कर्नाटक चुनाव 2023 : पिछले 4 चुनाव में 3 बार किसी को पूर्ण बहुमत नहीं, बार-बार त्रिशंकु विधानसभा क्यों ?
karnataka Elections 2023: पिछले चार कर्नाटक विधानसभा चुनावों का इतिहास देखा जाए तो 2013 में केवल कांग्रेस पार्टी ने ही पूर्ण बहुमत का आंकड़ा हासिल किया था। बाकी, तीन चुनावों में त्रिशुंक विधानसभा की स्थिति बनी थी।

Karnataka Elections 2023: कर्नाटक में जो पिछले चार विधानसभा चुनाव हुए हैं उनमें तीन बार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति रही। 2013 में सिर्फ कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत (113) का आंकड़ा पार किया था। 2008 में भाजपा को 110 सीटें जरूर मिली थी। लेकिन 3 सीट कम होने से वह बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पायी थी। उसे निर्दलीयों की मदद से सरकार बनानी पड़ी थी। 2004 और 2018 में त्रिशंकु विधानसभा होने की वजह से कर्नाटक राजनीतिक उछल-पुथल का शिकार रहा। इस दौर में अवसरवादी गठबंधन के कारण सरकार का बनना और गिरना आम बात थी। अस्थिर सरकारों के कारण राज्य के विकास पर गहरा असर पड़ा है। कमजोर शासन की वजह से भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पाया। इसके बावजूद जनता जनार्दन ने पूर्ण बहुमत वाली सरकार नहीं चुनी। क्या 2023 के चुनाव में किसी दल को पूर्ण बहुमत मिल पाएगा ?

बार-बार खंडित जनादेश क्यों ?
जब किसी राज्य में बार-बार खंडित जनादेश मिलता है तो वहां की राजनीति में लोभ और स्वर्थ स्थायी तत्व बन जाते हैं। 2004 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 79, कांग्रेस को 65 और जेडीएस को 58 सीटें मिलीं थीं। कांग्रेस और जेडीएस ने मिल कर सरकार बना ली। कांग्रेस के धरम सिंह मुख्यमंत्री बने। लेकिन 2006 में जेडीएस ने कांग्रेस से समर्थन वापस लेकर सरकार गिरा दी। जेडीएस ने भाजपा से समझौता कर सबको चौंका दिया। जेडीएस के नेता एचडी कुमारास्वामी ने मुख्यमंत्री बनने के लिए भाजपा से हाथ मिला लिया। दोनों पार्टियों की नीतियों में जमीन-आसमान का अंतर था। लेकिन सत्ता के लिए इसके भुला दिया गया। इसी क्रम में 2007 में एक नया इतिहास बना। अब करार के मुताबिक भाजपा के नेता को मुख्यमंत्री बनना था। नवम्बर 2007 में भाजपा के नेता येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने। कर्नाटक में पहली बार भाजपा ने सरकार बना कर इतिहास रच दिया। लेकिन भाजपा की यह ऐतिहासिक सरकार केवल 7 दिन ही चल पायी क्यों कि जेडीएस ने ऐन वक्त पर समर्थन नहीं दिया।

जेडीएस – कभी भाजपा के साथ, कभी कांग्रेस के साथ
जेडीएस यानी जनता दल सेक्यूलर, सत्ता के लिए कभी भाजपा के साथ गया तो कभी कांग्रेस के साथ। जेडीएस, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का दल है। उनके पुत्र कुमारास्वामी अब इस दल के नेता हैं। कुमारस्वामी अपनी सहूलियत के हिसाब से राजनीतिक सोच बदलते रहे हैं। जेडीएस कभी अकेले सरकार बनाने की स्थिति में नहीं रही लेकिन कुमारास्वामी दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। एक बार भाजपा के सहयोग से और एक बार कांग्रेस के सहयोग से। 2018 में जेडीएस को केवल 37 सीटें मिली थीं जब कि कांग्रेस को 80 सीटें। लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे कुमारास्वामी। उन्होंने भाजपा का भय दिखा कर कांग्रेस को अपना फैसला मानने के लिए मजबूर कर दिया। बाद में भाजपा ने कांग्रेस और जेडीएस में तोड़फोड़ कर खुद अपनी सरकार बना ली। जब इस तरह से सरकार का गठन होगा तो पारदर्शी शासन की उम्मीद कैसै की जा सकती है।

त्रिशंकु विधानसभा, जेडीएस की चांदी
कांग्रेस, जेडीएस के साथ गठबंधन की सरकार तो बना लेती है लेकिन वह इससे चुनाव पूर्व समझौता नहीं करती। 2023 का चुनाव भी कांग्रेस अकेल लड़ रही है। चुनावी मैदान में वह भाजपा की तरह जेडीएस का भी विरोध कर रही है। बल्कि कहें तो
कांग्रेस जेडीएस पर ज्यादा हमलावार है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक में अगर भाजपा का उदय हुआ तो इसके लिए जेडीएस जिम्मेदार है। उसी ने 2007 में पहली बार भाजपा की सरकार बनवायी थी। जेडीएस का अपना कोई राजनीतिक सिद्धांत नहीं है। वह सत्ता के लिए कोई समझौता कर लेती है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा पर वंशवादी राजनीति का आरोप लगते रहा है। उनके दो पुत्र हैं, एचडी रेवन्ना और एचडी कुमारास्वामी। देवेगौड़ा ने छोटे पुत्र कुमारास्वामी को अपना उत्तराधिकारी बनाया। बड़े पुत्र रेवन्ना पूर्व मंत्री और अभी विधायक हैं। दोनों लंबे समय से राजनीति में हैं।
Recommended Video


देवेगौड़ा परिवार के 8 लोग राजनीति में
देवेगौड़ा परिवार के आठ लोग राजनीति में हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा जो अब 90 साल के हो चुके हैं, 2020 में राज्यसभा के लिए चुने गये थे। 2019 का लोकसभा चुनाव वे हार गये थे। उनके बड़े पुत्र रेवन्ना, छोटे पुत्र कुमारास्वामी और कुमारास्वामी की पत्नी अनिता विधायक हैं। रेवन्ना के पुत्र प्रज्जवल हासन से लोकसभा के सदस्य हैं। रेवन्ना के पुत्र सूरज विधान परिषद के सदस्य हैं। कुमारास्वामी के पुत्र निखिल 2019 में मांड्या से लोकसभा का चुनाव हार गये थे। रेवन्ना की पत्नी भवानी जिला पंचायत की सदस्य रही हैं। 2023 के चुनाव में परिवार के एक और सदस्य ने टिकट के लिए दावा कर जेडीएस प्रमुख कुमारास्वामी की परेशानी बढ़ा दी है। रेवन्ना की पत्नी भवानी ने हासन विधानसभा सीट से टिकट मांगा है। रेवन्ना ने धमकी दी है कि अगर उनकी पत्नी को हासन से जेडीएस का टिकट नहीं दिया गया तो वे निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगी। इस धमकी के बाद जेडीएस में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। अब देखना है कि इस चुनाव में जेडीएस का प्रदर्शन कैसा रहता है क्यों कि अभी तक वह सत्ता के समीकरण को प्रभावित करते रहा है।
यह भी पढ़ेंः कर्नाटक चुनाव 2023 : वो बारिश का मौसम- वो राहुल का भाषण, फिर मां के जूतों के फीते बांधना












Click it and Unblock the Notifications