Bhopal News: कांग्रेस के सवालों पर CM शिवराज बोले- वीर सावरकर को क्यों नहीं पढ़ाया जाना चाहिए ?

CM Shivraj News: मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि प्रदेश के स्कूलों में वीर सावरकर की जीवनी पढ़ाई जाएगी। जिसके बाद प्रदेश की सियासत गर्म हो गई। जहां कांग्रेस ने इसे फ्रीडम फाइटर्स का अपमान बताया तो, वही प्रदेश मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वीर सावरकर की जीवनी पढ़ाने से समस्या क्या है?

राजधानी भोपाल में सीएम शिवराज ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि वीर सावरकर को क्यों नहीं पढ़ाया जाना चाहिए? वे काले पानी में रहे। एक जन्म में 2- 2 सजा हुई। उन्होंने देश के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया। वीर सावरकर उत्कृष्ट देशभक्त थे। सेल्यूलर जेल में जाकर देखते हैं किस तरह के सेल में सावरकर जी रहते थे। उनके दूसरे भाई भी वहां थे, लेकिन कई सालों तक पता नहीं चला कि दूसरा भैया भी यहां आया था। जिसने देश के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया हो, उसकी जीवनी मध्यप्रदेश में पढ़ाई जाएगी।

CM Shivraj singh chauhan said - Why should not the biography of Veer Savarkar be read?

स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि वीर सावरकर हमारे उन महान क्रांतिकारियों में से एक हैं जिनको एक जन्म में 2- 2 आजीवन कारावास की सजा हुई। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में वे पहले लेखक हुए, जिन्होंने 1857 के आंदोलन को स्वतंत्रता संग्राम कहा। नहीं तो लोग गदम ही कहते थे।

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    मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारत की आजादी में उनका अभूतपूर्व योगदान है, इसलिए उनको हर जगह सम्मान मिलना चाहिए। दुर्भाग्य से इस देश में कांग्रेस की सरकारों ने भारत के महान क्रांतिकारियों को इतिहास के पन्नों में जगह नहीं दी। विदेशी आक्रांताओं को महान लिखा और देशभक्तों को महान नहीं बताया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत केंद्रित शिक्षा पर काम कर रही है। देश के लिए काम करने वाले देश के हीरो बनेंगे। हमारे शिक्षक बच्चों को उनके बारे में पढ़ाने का काम करेंगे।

    कांग्रेस विधायक सवाल किए खड़े

    वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने निशाना साधते हुए कहा कि स्कूल के सिलेबस में सावरकर को किस हैसियत से शामिल करना चाहते हैं, यह बड़ा सवालिया निशान है। यह बहुत ही अफसोस जनक बात है। हमने जो पढ़ा है, उसमें सावरकर की कहीं कोई पृष्ठभूमि स्वतंत्रता संग्राम में नजर नहीं आती है। उनके कई पत्र पढ़े, अनेक बार सोशल मीडिया में पत्र आ चुके हैं, जिसमें उन्होंने अंग्रेजों से माफी मांग ली। ऐसे व्यक्ति का इतिहास पाठ्यक्रम में जोड़ना शर्मनाक है।

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