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Bhopal Cyber ​​fraud: MCU के छात्र और NSUI नेता का नाम उजागर, पाकिस्तान से जुड़ा 3 करोड़ का नेटवर्क का खुलासा

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक सनसनीखेज साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के एक छात्र और एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष अमन कुमार का नाम प्रमुखता से जुड़ गया है।

आरोप है कि अमन ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी योजनाओं का लालच देकर भारतीय डाक भुगतान बैंक (IPPB) में 250 से अधिक फर्जी खाते खुलवाए, जिनका इस्तेमाल करीब 3 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन के लिए किया गया। यह नेटवर्क पाकिस्तान तक फैला हुआ है, और बिहार के राजपुर पटखौलिया पंचायत के सरपंच मोहन दास के बेटे विशाल कुमार द्वारा लीड किया जा रहा था।

Cyber fraud MCU and NSUI leader Aman name exposed 3 crore rupees worth network linked to Pakistan

मोतिहारी पुलिस की कार्रवाई के बाद यह पूरा खेल सामने आया, जिसमें दो आरोपी गिरफ्तार हुए और 4 मोबाइल फोन जब्त किए गए। अमन कुमार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में एमसीयू में मास कम्युनिकेशन के थर्ड ईयर का छात्र है। यह मामला न केवल साइबर क्राइम की गहराई को उजागर करता है, बल्कि छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की छवि पर भी सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस ने जांच तेज कर दी है, और अमन की तलाश जारी है।

साइबर फ्रॉड का जाल: 500 रुपये के लालच में 250 खाते, 3 करोड़ की ठगी

मोतिहारी पुलिस ने 27 सितंबर को एक बड़ी कार्रवाई की, जिसमें साइबर ठगों का नेटवर्क ध्वस्त कर दिया गया। जांच में सामने आया कि आरोपी सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि या अन्य सब्सिडी स्कीमों का लालच देकर ग्रामीणों को फंसाते थे। प्रत्येक खाताधारक को मात्र 500 रुपये का प्रलोभन देकर IPPB में खाते खुलवाए जाते थे। ये खाते फर्जी ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल होते, जहां विदेशी सर्वरों से पैसे आते और तुरंत ट्रांसफर हो जाते। कुल 250 से अधिक खाते खुलवाए गए, जिनसे 3 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी हुई।

खाताधारकों ने जब अपने पासबुक या बैलेंस की जानकारी मांगी, तो उन्हें बताया गया कि "खाते बंद हो चुके हैं"। जब उन्होंने सरपंच मोहन दास या उनके बेटे विशाल से पैसे के बारे में पूछा, तो उन्हें टालमटोल की गई। बाद में, बैंक ने संदिग्ध गतिविधियों पर खातों को फ्रीज कर दिया, और पुलिस ने खाताधारकों को नोटिस जारी कर पूछताछ की। इससे पूरा रैकेट बेनकाब हो गया। एक ग्रामीण खाताधारक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमें कहा गया था कि खाते में सरकारी पैसे आएंगे, लेकिन कुछ नहीं आया। अब पता चला कि हमारा नाम फ्रॉड में इस्तेमाल हुआ।"

पुलिस ने विशाल कुमार और उसके साथी को गिरफ्तार किया। विशाल, जो पंचायत के सरपंच मोहन दास का बेटा है, नेटवर्क का बिहार कनेक्शन संभालता था। पूछताछ में उसने कबूला कि खाते भोपाल से खुलवाए गए थे, और पैसे पाकिस्तान के एक हैंडलर को ट्रांसफर होते थे। जब्त मोबाइल फोनों से चैट और ट्रांजेक्शन डिटेल्स बरामद हुईं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रॉड को साबित करती हैं।

अमन कुमार का रोल: बिहार से भोपाल, पाकिस्तान तक का कनेक्शन

अमन कुमार, जो खाप गोपालपुर (बिहार) का मूल निवासी है, एमसीयू के मास कम्युनिकेशन विभाग में थर्ड ईयर का छात्र है। भोपाल में पढ़ाई के दौरान उसने अपने सहयोगी इरशाद के साथ मिलकर ये खाते खुलवाए। इरशाद से अमन की मुलाकात मोतिहारी में 12वीं कक्षा के दौरान हुई थी। इरशाद ने ही अमन को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर अरशद से जोड़ा। ये तीनों - अमन, इरशाद और अरशद - मिलकर साइबर फ्रॉड का जाल बुनते थे। अमन ने छात्र जीवन का फायदा उठाकर भोपाल के आसपास के लोगों को लालच देकर खाते खुलवाए।

एनएसयूआई के उपाध्यक्ष अमन पठान ने बताया, "अमन कुमार को एमसीयू यूनिट में अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन वह सक्रिय नहीं था। इसलिए हमने उसे पद से हटा दिया। हमें फ्रॉड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।" यह खुलासा छात्र राजनीति को शर्मसार करने वाला है। एमसीयू प्रशासन ने भी बयान जारी कर कहा कि मामले की जांच की जा रही है, और अगर अमन दोषी पाया गया तो कार्रवाई होगी। अमन वर्तमान में फरार है, और भोपाल पुलिस ने उसकी तलाश के लिए अलर्ट जारी कर दिया है।

पाकिस्तान कनेक्शन: अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम का खतरा

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान तक जुड़े हैं। पूछताछ में सामने आया कि अरशद पाकिस्तान से ऑनलाइन फिशिंग और फर्जी कॉल्स के जरिए शिकार बनाता था। पैसे भारत में खातों के माध्यम से आते, और फिर क्रिप्टोकरेंसी या हवाला के जरिए वापस भेजे जाते। बिहार पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, "यह हनीट्रैप जैसा फ्रॉड था, जहां सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स से लोगों को लुभाया जाता। पाकिस्तान से निर्देश आते थे।" यह मामला बिहार में बढ़ते साइबर क्राइम को दर्शाता है, जहां पहले भी पाकिस्तान लिंक्ड फ्रॉड केस सामने आए हैं।

मोतिहारी एसपी ने बताया, "हम अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच कर रहे हैं। साइबर सेल को शामिल किया गया है।" बिहार में साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं, जहां ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी का फायदा उठाया जाता है। हाल ही में एक अन्य केस में, एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट अखिलेश को मास्टरमाइंड बनाया गया था, जो पाकिस्तान से जुड़ा था।

बिहार पुलिस की कार्रवाई: गिरफ्तारी से खुला राज, आगे की जांच

27 सितंबर को मोतिहारी पुलिस ने विशाल कुमार और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया। उनके पास से 4 मोबाइल फोन, सिम कार्ड और डिजिटल डिवाइस जब्त हुए। एसआईटी गठित की गई है, जो अमन और इरशाद की तलाश कर रही है। खाताधारकों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज किए जा रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा, "3 करोड़ की रिकवरी की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान कनेक्शन पर एनआईए को सूचित किया जाएगा।"

यह मामला IPPB की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। बैंक ने कहा कि वे फ्रॉड रोकने के लिए नई सतर्कता बरतेंगे। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावितों को मुआवजा मिले।

राजनीतिक-सामाजिक असर: एनएसयूआई पर सवाल, छात्रों में हड़कंप

एनएसयूआई पर यह झटका है, खासकर एमपी यूनिट पर। अमन पठान ने कहा, "हम जांच का इंतजार करेंगे, लेकिन संगठन की छवि साफ है।" एमसीयू में छात्रों के बीच डर का माहौल है। एक छात्र ने बताया, "अमन सीनियर था, लेकिन हम नहीं जानते थे। अब कैंपस में सतर्कता बढ़ गई।" विपक्ष ने सरकार पर साइबर सिक्योरिटी की कमी का आरोप लगाया है।

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