

महिंद्रा ग्रीन वुड कॉलोनी के रहवासियों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा है। एक अभिभावक, रीना चौहान ने कहा, "हम अपने बच्चों को पार्क में खेलने नहीं भेज सकते, क्योंकि कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं। कामना मिश्रा को चाहिए कि वह कुत्तों की जिम्मेदारी ले और उनकी देखभाल करे, न कि उन्हें कॉलोनी में छोड़ दे।"

कॉलोनी की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है। आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष ने कहा, "हम जानवरों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कॉलोनी में बच्चों और रहवासियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम बीएमसी से मांग करते हैं कि वह इन कुत्तों को स्टेरलाइज और वैक्सीनेट करे और कॉलोनी में उनकी संख्या नियंत्रित करे।"

इस मामले ने भोपाल में सियासी और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने बीएमसी की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के स्थानीय नेता राकेश वर्मा ने कहा, "बीजेपी शासित बीएमसी आवारा कुत्तों की समस्या को हल करने में पूरी तरह विफल रही है। यह मामला केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर की समस्या है।"

वहीं, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आवारा कुत्तों के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। एक स्थानीय एनजीओ की कार्यकर्ता, प्रिया सिंह ने कहा, "लोग कुत्तों को पत्थर मारते हैं और उनके साथ क्रूरता करते हैं, जिससे वे आक्रामक हो जाते हैं। सरकार और बीएमसी को चाहिए कि वे स्टेरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाएं।"

आगे की राह

यह मामला भोपाल में आवारा कुत्तों की समस्या और पशु प्रेमियों व रहवासियों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है। मिसरोद पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, और बीएमसी को भी इस दिशा में कदम उठाने के लिए कहा गया है। रहवासियों ने मांग की है कि कॉलोनी में कुत्तों की संख्या को नियंत्रित किया जाए और उनकी वैक्सीनेशन और स्टेरलाइजेशन सुनिश्चित की जाए।

कामना मिश्रा के वायरल वीडियो ने इस मामले को और जटिल बना दिया है। यह देखना बाकी है कि पुलिस और बीएमसी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। साथ ही, यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि क्या भोपाल में आवारा कुत्तों की समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकता है, जो न केवल रहवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, बल्कि पशु प्रेमियों की भावनाओं का भी सम्मान करे।

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