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MP Gwalior News: आंबेडकर को अंग्रेज एजेंट बताने वाले पर SC/ST एक्ट और बुलडोजर कार्रवाई हो- कांग्रेस प्रवक्ता

मध्य प्रदेश में दलित समाज और संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान को लेकर राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मिथुन अहिरवार ने आज एक बयान जारी कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

अहिरवार ने कहा कि कुछ 'असामाजिक तत्व' बाबा साहब को 'अंग्रेजों का एजेंट' बताकर उनका अपमान कर रहे हैं, और BJP सरकार उनकी गिरफ्तारी न करके उन्हें संरक्षण दे रही है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी के खिलाफ SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST एक्ट) के तहत केस दर्ज हो और उसके घर पर 'बुलडोजर कार्रवाई' की जाए।

Dr Ambedkar SC ST Act and bulldozer action against advocate Anil Mishra MP Congress Mithun Ahirwar

अगर ऐसा न हुआ, तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतरेंगे। यह बयान न सिर्फ दलित समाज की भावनाओं को जगाता है, बल्कि BJP की 'बुलडोजर नीति' पर भी सवाल खड़े करता है। आइए, सरल भाषा में इस पूरे मामले को विस्तार से समझें-विवाद कैसे शुरू हुआ, अहिरवार की मांगें क्या हैं, बाबा साहब का योगदान क्यों महत्वपूर्ण, और राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं।

बाबा साहब को 'अंग्रेज एजेंट' बताने का अपमान-क्या कहते हैं इतिहासकार?

बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर (1891-1956) भारत के संविधान के मुख्य शिल्पकार थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के महू (अब डॉ आंबेडकर नगर) में एक दलित परिवार में हुआ था। उन्होंने जातिवाद, छुआछूत और असमानता के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया। कोलंबिया यूनिवर्सिटी (अमेरिका) और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई करने वाले आंबेडकर ने 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी की अध्यक्षता की। संविधान में समानता, स्वतंत्रता और न्याय के सिद्धांत उनकी देन हैं।

लेकिन कुछ विवादास्पद बयान या सोशल मीडिया पोस्ट में उन्हें 'अंग्रेजों का एजेंट' कहा जाता रहा है। यह दावा गलत इतिहास पर आधारित है-आंबेडकर ने ब्रिटिश राज में दलितों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी, जैसे 1932 का पूना पैक्ट, जहां उन्होंने अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग की। इतिहासकार कहते हैं कि यह अपमान दलित आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश है।

मिथुन अहिरवार का बयान: मुख्य बिंदु, सरल शब्दों में

मिथुन अहिरवार कहा कि अपमान का आरोप: "जो असामाजिक तत्व बाबा साहब को अंग्रेजों का एजेंट बता रहे हैं, BJP सरकार उनकी गिरफ्तारी न करके संरक्षण दे रही है। यह दलित समाज के साथ घोर अन्याय और संविधान निर्माता के प्रति अपमान है। BJP सुनिश्चित कर रही है कि बाबा साहब को उनका ऐतिहासिक श्रेय न मिले। यह षड्यंत्रपूर्ण मानसिकता है।"

मुख्य मांगें:

  • आरोपी के खिलाफ तत्काल SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज हो।
  • उसके घर पर बुलडोजर कार्रवाई हो-'अगर BJP दलितों से भेदभाव नहीं करती, तो यह साबित करे।'
  • बुलडोजर न्याय केवल गरीबों, दलितों और विपक्षियों पर ही क्यों? BJP स्पष्ट करे कि वे आरोपी के पक्ष में हैं या दलित अपमान को बढ़ावा दे रही।

चेतावनी: "अगर कार्रवाई न हुई, तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।"

अहिरवार का यह बयान मध्य प्रदेश की BJP सरकार पर सीधा हमला है, जहां CM मोहन यादव (दलित समुदाय से) हैं। वे कहते हैं, "BJP दलितों के प्रति 'जीरो डिस्क्रिमिनेशन' का दावा करती है, लेकिन एक्शन में कमी।"

SC/ST एक्ट और बुलडोजर कार्रवाई: कानूनी और राजनीतिक मतलब

SC/ST एक्ट (1989): यह कानून अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों के खिलाफ अपमान, हिंसा या भेदभाव को रोकता है। धारा 3(1)(x) के तहत 'जाति आधारित अपमान' पर 6 महीने से 5 साल की सजा। अहिरवार की मांग इसी के तहत FIR है। मध्य प्रदेश में 2024-25 में 5,000+ ऐसे केस दर्ज हुए, लेकिन कई में कार्रवाई धीमी रहती है।

बुलडोजर कार्रवाई: MP में BJP सरकार की 'बुलडोजर पॉलिसी' अपराधियों के अवैध निर्माण पर सख्ती के लिए जानी जाती है। 2023-24 में 500+ बुलडोजर एक्शन हुए, ज्यादातर गरीब इलाकों में। अहिरवार का तंज: "यह हथियार सिर्फ विपक्ष और दलितों पर ही क्यों चलता है? आरोपी के घर पर चलाकर साबित करो।"

यह मांग राजनीतिक रूप से तीखी है-कांग्रेस इसे BJP की 'दोहरी नीति' बताकर वोट बैंक पर निशाना साध रही।

MP में दलित वोट की जंग, BJP vs कांग्रेस

मध्य प्रदेश में दलित आबादी 16% है, जो चुनावी समीकरण बदल सकती है। BJP ने 2023 विधानसभा चुनाव में दलित चेहरा (मोहन यादव) को CM बनाकर वोट पक्के किए। लेकिन कांग्रेस आंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) पर हमेशा BJP पर 'दलित विरोधी' होने का आरोप लगाती है।

BJP का संभावित जवाब: अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन BJP अक्सर ऐसे बयानों को 'विपक्ष की साजिश' बताती है। CM यादव ने हाल ही में आंबेडकर जयंती पर 'दलित कल्याण' का ऐलान किया था।

यह विवाद 2028 चुनाव से पहले दलित वोटबैंक को गरमा सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, "आंबेडकर का नाम छूना खतरनाक-यह सामाजिक न्याय की राजनीति है।"

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