Satna: उफनता नाला पार कर ग्रामीणों ने मरीज को पहुंचाया अस्पताल, नेताओं की अनदेखी का खामियाजा भुगत रहे लोग
सतना 21 अगस्त। जिले में शनिवार रात से लगातार बारिश हो रही है। इसी बीच विकास के दावे करने वालों के लिए सभी दावों की पोल खोलने वाली तस्वीर सतना से सामने आई है। यहां 20 वर्षों से सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए यह बरसात फिर दर्द भरी साबित हो रही है। जिले के रैगांव विधानसभा के खम्हरिया गांव में बीमार युवती को इलाज की जरूरत थी लेकिन नाले में बना रपटा पानी से डूब गया था और अस्पताल ले जाने के लिए रास्ता नहीं था जिसके बाद ग्रामीणों ने युवती को गोद में उठाकर अपनी जान जोखिम में डालते हुए नाला पार किया। युवती की जान बचाने के लिए ग्रामीणों को इस बारिश में भी विवश होना पड़ा। यह खतरनाक तस्वीर हर साल बारिश में बनती है फिर भी सरकारी कारगुजारी के चलते यहां सड़क और रपटे का निर्माण नहीं हो पा रहा है। दरअसल रैगांव विधानसभा के गांव खम्हरिया, पनास, धौरहड़ा, बड़खेड़ा, और रौड ऐसे गांव हैं जहां बरसात के सीजन में ग्रामीणों को 4 महीने के लिए घरों में कैद होना पड़ता है।

बरसात में रास्ता डूब जाता है
रैगांव विधानसभा के गांव खम्हरिया, पनास, धौरहड़ा, बड़खेड़ा,और रौड के लिए 1 ही रास्ता है जो कि बारिश के दिनों में डूब जाता है। पास से ही गुजरने वाले नाले पर बने रपटे के ऊपर से पानी बहने लगता है, जिसके कारण आवागमन भी बंद हो जाता है। इसी मार्ग से होकर जिले के सिंहपुर और नागौद के ग्रामीण जाते हैं। लगभग 5 हजार से अधिक जनसंख्या वाले इन गांवों में बुनियादी सुविधा नाम मात्र की है, जिसके लिए बीते विधानसभा चुनाव के दौरान भी ग्रामीणों ने मांग की थी और बुनियादी सुविधा मिलने पर ही मतदान की बात कही थी। उस वक्त भी प्रशासन ने जल्द से जल्द ग्रामीणों की मांग पर आश्वासन दिया था लेकिन चुनाव बीतने के बाद आश्वासन का झूला आज तक लटक रहा है।
निर्वाचित विधायक की थी वादा
ग्रामीणों का कहना है कि उपचुनाव में रैगांव विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस विधायक कल्पना वर्मा ने जीत हासिल की जिन्होंने जल्द सड़क बनवाने का वादा किया था लेकिन अब तक इस आश्वासन का भी अता-पता नहीं।
गांव में एंबुलेंस तक नहीं जा पाती
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा समस्या खड़ी हो जाती है। 1 मात्र रास्ता भी बंद हो जाता है और जब गांव में कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाता है तो लोग बड़ी चिंता में डूब जाते हैं और मुश्किल खड़ी हो जाती है। ऐसे में ग्रामीणों के पास उफनते नाले को जान जोखिम मे डालकर पार करना ही एक रास्ता बचता है। यहां प्रशासन भी किसी तरह की मदद नहीं कर पाता। कई बार इलाज के अभाव में लोगों की जान तक चली जाती है। ग्रामीणों को बारिश में 4 माह तक राशन-पानी इकट्ठा कर घरों में ही कैद रहना पड़ता है।












Click it and Unblock the Notifications