MP News: भोपाल स्मार्ट सिटी के लिए 1000 करोड़ खर्च, फिर भी अधूरा सपना, केंद्र की फंडिंग बंद होने से बढ़ी चिंता
Bhopal MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी, में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का सपना अब धूल फांकता नजर आ रहा है। 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च होने के बावजूद न तो शहर स्मार्ट बन सका, न ही विकास के बड़े-बड़े वादे हकीकत में बदल पाए। अब 31 मार्च 2025 से केंद्र सरकार की फंडिंग बंद होने की खबर ने इस परियोजना के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के दावे अब खोखले साबित हो रहे हैं, और टीटी नगर का 333 एकड़ का इलाका उजड़ा और वीरान पड़ा है। आखिर इतनी बड़ी राशि कहां गई, और भोपाल का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट क्यों कागजों में सिमटकर रह गया? आइए, इसकी पड़ताल करते हैं।

स्मार्ट सिटी का सपना: वादे और हकीकत
स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत केंद्र सरकार ने 2015 में की थी, और 28 जनवरी 2016 को भोपाल को पहले चरण में चुना गया। स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने दावा किया था कि अगले पांच साल में नॉर्थ और साउथ टीटी नगर की 333 एकड़ जमीन को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। योजना थी कि जमीन बेचकर 6644 करोड़ रुपये की आय होगी, और डेवलपमेंट कॉस्ट 3444 करोड़ रुपये आएगी। लेकिन हकीकत यह है कि टीटी नगर का इलाका आज भी उजाड़ और सुनसान है। न कोई कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बना, न ही मकान।
6000 से ज्यादा पेड़ों वाला यह इलाका कभी हरियाली से भरा था, जहां सरकारी कर्मचारियों ने पेड़ लगाए थे। लेकिन प्रोजेक्ट के नाम पर 2000 पेड़ काट दिए गए, और बदले में मिला सिर्फ वीरान मैदान। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मीट में इस प्रोजेक्ट को खूब प्रचारित किया गया, लेकिन उद्योग समूहों ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब तो कंपनी अपने कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के लिए भी जूझ रही है।
कागजों में सिमटी योजनाएं
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत भोपाल में नॉलेज हब, स्मार्ट हब, हेल्थ एजुकेशन हब, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, और फ्री वाई-फाई जैसे बड़े-बड़े वादे किए गए थे। लेकिन ये सारी योजनाएं कागजों में ही कैद हैं। 342 एकड़ के एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) इलाके में न तो कोई मकान बना, न ही कोई कमर्शियल प्रोजेक्ट शुरू हुआ। पैन सिटी के तहत स्मार्ट पोल और स्ट्रीट लाइट पोल लगाए गए, सड़कें भी बनीं, लेकिन अब उनकी हालत जर्जर हो चुकी है। स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने अपनी आय के लिए जो प्रोजेक्ट बनाए, वे भी वीरान पड़े हैं।
केंद्र की फंडिंग बंद, अब क्या?
केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन के लिए भोपाल को करीब 1000 करोड़ रुपये दिए, लेकिन इस राशि का सही इस्तेमाल नहीं हो सका। अब 31 मार्च 2025 से केंद्र की फंडिंग बंद होने की खबर ने प्रोजेक्ट की कमर तोड़ दी है। बिना केंद्र के सहयोग के इस परियोजना को धरातल पर उतारना आसान नहीं होगा। सवाल यह है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी भोपाल स्मार्ट क्यों नहीं बन सका? क्या फंड का दुरुपयोग हुआ, या फिर योजना में ही खामियां थीं?
महापौर का बयान: जवाबदेही से पल्ला झाड़ा
जब इस मामले पर महापौर मालती राय से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया। हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर खुलकर बात करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था, "शहर में स्मार्ट सिटी के तहत विकास कार्य हुए हैं। केंद्र की सहायता बंद होने के बाद अब इसे शासन और निगम के फंड से आगे बढ़ाया जाएगा।" लेकिन यह प्रोजेक्ट कब और कैसे पूरा होगा, इस पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
भोपालवासियों की निराशा
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर भोपालवासियों में शुरू से ही उत्साह था, लेकिन अब यह निराशा में बदल चुका है। टीटी नगर का उजड़ा इलाका, कटी हरियाली, और जर्जर सड़कें इस बात का सबूत हैं कि स्मार्ट सिटी का सपना अभी दूर की कौड़ी है। केंद्र की फंडिंग बंद होने के बाद अब यह प्रोजेक्ट पूरी तरह राज्य सरकार और नगर निगम के भरोसे है। लेकिन जिस रफ्तार से काम हुआ है, उससे लगता नहीं कि यह सपना जल्द हकीकत बनेगा।
सवाल जो बाकी हैं
- 1000 करोड़ रुपये का हिसाब कहां है?
- 2000 पेड़ काटने का जिम्मेदार कौन?
- PPP मॉडल में निवेश क्यों नहीं आया?
केंद्र की फंडिंग बंद होने के बाद प्रोजेक्ट का भविष्य क्या होगा?
भोपाल का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट अब न सिर्फ एक अधूरी कहानी है, बल्कि यह उन तमाम सवालों का प्रतीक भी है, जो जवाब मांग रहे हैं। क्या यह प्रोजेक्ट कभी पूरा होगा, या फिर यह सिर्फ कागजों की सैर करता रहेगा? यह वक्त ही बताएगा।
भोपाल का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट एक बड़ा सपना था, जो अब पूरी तरह से जमीनी हकीकत से दूर हो चुका है। एक तरफ केंद्र सरकार का सहयोग खत्म हो गया है, तो दूसरी तरफ विकास की गति धीमी हो चुकी है। अब यह राज्य सरकार और नगर निगम पर निर्भर है कि वे इस अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कर पाते हैं या नहीं। लेकिन फिलहाल भोपालवासियों की उम्मीदें और उत्साह दोनों ही डगमगा रहे हैं, और उनका सपना अब अधूरा ही नजर आ रहा है।
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