Bhopal MP News: ट्रेन से लापता अर्चना तिवारी का 12 दिन बाद नेपाल बॉर्डर से कैसे हुई बरामद, जानिए पूरा मामला
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सनसनीखेज मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब सिविल जज की तैयारी कर रही 29 वर्षीय अर्चना तिवारी 7 अगस्त 2025 को नर्मदा एक्सप्रेस के एसी कोच से इंदौर से कटनी के बीच रहस्यमयी तरीके से लापता हो गई थी। 12 दिन की व्यापक तलाशी और पुलिस की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार अर्चना को नेपाल बॉर्डर के लखीमपुर खीरी से बरामद कर लिया गया।
बुधवार सुबह उसे फ्लाइट से भोपाल लाया गया। इस पूरे मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसमें अर्चना की अपनी मर्जी से घर छोड़ने की योजना, परिवार के दबाव में तय हुई शादी, और उसके दोस्तों की भूमिका शामिल है। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी।

लापता होने की शुरुआत: नर्मदा एक्सप्रेस का रहस्य
7 अगस्त को अर्चना तिवारी नर्मदा एक्सप्रेस के एसी कोच (A-1) में इंदौर से कटनी के लिए सफर कर रही थी। लेकिन कटनी पहुंचने से पहले ही वह ट्रेन से गायब हो गई। उसकी सीट पर उसका दुपट्टा और कुछ सामान छूटा हुआ मिला, जिसके बाद परिजनों ने भोपाल जीआरपी में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की। इस घटना ने पुलिस और परिजनों को सकते में डाल दिया। शुरुआती जांच में अपहरण की आशंका जताई गई, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी ने नया मोड़ लिया।
पुलिस की तलाश और सीसीटीवी फुटेज का खुलासा
भोपाल रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने इस मामले को गंभीरता से लिया। रेल एसपी राहुल कुमार लोढ़ा के नेतृत्व में इंदौर, भोपाल, कटनी जीआरपी, जिला पुलिस और यहां तक कि वन विभाग की टीमें अर्चना की तलाश में जुट गईं। पुलिस ने करीब 2,000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का विश्लेषण किया। इस दौरान इटारसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4-5 का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें अर्चना को ट्रेन से उतरते और स्टेशन से बाहर जाते देखा गया। फुटेज में यह भी दिखा कि उसने ट्रेन में ही अपने कपड़े बदलकर साड़ी पहन ली थी।
पुलिस को यह भी पता चला कि अर्चना ने बुधनी के पास मिडघाट में अपना मोबाइल फोन और सिम तोड़कर फेंक दिया था। यह कदम उसकी सुनियोजित योजना का हिस्सा था, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसका कोई सुराग मिले। रेल एसपी लोढ़ा ने बताया कि अर्चना एक एडवोकेट है और सिविल जज की तैयारी कर रही है। उसे पुलिस की कार्यप्रणाली की अच्छी जानकारी थी, जिसका उसने फायदा उठाया।
अर्चना की कहानी: शादी के दबाव से भागी
पुलिस को दिए अपने बयान में अर्चना ने बताया कि उसका अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि उसने अपनी मर्जी से घर छोड़ा था। उसने खुलासा किया कि वह सिविल जज की तैयारी करना चाहती थी, लेकिन परिवार उसकी इच्छा के खिलाफ एक पटवारी से उसकी शादी तय कर चुका था। 7 अगस्त को उसकी सगाई होने वाली थी, जिसके दबाव से तंग आकर उसने घर से भागने की योजना बनाई। अर्चना ने यह भी स्पष्ट किया कि लापता रहने के दौरान उसके साथ कोई गलत व्यवहार नहीं हुआ और वह अकेले रहकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती थी।
दोस्तों की भूमिका: तेजेंदर और सारांश का कनेक्शन
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अर्चना ने अपने दोस्त तेजेंदर सिंह से फोन पर संपर्क किया था। उसने तेजेंदर को बताया कि वह इंदौर वापस जाना चाहती है और उसे नर्मदापुरम स्टेशन पर ट्रेन से उतार ले। तेजेंदर ने उसकी मदद की और नर्मदापुरम स्टेशन पर ट्रेन के एसी कोच A-1 में चढ़कर अर्चना को उतारा। इसके बाद उसने अर्चना को अपनी कार से इटारसी पहुंचाया। इटारसी पहुंचने से पहले तेजेंदर ने अपने दोस्त सारांश जोगचंद्र को कॉल किया, जो शुजालपुर का रहने वाला है।
सारांश 7 अगस्त की रात को इटारसी पहुंचा और अर्चना को अपनी कार से शुजालपुर ले गया। वहां कुछ घंटे बिताने के बाद अगले दिन 8 अगस्त को उसने अर्चना को इंदौर छोड़ दिया। पुलिस ने सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तेजेंदर और सारांश तक पहुंची। दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस को अर्चना के नेपाल में होने की जानकारी मिली।
नेपाल बॉर्डर तक पहुंची कहानी
पुलिस ने नेपाल एम्बेसी और लखीमपुर खीरी पुलिस की मदद से अर्चना को नेपाल बॉर्डर से बरामद किया। उसे डिपोर्ट कराकर भोपाल लाया गया। इस दौरान पुलिस ने शुजालपुर निवासी सारांश जैन को भी 18 अगस्त को हिरासत में लिया। सारांश एक एग्रीकल्चर ड्रोन कंपनी में काम करता है और फिलहाल इंदौर में रहता है। उसके पिता रविंद्र जोगचंद्र ने कहा कि उनके बेटे ने कभी अर्चना का नाम नहीं लिया, लेकिन तीन महीने पहले उसने एक एडवोकेट सपना से प्रेम की बात कही थी। उन्होंने अपने बेटे को कोई गलती न करने की सलाह दी थी और उनका दावा है कि उनका बेटा निर्दोष है।
पहले की जांच में राम तोमर का नाम
इससे पहले, पुलिस ने ग्वालियर के भंवरपुरा थाने के आरक्षक राम तोमर से भी पूछताछ की थी। अर्चना और राम पिछले दो साल से संपर्क में थे। राम ने अपनी आईडी का इस्तेमाल कर अर्चना के लिए इंदौर से कटनी का टिकट बुक किया था। हालांकि, जांच में राम की संलिप्तता स्पष्ट नहीं हुई।
अर्चना की चतुराई और पुलिस की मेहनत
अर्चना ने अपनी योजना को अंजाम देने के लिए कई सावधानियां बरती थीं। उसने ट्रेन में अपना सामान और दुपट्टा छोड़कर यह भ्रम पैदा किया कि उसका अपहरण हुआ है। मोबाइल और सिम तोड़कर उसने अपने ठिकाने को छिपाने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की तत्परता और तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल ने आखिरकार उसे ढूंढ निकाला। रेल एसपी लोढ़ा ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने दिन-रात मेहनत की और कई चुनौतियों के बावजूद अर्चना को सुरक्षित बरामद कर लिया।
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