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भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उज्जैन लोकायुक्त इकाई ने रतलाम जिले के सैलाना में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी मगन सिंह मईड़ा को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देशों के तहत गुरुवार, 28 अगस्त 2025 को सैलाना के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में की गई। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर किया है।

शिकायतकर्ता और मामला
शिकायतकर्ता विजय सिंह राठौड़, निवासी ग्राम सकरावदा, तहसील सैलाना, जिला रतलाम ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन, आनंद यादव को शिकायत दर्ज की थी। विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने गांव में कीटनाशक, खाद, और बीज की दुकान खोलने के लिए मई 2025 में लोक सेवा केंद्र के माध्यम से लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। जुलाई में उन्हें मोबाइल पर मैसेज मिला कि उनके तीनों लाइसेंस बन गए हैं। जब वे इन लाइसेंस की मूल प्रति लेने के लिए वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी मगन सिंह मईड़ा से मिले, तो मईड़ा ने लाइसेंस की मूल प्रतियां देने के लिए 30,000 रुपये की रिश्वत मांगी।
विजय सिंह के बार-बार निवेदन करने पर मईड़ा ने रिश्वत की राशि को 25,000 रुपये तक कम कर दिया। इसके बाद, 21 अगस्त 2025 को मईड़ा ने विजय सिंह से 15,000 रुपये की रिश्वत ले ली। शेष 10,000 रुपये की रिश्वत लेते समय लोकायुक्त ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया।
शिकायत का सत्यापन और ट्रेप कार्रवाई
विजय सिंह की शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त उज्जैन ने इसकी प्रारंभिक जांच की और शिकायत को सही पाया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक आनंद यादव के नेतृत्व में एक विशेष ट्रेप दल का गठन किया गया। इस दल में निरीक्षक राजेंद्र वर्मा, प्रधान आरक्षक कन्हैया, हितेश ललावत, आरक्षक विशाल रेशमिया, नेहा मिश्रा, और नीरज राठौड़ शामिल थे। दल ने सुनियोजित तरीके से ट्रेप कार्रवाई की योजना बनाई।
28 अगस्त 2025 को सैलाना के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय में लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता विजय सिंह राठौड़ ने मगन सिंह मईड़ा को शेष 10,000 रुपये की रिश्वत दी, जिसे लेते ही लोकायुक्त दल ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत की राशि को जब्त कर लिया गया, और आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
लोकायुक्त की सख्ती का संदेश
यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की निरंतर सक्रियता का एक और उदाहरण है। महानिदेशक योगेश देशमुख ने बार-बार जोर दिया है कि भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अधीक्षक आनंद यादव ने कहा, "हमारी टीम भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। यह कार्रवाई उन सभी अधिकारियों के लिए चेतावनी है जो अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वतखोरी में लिप्त हैं।"
शिकायतकर्ता की हिम्मत ने खोला राज
विजय सिंह राठौड़ ने अपनी शिकायत में बताया कि वह अपनी दुकान शुरू करने के लिए लाइसेंस का इंतजार कर रहे थे, लेकिन मगन सिंह मईड़ा की रिश्वत की मांग ने उन्हें परेशान कर दिया। आखिरकार, उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की। उनकी इस पहल ने न केवल इस मामले को उजागर किया, बल्कि अन्य नागरिकों को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया है।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
यह घटना रतलाम जिले जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अधिकारियों द्वारा रिश्वतखोरी की गहरी जड़ों को दर्शाती है। विशेष रूप से छोटे व्यवसायियों और ग्रामीणों के लिए, जो अपनी आजीविका शुरू करने के लिए लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर निर्भर होते हैं, इस तरह की रिश्वतखोरी एक बड़ा आर्थिक और मानसिक बोझ बन जाती है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ेगा।
आगे की जांच
लोकायुक्त की टीम अब इस मामले में गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या मगन सिंह मईड़ा ने पहले भी इस तरह की रिश्वतखोरी की है और क्या उनके साथ अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी इस तरह के कृत्यों में शामिल हैं। इसके अलावा, कृषि विभाग के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों।












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