Bhopal news: लोकायुक्त भोपाल की बड़ी कार्यवाही: रिश्वत लेते हुए तीन सरकारी कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े गए
MP News: लोकायुक्त भोपाल की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत ग्यारसपुर के अंतर्गत ग्राम बोरी रामपुर के सचिव गिरवर सिंह यादव, जनपद पंचायत के बाबू सहायक ग्रेड तीन सुरेश शर्मा और कंप्यूटर ऑपरेटर गोवर्धन कुशवाह को 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर की गई थी, जिसमें आवेदक गोलू लोधी उर्फ हिम्मत सिंह लोधी ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गेश राठौर को बताया था कि उसके चाचा चिरोंजीलाल की मृत्यु हो गई थी।

उनकी मृत्यु के बाद शासन द्वारा उनकी पत्नी के खाते में 2 लाख रुपये की सहायता राशि भेजी गई थी। लेकिन, इस राशि के खाते में आने के बाद से सचिव गिरवर सिंह यादव ने गोलू लोधी पर 10000 रुपये की रिश्वत देने का दबाव डाला था।
आवेदक ने शिकायत की थी कि रिश्वत की मांग सचिव गिरवर सिंह यादव के द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर सुरेश शर्मा के लिए की जा रही थी। शिकायत का सत्यापन होने के बाद, पीसी एक्ट की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया और ट्रैप की कार्यवाही शुरू की गई।
रंगे हाथ पकड़े गए आरोपी
आज 13 नवंबर 2024 को लोकायुक्त टीम ने कृषि उपज मंडी, विदिशा के मुख्य गेट पर आरोपी सचिव गिरवर सिंह यादव को आवेदक से 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद, गिरवर सिंह यादव वही राशि सुरेश शर्मा को देने के लिए जनपद पंचायत कार्यालय गया। जब सुरेश शर्मा ने रिश्वत की राशि गोवर्धन कुशवाह को देने के लिए कहा, तो गिरवर ने जैसे ही 5000 रुपये गोवर्धन को दिए, लोकायुक्त की टीम ने सूझ-बूझ और तत्परता दिखाते हुए तीनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई में लोकायुक्त भोपाल के निरीक्षक नीलम पटवा के नेतृत्व में टीम में निरीक्षक रजनी तिवारी, प्रधान आरक्षक नेहा परदेसी, प्रधान आरक्षक राजेंद्र पावन, प्रधान आरक्षक मुकेश पटेल और आरक्षक मुकेश परमार शामिल रहे।
लोकायुक्त द्वारा की गई यह कार्रवाई सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिश्वत लेने के खिलाफ एक मजबूत संदेश देती है और दिखाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की टीम का मनोबल मजबूत है। कार्यवाही अब भी जारी है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कार्यवाही
लोकायुक्त की टीम ने इस पूरी कार्यवाही को कड़ी निगरानी में रखा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की योजना बनाई है। इस मामले में अधिकारियों से और भी जानकारी जुटाने के लिए जांच जारी रहेगी।
यह घटना मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए कदमों को और मजबूत करती है, और अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे भविष्य में ऐसी कड़ी कार्यवाहियों को जारी रखेंगे ताकि राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।












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