MP News: जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए CM मोहन यादव की पहल, जानिए कैसे किसानों को होगा फायदा
MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत की।
यह कार्यशाला राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (बरखेड़ी-नीलबड़ रोड) में कृषि विभाग द्वारा आयोजित की गई थी।

"एक जिला, एक उत्पाद" योजना के तहत प्रदर्शनी का उद्घाटन
इस कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने "एक जिला, एक उत्पाद" योजना के तहत आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में विभिन्न जैविक खेती से जुड़ी संस्थाओं और उत्पादों के स्टॉल लगाए गए थे, जहां उन्होंने किसानों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं और अनुभवों को सुना। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर किसानों को जैविक खेती के लाभ और उसके पर्यावरणीय पहलुओं के बारे में बताया।
जैविक खेती के लाभ और रणनीति पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जैविक खेती के माध्यम से न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखा जा सकता है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी की जा सकती है। उन्होंने इस कार्यशाला का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और इसके लाभों को किसानों तक पहुंचाना बताया।
कार्यशाला में जैविक कपास, फल-सब्जियों और अन्य फसलों की जैविक खेती की पद्धतियों और उनसे जुड़े उत्पादों की मूल्य श्रृंखला विकसित करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके अलावा, प्रदेश में जैविक खेती के विस्तार के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक किसान इस क्षेत्र में कदम रख सकें और उनका जीवनस्तर सुधारने के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
किसानों को मिलेगा जैविक खेती का लाभ
यह कार्यशाला किसानों को जैविक खेती के फायदे समझाने का एक बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है। जैविक खेती के माध्यम से किसान अधिक स्वस्थ और सुरक्षित कृषि उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं, जो न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि कृषि के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक विकास और स्थिरता सुनिश्चित करता है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की इस पहल से प्रदेश में जैविक खेती को एक नई दिशा मिल सकती है और किसान अपनी पारंपरिक खेती की पद्धतियों को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
जैविक खेती की बढ़ती आवश्यकता
समय के साथ रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवार नाशकों के अत्यधिक उपयोग से खेती की मिट्टी की उर्वरता पर बुरा असर पड़ने लगा है। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता घट रही है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा देना इस चुनौती का एक प्रभावी समाधान हो सकता है, क्योंकि इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
मध्य प्रदेश में जैविक खेती की अपार संभावनाएं
मध्य प्रदेश में 11 एग्रो-क्लाइमेट ज़ोन हैं, जहां विभिन्न प्रकार की फसलों की खेती की जाती है। इन अलग-अलग क्षेत्रों में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं, जो राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकती हैं। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता और स्वस्थ खाद्य उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
कार्यशाला का उद्देश्य और आने वाली कार्ययोजना
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करना है। विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद एक नीति तैयार की जाएगी, जो प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस कदम होगा। इसके अलावा, एक कॉमन संस्थागत प्लेटफॉर्म विकसित करने पर भी काम किया जाएगा, जिससे जैविक खेती से जुड़े सभी किसान और संस्थाएं आपस में जुड़ सकें और एक-दूसरे से सीख सकें।












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