कर्नाटक CM येदियुरप्पा को HC से झटका, भ्रष्टाचार का पुराना मामला बहाल करने का आदेश
बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को भ्रष्टाचार के पुराने मामले में हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत से येदियुरप्पा के खिलाफ भूमि अधिसूचना वापस लेने से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को बहाल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने लोकायुक्त पुलिस की 2012 में दायर चार्जशीट के आधार पर अपराधों का संज्ञान लेते हुए आगे की कार्यवाही करने का कहा है।

बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ ये मामला कर्नाटक में भाजपा के पहली बार सत्ता में रहने के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है। कार्यकाल के दौरान येदियुरप्पा पर गलत तरीके से भूमि अधिसूचना वापस लेकर भ्रष्टाचार करने का आरोप है। इस मामले को 2016 में सत्र न्यायालय ने पुलिस द्वारा दायर की गई क्लोजर रिपोर्ट का हवाला देते हुए मामले को बंद कर दिया था।
हाईकोर्ट ने सत्र न्यायायल के आदेश को पाया गलत
हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय के आदेश को गलत बताते हुए मामले को फिर से बहाल करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा "विशेष अदालत को लोकायुक्त पुलिस की 2012 में दायर चार्जशीट के आधार पर अपराधों का संज्ञान लेते हुए और कानूनी रूप से आगे की कार्यवाही करने का आदेश दिया जा रहा है।"
हाईकोर्ट ने विशेष अदालत से पूर्व मंत्री कट्टा सुब्रमण्य नायडू के खिलाफ भी अपराध का संज्ञान लेने का आदेश दिया है। पूर्व मंत्री सुब्रमण्य नायडू भी इस मामले में आरोपी हैं।
क्या है मामला ?
जस्टिस जॉन माइकल कून्हा ने ये फैसला ए आलम पाशा की याचिका पर 17 मार्च को फैसला सुनाया है। याचिकाकर्ता ने 25 जुलाई 2016 के सत्र न्यायालय के आदेश पर सवाल उठाते हुए येदियुरप्पा और नायडू के खिलाफ चार्जशीट के आधार पर कार्यवाही की अनुमित मांगी थी।
पाशा ने 2011 में भ्रष्टाचार के कथित आरोपों को लेकर तत्कालीन मंत्री मुरुगन नीरानी और 8 अन्य लोगों के खिलाफ निजी शिकायत की थी जिसके बाद विशेष अदालत ने लोकायुक्त पुलिस से मामले की जांच कराने का आदेश दिया था।
हालांकि बाद में लोकायुक्त पुलिस ने मई 2012 में एक शिकायत में नामजद 9 लोगों के खिलाफ एक बी रिपोर्ट दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि इन लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं लेकिन दायर की चार्जशीट में ये कहा गया था कि जांच के दौरान येदियुरप्पा और नायडू के खिलाफ अवैध और भ्रष्ट आचरण का मामला प्रकाश में आया है।
आरोप पत्र में कहा गया था येदियुरप्पा ने बेंगलुरु उत्तरी तालुक के हूविनायकनहल्की गांव में 20 एकड़ भूमि की अधिसूचना वापस ली थी। नायडू के खिलाफ बेंगलुरु ग्रामीण जनपद के नीलमंगला तालुक के मकनाकुप्पे गांव 4 एकड़ भूमि की अधिसूचना वापस ली थी। दोनों के खिलाफ करोड़ों रुपये राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।












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