Bhopal News: पत्नी को ₹5 लाख भरण-पोषण नहीं दिया तो कोर्ट ने जब्त किया पासपोर्ट, पति ने लगाया सात शादी का आरोप
राजधानी भोपाल में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कई रोचक मामले देखने मिले। जहां विदेश में सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति पर पत्नी ने भरण पोषण नहीं देने का आरोप लगाते हुए कोर्ट से गुहार लगाई। दरअसल, पति के खिलाफ पत्नी ने भरण-पोषण का केस लगाया था।
पति ने दो साल तक भरण-पोषण जमा नहीं किया था। उसने पत्नी को ₹5 लाख भरण पोषण नहीं दिया। मामले में कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए पति को आदेश दिया गया कि वह पत्नी को तुरंत 2 साल से रुका हुआ भरण पोषण पैसा वापस दे।

बता दे पति विदेश में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, इसलिए मामले में कोर्ट ने उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया और कहा कि जब तक वह भरण पोषण की पूरी राशि नहीं देता। उसे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मामले में पति का आरोप था कि पत्नी करीब सात शादियां कर चुकी है और इसी तरह से फ्रॉड करती है, इसलिए उसने पैसा नहीं दिया। हालांकि न्यायालय ने कहा कि पति इस बात को साबित नहीं कर पाया है।
इसके बाद कोर्ट ने तय किया कि पति को पत्नी को भरण-पोषण के 5 लाख रुपए देना होगा, लेकिन उसने बीते दो सालों से नहीं दिए हैं। शनिवार को नेशनल लोक अदालत के तहत कुटुंब न्यायालय में यह मामला पहुंचा था। लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय के चारों खंडपीठ में प्रधान न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश शशीकांत वैद्य, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मोहम्मद मूसा खान और अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश राजदीप सिंह ठाकुर ने सुलह करके साथ जा रहे दंपति को समझकर विदा किया।
क्या है भरण पोषण कानून
ऐसे मामले जहां पर पत्नी नाबालिग बच्चे, अविवाहित पुत्री व बुजर्ग माता-पिता और विधवा बहू जिनका कोई अपना सहारा नहीं होता है, जिनका कोई भरण-पोषण करने वाला नहीं होता। उनको भरण-पोषण में कपड़े रहने की सुविधा शिक्षा और चिकित्सा उपचार का विभिन्न कानून द्वारा हक व संरक्षण का प्रावधान है। आमतौर पर पति-पत्नी के अलग रहने पर पति द्वारा पत्नी को भरण-पोषण दिया जाता है, जब तक कि वह दूसरा घर ना बसा लें।
भरण पोषण के लिए इन कानूनी धाराओं का उपयोग किया जाता है।
- दंड प्रक्रिया का संहिता सीआरपीसी की धारा 125
- हिंदू दत्तक और भरण पोषण कानून, 1950 (धारा 18-23)
- हिंदू विवाह कानून, 1995 (धारा 24 और 25)
- घरेलू हिंसा से महिलाओं को संरक्षण के लिए कानून, 2005
- माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भारहीन पोषण के लिए और कल्याण के लिए कानून, 2007












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