बढ़ती हुई महंगाई की वजह से खटाई में पड़ गई पीएम आवास योजना

प्रधानमंत्री आवास योजना पर महंगाई का असर दिखने लगा है, महंगाई की वजह से योजना के तहत मिलने वाली राशि से हितग्राही अपना मकान निर्माँण नहीं कर पा रहे है।

भिंड, 19 मई। बढ़ती हुई महंगाई का असर अब सरकारी योजनाओं पर भी दिखना शुरु हो गया है। यही वजह है कि हितग्राही अब चाहते हुए भी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे है। पीएम आवास योजना भी ऐसी ही योजना है, जिस पर महंगाई ही मार पड़ रही है।

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महंगाई दिनों दिन बढ़ती जा रही है। महंगाई का असर आम आदमी की जेब के साथ ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी पड़ने लगा है। योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों को जो पैसा सरकार द्वारा दिया जाता है, वह पैसा अब महंगाई की वजह से नाकाफी साबित हो रहा है। पीएम आवास योजना भी ऐसी ही योजना है जिस पर महंगाई सिर चढ़कर बोल रही है। महंगाई की वजह से इस योजना का लाभ मिल जाने पर भी हितग्राहियों को उनका पक्का घर नहीं मिल पा रहा है।
लोहा, ईंट, रेत और गिट्टी समेत मजदूरी की कीमतों में हो रही है वृद्धि
सरकार द्वारा पीएम आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्र में इस योजना के लिए हितग्राही को 120000 रुपय और ग्रामीण क्षेत्र के लिए 130000 रुपय दिए जाते हैं, लेकिन अब इतने कम रुपय मे घर बनाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। लगातार लोहा, ईट, रेत और गिट्टी के दाम बढ़ रहे है। इसके अलावा मजदूरों की मजदूरी भी बढ़ गई है। यही वजह है कि अब सरकार द्वारा मिलने वाली राशि से घर बनाना काफी मुश्किल काम हो गया है।
पहली किश्त मिल जाने पर भी हितग्राही शुरु नहीं कर पा रहे भवन निर्माण
पीएम आवास योजना के जिन पात्र हितग्राहियों को पहली किश्त जारी कर दी गई है वे हितग्राही भवन निर्माण का काम शुरु नहीं कर पा रहे हैं। हितग्राहियों का कहना कि पहली किश्त में जो रकम मिली है उससे मकान की नींव भी सही ढंग से खड़ी नहीं कर सकते हैं।
हितग्राहियों ने की पीएम आवास योजना की राशि बढ़ाने की मांग
पीएम आवास योजना के हितग्राही अब इस योजना की राशि बढ़ाने की मांग करने लगे है। हितग्राहियों का कहना है कि योजना की राशि बढ़ाने पर ही घर बनने का सपना साकार हो सकता है, नहीं तो आसमान छू रही महंगाई में अपना घर बनाने का सपना सिर्फ सपना ही बनकर रह जाएगा।
पीएम आवास के तहत एक आवास मे लगता है इतना मटेरियल
भवन निर्माण करने वाले कारीगर बतातें है कि एक प्रधानमंत्री आवास बनाने में लगभग 5 क्विंटल सरिया, 80 सीमेंट बोरी, 6500 ईट, 2 ट्रॉली गिट्टी और 3 ट्रॉली रेत लगती है। इसके अलावा मजदूरों की मजदूरी भी लगती है। कुल मिलाकर इतना सब सामान खरीदने के लिए योजना में मिल रही राशि कम पड़ रही है।
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