MP News: शासकीय सुल्तानिया कन्या विद्यालय की जर्जर हालत उजागर, NSUI अध्यक्ष ने खोली शिक्षा विभाग की पोल

Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शासकीय सुल्तानिया कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की भयावह हालत ने न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि बच्चियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के मध्य प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने मंगलवार को इस स्कूल का दौरा किया और वहां की जर्जर इमारत, टूटी छत, और असुरक्षित परिस्थितियों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। इस खुलासे ने शिक्षा विभाग और मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

condition of MP Government Sultania Girls School exposed NSUI President Ashutosh Chouksey

कुछ दिन पहले एक अन्य सरकारी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो चुकी है, फिर भी प्रशासन की उदासीनता बरकरार है। NSUI ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

सुल्तानिया कन्या विद्यालय की भयावह स्थिति

आशुतोष चौकसे ने मंगलवार, 22 जुलाई 2025 को भोपाल के शासकीय सुल्तानिया कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जो देखा, वह किसी भी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। स्कूल की स्थिति इस प्रकार है:

जर्जर भवन: स्कूल की इमारत पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण हालत में है। छत से पानी रिस रहा है, जिससे दीवारें और फर्श गीले रहते हैं।

टूटे पिलर और दरारें: भवन के पिलर टूट चुके हैं, और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।

खुले बिजली के तार: कक्षाओं और गलियारों में बिजली के खुले तार लटक रहे हैं, जिनसे करंट का खतरा बना हुआ है।

गंदे और टूटे शौचालय: स्कूल के शौचालय गंदगी और टूट-फूट की स्थिति में हैं, जिसके कारण छात्राओं को अस्वच्छ परिस्थितियों में समय बिताना पड़ रहा है।

पानी की कमी: पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे छात्राओं को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है।

अन्य कमियां: कक्षाओं में पर्याप्त रोशनी और वेंटिलेशन की कमी है, और फर्नीचर भी जर्जर हालत में है।

आशुतोष चौकसे ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "भोपाल जैसे प्रदेश की राजधानी में स्थित एक कन्या विद्यालय की यह हालत है, तो बाकी जिलों की स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। बच्चियों की जान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह शिक्षा नहीं, यह अपराध है।"

हाल की घटना ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में भोपाल के एक अन्य सरकारी स्कूल में छत का प्लास्टर गिरने से एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इस घटना ने सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया था। इसके बावजूद, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सुल्तानिया कन्या विद्यालय की स्थिति इस बात का प्रमाण है कि ऐसी घटनाएं दोबारा होने का खतरा बना हुआ है। आशुतोष चौकसे ने कहा, "जब तक बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, हम चुप नहीं बैठेंगे। यह सरकार की नाकामी है कि राजधानी में ही स्कूल ऐसी हालत में हैं।"

NSUI की मांगें और चेतावनी

तत्काल सुरक्षा जांच: सुल्तानिया कन्या विद्यालय के भवन की तत्काल सुरक्षा जांच कराई जाए, जिसमें इंजीनियरों और विशेषज्ञों की एक टीम शामिल हो।

जर्जर हिस्सों का बंद होना: स्कूल के जर्जर हिस्सों को तुरंत बंद कर छात्राओं को वैकल्पिक सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई: इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

राज्यव्यापी जांच: मध्य प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों की इमारतों की स्थिति की जांच के लिए एक राज्यस्तरीय समिति गठित की जाए।

NSUI ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर इन मांगों पर कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। आशुतोष चौकसे ने कहा, "NSUI विद्यार्थियों की आवाज़ है। हम हर अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। अगर सरकार ने हमारी मांगों को अनसुना किया, तो हम सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे।"

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, और जर्जर भवनों के कारण बच्चों की जान खतरे में रहती है। कुछ प्रमुख मुद्दे:

जर्जर भवन: भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, और जबलपुर जैसे शहरों में कई सरकारी स्कूलों की इमारतें दशकों पुरानी हैं और रखरखाव की कमी के कारण जर्जर हो चुकी हैं।

शिक्षकों की कमी: कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, जिसके कारण शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव: पीने का पानी, शौचालय, और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं कई स्कूलों में उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों की मरम्मत और सुधार के लिए आवंटित धन का उपयोग ठीक ढंग से नहीं हो रहा, जिसके कारण स्थिति और खराब हो रही है।

हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे स्कूल चलें हम और स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट। हालांकि, इन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच रहा है। सुल्तानिया कन्या विद्यालय जैसे स्कूल इस बात का उदाहरण हैं कि सरकारी दावों और हकीकत में कितना अंतर है।

NSUI का इतिहास और आंदोलन

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI), जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की छात्र शाखा है, लंबे समय से छात्रों के अधिकारों और शिक्षा सुधारों के लिए लड़ रही है। मध्य प्रदेश में NSUI ने कई मुद्दों पर आंदोलन किए हैं, जैसे:

NEET पेपर लीक (2024): NSUI ने भोपाल में NEET-UG 2024 पेपर लीक के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने नेतृत्व किया।

व्यासम घोटाला (2022): NSUI ने मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले के खिलाफ सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ी।

नई शिक्षा नीति (2021): NSUI ने भोपाल में नई शिक्षा नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई।

आशुतोष चौकसे, जो 2022 में NSUI मध्य प्रदेश के अध्यक्ष बने, ने संगठन को मजबूत करने और छात्रों के मुद्दों को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी अगुवाई में NSUI ने शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है।

सामाजिक और सियासी प्रतिक्रिया

सुल्तानिया कन्या विद्यालय की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। कई अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने NSUI के इस खुलासे का समर्थन किया है। एक अभिभावक, रीता शर्मा, ने कहा, "हम अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने भेजते हैं, लेकिन अगर स्कूल ही सुरक्षित नहीं हैं, तो हम क्या करें? सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।"

विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले को विधानसभा में उठाने की बात कही है। कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने एक एक्स पोस्ट में कहा, "मोहन यादव सरकार शिक्षा के नाम पर केवल जुमले दे रही है। सुल्तानिया स्कूल की स्थिति यह दर्शाती है कि सरकार को बच्चियों की सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।" हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, जिला प्रशासन ने स्कूल की स्थिति की जांच के लिए एक समिति गठित की है, लेकिन इसकी औपचारिक पुष्टि बाकी है।

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति कोई नई बात नहीं है। हाल के वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं:

जबलपुर (2024): एक सरकारी स्कूल में छत गिरने से दो बच्चे घायल हो गए। जांच में पता चला कि भवन की मरम्मत के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग हुआ था।

ग्वालियर (2023): एक सरकारी स्कूल में बिजली के खुले तारों से करंट लगने से एक शिक्षक घायल हो गए।

सागर (2022): जर्जर स्कूल भवन में पढ़ाई के दौरान दीवार का हिस्सा गिरने से हड़कंप मच गया, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ।

ये घटनाएं दर्शाती हैं कि मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।

शिक्षा विभाग की जवाबदेही

बजट का अभाव: सरकारी स्कूलों के लिए पर्याप्त बजट आवंटन नहीं हो रहा, जिसके कारण मरम्मत और सुधार कार्य रुके हुए हैं। स्कूलों की स्थिति की नियमित जांच और रखरखाव के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की कमी के कारण लापरवाही बरकरार है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी मध्य प्रदेश के स्कूलों की स्थिति को लेकर कई बार चेतावनी जारी की है। NCPCR के दिशानिर्देशों के अनुसार, स्कूलों में सुरक्षित भवन, स्वच्छ शौचालय, और पीने का पानी अनिवार्य है, लेकिन सुल्तानिया कन्या विद्यालय जैसे स्कूल इन मानकों को पूरा नहीं करते।

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