प्रिंसिपल को अलग-अलग लड़कियों के तकिये लगाकर सोने की लत

खबर बेंगलुरु के अनेकल की है, जहां पर किट्टूर रानी चेन्नमा गर्ल्स रेजीडेंशियल स्कूल के 52 वर्षीय प्रिंसिपल मल्लिकार्जुन स्वामी को हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के तकिये लगाकर सोने की लत है। इस लत का खुलासा तब हुआ जब लड़कियों ने तकिया-चादर मांगते वक्त वीडियो बनाया और एक न्यूज चैनल को दे दिया।
उसके बाद लड़कियों ने पुलिस में कम्प्लेन दर्ज करायी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ये महाशय एक समय में देश के सिपाही रह चुके हैं, और कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था।
क्या करता था प्रिंसिपल
हर रात सोने से पहले प्रिंसिपल शराब के कुछ पेग लगाता और उसके बाद अपने नौकर कार्तिक को लेकर गर्ल्स हॉस्टल जाता। वहां जाकर कॉरिडोर में डांस करता। यहां तक तो बर्दाश्त के अंदर था, लेकिन हद तो तब पार हुई जब प्रिंसिपल ने लड़कियों से तकिये मांगना शुरू कर दिये।
प्रिंसिपल रात को आता और लड़कियों से अलग-अलग मुद्दों पर बात-चीत करता और फिर चलने से पहले लड़कियों से तकिये, कंबल व उनकी चादर मांग कर ले जाता।
लड़कियों की कम्प्लेन पर जब पुलिस ने गहन पूछताछ की तो स्वामी ने बताया कि जवान लड़कियों के तकिये को लगाकर सोने में उसे ऐसा फील होता है कि जिस लड़की का तकिया वो लगाये है, वो उसके पास सो रही है। यही नहीं कंबल या चादर ओढ़ने के बाद उसे ऐसा लगता कि वो खुद लड़की से लिपट कर सो रहा है। प्रिंसिपल का कहना है कि उसने कभी किसी भी लड़की के साथ गलत हरकत नहीं की। तकिया-चादर मांग कर सोने में उसे हसीन सपने आते थे।
मोबाइल से खींचता था लड़कियों की तस्वीरें
प्रिंसिपल की हरकतें यहां खत्म नहीं हुई थीं, वह हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की तस्वीरें भी खींचता था। पुलिस को बरामद मोबाइल में कुछ ऐसी तस्वीरें भी मिलीं, जो जूम करके ली गई हैं।
बेंगलुरु ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक रमेश बनोठ के अनुसार छात्राओं ने बताया कि प्रिसिपल अकसर हॉस्टल आ जाता और बात करते वक्त लड़कियों के गाल, पीठ, आदि पर हाथ फेर देता। इस पर लड़कियों को असहज महसूस होता लेकिन फेल किये जान के डर से कुछ बोल नहीं पातीं। यही नहीं कर्मचारियों ने भी जब मैनेजमेंट से कम्प्लेन की तो उनकी सैलरी काट दी गई।
स्वामी कॉलेज परिसर में ही अपनी पत्नी व बेटी के साथ रहता है। पुलिस ने नौकर कार्तिक और प्रिंसिपल स्वामी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रिंसिपल पर पॉक्सो के तहत धाराएं लगायी गई हैं।
टॉयलेट जाने के लिये लेना पड़ता है टोकन
लड़कियों ने अपनी आप बीती सुनाते हुए कहा कि इस सरकारी आवासीय स्कूल में 160 छात्राएं हैं, जिनके लिये महज चार शौचालय हैं और सुबह शौचालय के इस्तेमाल के लिये लड़कियों को टोकन लेना पड़ता है। स्कूल में एक भी महिला सिक्योरिटी गार्ड नहीं है।
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