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MP News: मध्य प्रदेश सहित पूरे देश के किसानों को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से खतरा, खड़गे ने बताए ये मुख्य कारण

भोपाल में 24 फरवरी 2026 को आयोजित 'किसान महाचौपाल' में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील को किसान-विरोधी करार देते हुए इसे देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताया। खड़गे ने कहा कि यह डील अमेरिकी किसानों और उत्पादों को फायदा पहुंचाने वाली है, जबकि भारतीय किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने इसे 2020-21 के किसान आंदोलन जैसी स्थिति पैदा करने वाला बताया और चेतावनी दी कि यदि सरकार नहीं मानी, तो दूसरा बड़ा किसान आंदोलन शुरू हो सकता है। खड़गे के अनुसार, डील में अमेरिकी दबाव के चलते भारत ने अपनी संप्रभुता और किसानों के हितों से समझौता किया है।

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खड़गे ने बताए मुख्य खतरे के कारण

खड़गे और कांग्रेस नेताओं (राहुल गांधी सहित) ने डील के कृषि प्रावधानों पर विस्तार से हमला बोला। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

शून्य टैरिफ पर अमेरिकी आयात का खतरा:

डील के तहत अमेरिका से कृषि उत्पादों (जैसे सोयाबीन, मक्का, कपास, सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDG), रेड सोरघम आदि) पर शून्य प्रतिशत टैरिफ या ड्यूटी-फ्री आयात की सुविधा मिलेगी। वहीं, भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगा रहेगा। इससे अमेरिकी सब्सिडी वाले सस्ते उत्पाद भारतीय बाजार में भर जाएंगे, जिससे घरेलू किसानों की फसलें बिक्री में मुश्किलें आएंगी और कीमतें गिरेंगी। खड़गे ने कहा, "भारतीय किसान अमेरिकी किसानों से कैसे मुकाबला करेंगे? यह डील भारतीय किसानों को नष्ट करने वाली है।"

मुख्य फसलों पर सीधा असर:

सोयाबीन: मध्य प्रदेश सोयाबीन का प्रमुख उत्पादक राज्य है (देश का 60-70% उत्पादन यहां होता है)। सस्ते अमेरिकी सोयाबीन आयात से एमपी के लाखों किसानों की आय प्रभावित होगी।
मक्का और कपास: मक्का से बने चारे (DDG) और कपास के आयात से पशुपालन और टेक्सटाइल उद्योग प्रभावित होंगे। मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कपास किसान सबसे ज्यादा नुकसान में आएंगे।
फल, मेवे और अन्य उत्पाद: इनकी बाजार में घुसपैठ से छोटे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
खड़गे ने कहा, "यह डील कपास, सोयाबीन, मक्का किसानों और फल-मेवा उत्पादकों पर सीधा हमला है।"

कृषि डेटा और बाजार पहुंच का खतरा:

डील में कृषि डेटा साझेदारी और बाजार पहुंच के प्रावधान हैं, जिससे विदेशी कंपनियां भारतीय किसानों की जानकारी हासिल कर सकती हैं। इससे बाजार में एकाधिकार बढ़ेगा और किसानों को MSP जैसी सुरक्षा कमजोर होगी। खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने किसानों की मेहनत और खून-पसीने को बेच दिया है।

असमान व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर समझौता:

भारत ने अमेरिका से हर साल 100 बिलियन डॉलर अतिरिक्त आयात बढ़ाने पर सहमति दी है, जबकि कोई पारस्परिक वादा नहीं। इससे ऊर्जा और अन्य क्षेत्र प्रभावित होंगे। खड़गे ने इसे ट्रंप के दबाव में 'सरेंडर' बताया और कहा कि यह डील अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाएगी, जबकि भारतीय किसान कर्ज और संकट में डूब जाएंगे।

दूसरा किसान आंदोलन की चेतावनी:

खड़गे ने तीन कृषि कानूनों की याद दिलाते हुए कहा कि जैसे वे कानून वापस लिए गए, वैसे ही यह डील भी वापस लेनी पड़ेगी। यदि नहीं मानी गई, तो किसान सड़कों पर उतरेंगे और दूसरा बड़ा आंदोलन होगा। उन्होंने कहा, "मोदी सरकार कृषि क्षेत्र को नष्ट करना चाहती है।"

मध्य प्रदेश पर विशेष प्रभाव

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राज्य के 70% किसान इससे प्रभावित होंगे, क्योंकि यहां सोयाबीन, मक्का और कपास की खेती प्रमुख है। भोपाल महाचौपाल को इसी कारण चुना गया, जहां 50 हजार से अधिक किसान जुटे। कांग्रेस ने देशव्यापी 'किसान सम्मेलन' की योजना बनाई है, जिसकी शुरुआत भोपाल से हुई।

सरकार का पक्ष: मोदी सरकार का दावा है कि डील से निर्यात बढ़ेगा और किसानों को नए बाजार मिलेंगे, लेकिन संवेदनशील कृषि उत्पादों के हित सुरक्षित रखे गए हैं।

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