Bhopal short circuit: संजय नगर में शॉर्ट सर्किट से युवक की दर्दनाक मौत, बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप
Bhopal short circuit: राजधानी भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत संजय नगर में मंगलवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया।
सुबह करीब 7 बजे अचानक हुए शॉर्ट सर्किट के चलते क्षेत्र के कई घरों में करंट फैल गया, जिससे 25 वर्षीय युवक सतीश ककोटे की मौके पर ही करंट लगने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश है और विभाग पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया जा रहा है।

हादसा: एक दरवाजा, एक झटका, और उजड़ गया घर
प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक के परिजनों के अनुसार, सुबह-सुबह जब सतीश अपने घर से बाहर निकल रहा था, तभी जैसे ही उसने लोहे का दरवाजा पकड़ा, उसे तेज़ करंट का झटका लगा और वह वहीं गिर पड़ा। परिवार वालों ने तुरंत उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
सतीश के छोटे भाई रामू ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हमने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा हो सकता है। वो सिर्फ दरवाजा खोल रहा था... और हमारे सामने हमारी दुनिया उजड़ गई।" सिर्फ सतीश ही नहीं, बल्कि इलाके के 10 से ज्यादा घरों में इस घटना से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल गए। कई घरों में फ्रिज, टीवी, पंखे और कूलर पूरी तरह से खराब हो गए।
पुलिस की शुरुआती जांच और पोस्टमॉर्टम
शाहजहांनाबाद थाना प्रभारी यूपीएस चौहान ने बताया कि "प्रारंभिक जांच में यह हादसा डीपी (डिस्ट्रीब्यूशन पैनल) में आए तकनीकी फॉल्ट के कारण हुआ है। शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और जांच जारी है।"
पुलिस ने तकनीकी टीम से रिपोर्ट मांगी है और मामले की विस्तृत छानबीन की जा रही है। हालांकि अब तक बिजली विभाग की ओर से कोई जवाबदेही तय नहीं हुई है।
संजय नगर के लोगों में गुस्सा: "हर साल ऐसा होता है, लेकिन कोई नहीं सुनता"
घटना के बाद संजय नगर के दर्जनों लोग जमा हुए और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाज़ी की। स्थानीय निवासी शफीक रहमान ने बताया, "ये पहली बार नहीं है। हमने कम से कम चार बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की है कि डीपी से करंट लीक हो रहा है। कई बार जानवरों की मौत हो चुकी है। पर हर बार सिर्फ तार बदलकर चले जाते हैं।"
मोहम्मद इरशाद ने बताया कि इस हादसे में उनके और उनके पड़ोसियों के घरों में हजारों रुपए के उपकरण जल गए। उन्होंने कहा, "अगर समय रहते कोई कार्रवाई होती तो आज सतीश जिंदा होता। हर बार जानवर मरते हैं, इस बार इंसान की बारी थी।"
Bhopal short circuit: क्यों नहीं ली जाती शिकायतें गंभीरता से?
पूर्व पार्षद मेवालाल केनर्जी ने इस हादसे की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से एमपीईबी पर डाली। उन्होंने कहा, "बरसों से इस इलाके की डीपी खराब है। तार जर्जर हैं, पोल खुले पड़े हैं। हम अधिकारियों को कई बार बता चुके हैं, पर उन्हें तब तक फर्क नहीं पड़ता जब तक कोई मर न जाए। अब जब एक होनहार युवक की जान चली गई, क्या कोई जिम्मेदार सस्पेंड होगा?"
स्थानीय लोगों ने कहा कि बारिश का मौसम आते ही हालात और बदतर हो जाते हैं। करंट से डरकर बच्चे बाहर नहीं निकलते। कई परिवारों ने तो अपने घरों में प्लास्टिक की परतें तक चढ़ा दी हैं।
भोपाल में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
- भोपाल में बिजली से जान जाने की घटनाएं नई नहीं हैं।
- वर्ष 2022 में कमला नगर में 7 साल के बच्चे की करंट से मौत हुई थी।
- 2023 में छोला दशहरा मैदान के पास एक दुकानदार करंट की चपेट में आया था।
- कई जगहों पर खुले ट्रांसफॉर्मर और लटके तार हादसों को न्यौता देते हैं, लेकिन विभाग की लापरवाही लगातार जारी है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस दर्दनाक हादसे के बाद न केवल स्थानीय लोग, बल्कि कई सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता भी बिजली विभाग की लापरवाह कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
विधायक प्रतिनिधि राकेश मेहता ने कहा,
"यह एक प्रशासनिक हत्या है। एक गरीब परिवार का बेटा सिर्फ इसलिए मर गया क्योंकि विभाग समय रहते मरम्मत नहीं करता। हम इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे और मांग करेंगे कि सतीश के परिवार को कम से कम ₹25 लाख मुआवजा दिया जाए।"
सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर गुस्सा है। ट्विटर और फेसबुक पर लोग पूछ रहे हैं कि
"क्या अब जान जाने के बाद भी कोई कार्रवाई होगी?"
Bhopal short circuit: बिजली विभाग की चुप्पी और दिखावटी कार्रवाई
घटना के बाद बिजली विभाग के कुछ कर्मचारी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन उन्होंने केवल अस्थायी तौर पर डीपी की मरम्मत की और चले गए। विभाग की ओर से न तो कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही किसी अधिकारी ने घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग को पहले से इस समस्या की जानकारी थी, लेकिन फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
आगे क्या?
सतीश ककोटे की असमय और दर्दनाक मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन और बिजली विभाग अपनी लापरवाही से कोई सबक लेगा?
- इलाके के लोग अब सिर्फ जवाब नहीं, कार्रवाई चाहते हैं -
- दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो,
- परिजनों को आर्थिक सहायता दी जाए,
- और पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था की तकनीकी ऑडिट कराई जाए।
- अब यह देखना बाकी है कि क्या यह घटना भी सिर्फ फाइलों में दर्ज होकर रह जाएगी, या वाकई सिस्टम में कोई सुधार होगा।












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