भोपाल लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, 7000 रुपये की रिश्वत लेते PWD का वरिष्ठ लेखा लिपिक रंगे हाथ गिरफ्तार
भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई को जारी रखते हुए भोपाल लोकायुक्त इकाई ने नर्मदापुरम में लोक निर्माण विभाग (PWD) के वरिष्ठ लेखा लिपिक पवन सक्सेना को 7000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के मार्गदर्शन में गुरुवार, 28 अगस्त 2025 को नर्मदापुरम के लोक निर्माण विभाग कार्यालय में की गई। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े किए हैं।

शिकायतकर्ता और मामला
शिकायतकर्ता अवधेश कुमार पटेल, जो नर्मदापुरम में पटेल कंस्ट्रक्शन के मालिक और ठेकेदार हैं, ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल, दुर्गेश राठौर के समक्ष एक लिखित शिकायत दर्ज की थी। अवधेश ने बताया कि उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और जमा राशि, कुल 3,46,000 रुपये, को वापस करने के लिए लोक निर्माण विभाग, नर्मदापुरम के वरिष्ठ लेखा लिपिक पवन सक्सेना (उम्र 59 वर्ष) द्वारा 12,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। इस शिकायत के बाद लोकायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की।
शिकायत का सत्यापन और ट्रेप की तैयारी
लोकायुक्त इकाई ने शिकायत की प्रारंभिक जांच की और इसे सही पाया। इसके बाद एक विशेष ट्रेप दल का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व डीएसपी डॉ. आरके सिंह ने किया। ट्रेप दल में निरीक्षक घनश्याम मर्सकोले, प्रधान आरक्षक यशवंत सिंह ठाकुर, आरक्षक मनमोहन साहू, आरक्षक गौरव साहू, आरक्षक यशवंत पटेल, और चालक अमित विश्वकर्मा शामिल थे। इस दल ने सुनियोजित तरीके से रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम देने की योजना बनाई।
रंगे हाथ पकड़ा गया आरोपी
28 अगस्त 2025 को लोकायुक्त की टीम ने नर्मदापुरम के लोक निर्माण विभाग कार्यालय में ट्रेप कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायतकर्ता अवधेश कुमार पटेल ने पवन सक्सेना को 7000 रुपये की रिश्वत दी, जिसे लेते हुए उसे लोकायुक्त दल ने रंगे हाथ पकड़ लिया। रिश्वत की राशि को जब्त कर लिया गया और आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू की गई। पवन सक्सेना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है, और आगे की जांच जारी है।
लोकायुक्त की सख्ती का असर
यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सतत सक्रियता का एक और उदाहरण है। महानिदेशक योगेश देशमुख ने हाल के महीनों में कई ऐसी कार्रवाइयों का नेतृत्व किया है, जिनसे भ्रष्ट अधिकारियों में खौफ पैदा हुआ है। पुलिस अधीक्षक दुर्गेश राठौर ने मीडिया से बातचीत में कहा, "हमारी टीम भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इस तरह की कार्रवाइयां भविष्य में भी जारी रहेंगी ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी बनी रहे।"
ठेकेदार की शिकायत ने खोला राज
शिकायतकर्ता अवधेश कुमार पटेल ने बताया कि वह लंबे समय से अपनी जमा राशि और FD को वापस पाने के लिए लोक निर्माण विभाग के चक्कर काट रहे थे। हर बार पवन सक्सेना द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी। आखिरकार, तंग आकर उन्होंने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज की। उनकी इस हिम्मत ने न केवल इस मामले को उजागर किया, बल्कि अन्य ठेकेदारों और आम नागरिकों को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया है।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी की गहरी जड़ों को उजागर किया है। नर्मदापुरम जैसे छोटे शहर में इस तरह की घटनाएं आम लोगों के बीच प्रशासन के प्रति अविश्वास को बढ़ाती हैं। हालांकि, लोकायुक्त की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई ठेकेदारों और छोटे व्यवसायियों के लिए भी राहत की बात है, जो अक्सर सरकारी अधिकारियों की रिश्वतखोरी का शिकार बनते हैं।
आगे की जांच और संभावनाएं
लोकायुक्त की टीम अब इस मामले में गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या पवन सक्सेना ने पहले भी इस तरह की रिश्वतखोरी की है और क्या अन्य अधिकारी भी इस तरह के कृत्यों में शामिल हैं। इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।












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