Bhopal News: प्राचीन खटलापुरा मंदिर में विवाद बढ़ा, दान पेटियों में गड़बड़ी का आरोप, बदले गए ताले
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित प्राचीन खटलापुरा मंदिर में विवाद बढ़ता जा रहा है। हाल ही में मंदिर की दान पेटियां खोली गईं, जिसमें पहले की तुलना में कम राशि निकली।
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जहांगीरबाद स्थित खटलापुरा मंदिर समिति के सदस्य आरोप लगा रहे हैं कि दान पेटियों में गड़बड़ी हो रही है, और यह विवाद अब और गहरा गया है।

पूरा मामला क्या है?
दरअसल, मंदिर समिति के सदस्य कथित पुजारी मनोज उर्फ मन्नू से परेशान हैं। उनका कहना है कि मन्नू पहले तो मंदिर में सेवा करने का नाटक करता रहा, लेकिन अब वह मंदिर का मालिक बनने की कोशिश कर रहा है। मंदिर समिति के सचिव पप्पू विलास राव ने बताया कि मंदिर के पुराने सेवक जिनकी मृत्यु 10 अगस्त 2024 को हो गई है वे भी अनुमतिधारक थे और स्व प्रेम दास वर्मा को मन्दिर समिति ने पुजारी नियुक्त नहीं कभी नहीं किया था। वे रोडवेज के अंदर काम किया करते थे। जिनके के निधन के बाद मनोज उर्फ मन्नू ने मंदिर के अंदर छोटे तालाब के किनारे अतिक्रमण करना शुरू कर दिया था। इस पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने नोटिस भी जारी किया था। इसके बावजूद मन्नू लगातार मंदिर में मनमर्जी के काम करता रहा, और पुलिस में शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

विलास राव ने बताया कि मंदिर समिति ने कभी भी मनोज और मन्नू को मंदिर का पुजारी या सहमंत्री नियुक्त नहीं किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि मन्नू ने कैसे मंदिर के भीतर सारे फैसले लेने शुरू कर दिए। इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि मंदिर की दान पेटियों से पैसों की हेराफेरी हो रही थी।

दान पेटियों में गड़बड़ी और नई व्यवस्था
मंदिर समिति के सदस्यों ने लीगल एडवाइजर की सलाह पर, मंदिर की दान पेटियों को खोला और नए ताले लगाए। इस दौरान दान पेटियों में पहले के मुकाबले कम पैसे पाए गए, जिससे दान में गड़बड़ी का संदेह और गहरा गया। इसके अलावा, मंदिर की दीवारों पर पोस्टर भी लगाए गए, जिसमें श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि खटलापुरा मंदिर के विवाद को लेकर मामला अभी न्यायालय में चल रहा है, इसलिए वे दान पेटियों में दान न डालें।

पूरी स्थिति पर गंभीर सवाल
मंदिर समिति का कहना है कि मन्नू उर्फ मनोज को कभी भी मंदिर का पुजारी या सहमंत्री नियुक्त नहीं किया गया था, तो सवाल उठता है कि यदि वह आधिकारिक रूप से मंदिर का हिस्सा नहीं था, तो उसने समाधि निर्माण की अनुमति कैसे प्राप्त की? इस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, और आरोप लगाया जा रहा है कि मन्नू ने धार्मिक भावना का उपयोग करके व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया है।
यह विवाद न केवल मंदिर के प्रबंधन को लेकर है, बल्कि इससे जुड़े वित्तीय और धार्मिक पहलुओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मंदिर समिति का कहना है कि वे अब इस मामले में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई करेंगे, और श्रद्धालुओं को दान देने से पहले सचेत किया गया है।












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