Bhopal News: पराली जलाने वालों पर बड़ी कार्रवाई, एक साथ 4 किसानों पर ₹37,500 का जुर्माना, FIR भी दर्ज

Bhopal News: पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन अब सख्त मोड में आ गया है। भोपाल में इस सीजन की पहली बड़ी कार्रवाई में पराली जलाने के आरोप में एक साथ चार किसानों पर कुल ₹37,500 का जुर्माना ठोका गया है।

यही नहीं, प्रशासन ने इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। यह कार्रवाई जिले में पराली जलाने पर लगे प्रतिबंध के उल्लंघन के तहत की गई है, जो 5 मई तक प्रभावी रहेगा।

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कहां हुई कार्रवाई? कौन-कौन फंसे?

हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्रवाई ग्राम परवलिया और परेवा खेड़ा में की गई। जिन किसानों पर जुर्माना लगाया गया है, उनके नाम और जुर्माने की राशि इस प्रकार है:

  • गीता प्रसाद पिता किशनलाल, ग्राम परवलिया - ₹15,000
  • गब्बर सिंह पिता नवल सिंह ठाकुर, ग्राम परवलिया - ₹2,500
  • राजेश पिता धनसिंह मीणा, ग्राम परेवा खेड़ा - ₹15,000
  • होरीलाल पिता मिट्ठू लाल, निवासी भोपाल - ₹5,000
  • इन सभी के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी।

5 मई तक जिले में सख्त प्रतिबंध

भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों का पालन करते हुए पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। यह आदेश जिले में 5 मई 2025 तक लागू रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि इसके उल्लंघन पर आर्थिक दंड के साथ-साथ आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाएगा।

Bhopal News: क्यों हो रही है इतनी सख्ती?

पराली जलाना ना केवल खेतों की उर्वरक क्षमता को खत्म करता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अत्यंत हानिकारक है। इससे जहरीली गैसें जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, मिथेन और बारीक धूलकण (PM 2.5/PM 10) का उत्सर्जन होता है, जो हवा की गुणवत्ता को खराब करते हैं और सांस की बीमारियों को बढ़ावा देते हैं।

प्रशासन का मानना है कि खेत में पड़े भूसे और डंठलों को अगर सड़ने दिया जाए तो प्राकृतिक रूप से मिट्टी उपजाऊ बनती है। उन्हें जलाना पर्यावरणीय ऊर्जा का सीधा नुकसान है।

Bhopal News: विकल्प मौजूद, फिर भी जला रहे किसान

अधिकारियों ने बताया कि जिले में कई किसान रोटावेटर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) और अन्य आधुनिक मशीनों का उपयोग कर डंठलों को हटाते हैं। ये मशीनें अब सरकारी योजना के तहत रियायती दरों पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इसके बावजूद कुछ किसान अब भी पराली जलाने की पुरानी आदत नहीं छोड़ रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन को सख्ती बरतनी पड़ रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी? हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह कार्रवाई एक चेतावनी है। अगली बार जुर्माना और एफआईआर के साथ जेल भी हो सकती है। हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कृत्य को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

कहां है समाधान?

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने की आदत को रोकने के लिए जन-जागरूकता, सस्ती तकनीक और सरकारी मदद जरूरी है। किसान अगर खुद जागरूक होकर अपनी मिट्टी को बचाएं तो उन्हें लंबे समय में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा मिलेगा। भोपाल में यह पहली बड़ी कार्रवाई है लेकिन संकेत साफ हैं-अगर आदेशों का उल्लंघन किया तो अगला जुर्माना और सख्त हो सकता है।

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