कर्नाटक चुनाव 2023 : वो बारिश का मौसम- वो राहुल का भाषण, फिर मां के जूतों के फीते बांधना
Karnataka Election 2023: कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस सभी बड़ी पार्टियां जीतने के लिए हर संभव तैयारियों में लगी हैं।

Karnataka Election 2023: क्या राहुल गांधी, दादी इंदिरा गांधी की तरह कर्नाटक की जमीन से अपनी राजनीतिक पुनर्वापसी कर पाएंगे ? कर्नाटक की हालिया चुनावी परम्परा भी कांग्रेस के पक्ष में दिख रही है। 2008 में यहां भाजपा की सरकार बनी तो 2013 में कांग्रेस सत्ता में लौटी। 2018 में कुछ महीनों के लिए जेडीएस की सरकार रही लेकिन फिर भाजपा को सत्ता मिल गयी। तो क्या 2023 में कांग्रेस वापसी करेगी ? ट्रेंड के हिसाब से तो कांग्रेस का पलड़ा भारी नजर आ रहा है लेकिन चुनाव जीतना इतना आसान भी नहीं। कोई भी दल, मुद्दों, रणनीति और जनसमर्थन से ही चुनाव जीत सकता है। राहुल गांधी के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न है।

राहुल गांधी के लिए कर्नाटक चुनाव क्यों अहम ?
दो कारणों से कर्नाटक चुनाव राहुल गांधी के लिए निर्णायक है। उन्हें न केवल भाजपा को जवाब नहीं देना है बल्कि विपक्ष को भी कांग्रेस की हैसियत बतानी है। कांग्रेस को दरकिनार कर जिस तरह से देश में गैरकांग्रेस तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश हो रही है वह राहुल गांधी के लिए बड़ा झटका है। कर्नाटक चुनाव जीत कर वे एक तीर से दो शिकार कर सकते हैं। अगर राहुल गांधी कर्नाटक चुनाव में जीत के नायक बनते हैं तो तीन बातें उनके हक में जा सकती हैं। पहला संदेश ये जाएगा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव जीत सकती है। दूसरी संदेश ये जाएगा कि केवल ममता बनर्जी और अंरविंद केजरीवाल ही नहीं बल्कि राहुल गांधी भी भाजपा को रोकने की ताकत रखते हैं। तीसरा संदेश ये जाएगा कि कांग्रेस के बिना विपक्षी एकता कभी मजबूत हो नहीं सकती।

मां के जूते के फीते बांधे, जीता दिल !
लेकिन केवल चाहने से क्या होगा ? चुनाव जीतने के लिए लोगों का जनसमर्थन जरूरी है। जनसमर्थन कैसे मिलेगा ? जाहिर है इसके लिए जनता से जुड़ना होगा। राहुल गांधी ने इसके लिए मेहनत करने में कोई कमी नहीं रखी है। कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा के दो राजनीतिक बिंब पर जरा गौर कीजिए। सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों से इस पदयात्रा में देर से शामिल हुई थीं। वे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में पहली बार कर्नाटक के मांड्या से शामिल हुईं थीं। सोनिया गांधी की इस सहभागिता से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश कई गुना बढ़ गया था।
सोनिया गांधी से कर्नाटक के लोगों का आत्मीय जुड़ाव है। खास कर महिलाएं उनके प्रति सम्मान की भावना रखती हैं। सोनिया गांधी कर्नाटक के वेल्लारी से सांसद रह चुकी हैं। मांड्या इलाके में पदयात्रा के दौरान एक दुर्लभ दृश्य तब सामने आया जब राहुल गांधी नीचे बैठ कर अपनी मां के जूते के फीते बांध रहे थे। वैसे तो यह एक सामान्य बात थी लेकिन इस दृश्य का भावनात्मक महत्व बहुत प्रबल था।दरअसल पदयात्रा के दौरान सोनिया गांधी के जूते के फीते खुल गये थे जिससे उन्हें चलने में दिक्कत होने लगी। तब राहुल गांधी ने खुद नीचे बैठ कर अपनी मां के फीते बांध दिये। इस दृश्य को देख कर आम जनता की नजर में राहुल गांधी की इज्जत बढ़ गया। मालूम हो कि इस क्षेत्र में जेडीएस का प्रभाव सबसे अधिक है। इस बार कांग्रेस ने अपने लिए जमीन तैयार करने की कोशिश की है।

वो बारिश का मौसम, वो राहुल का भाषण
कर्नाटक के मैसूर में जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा चल रही थी तब वहां राहुल गांधी का एक जुझारू रूप देखने को मिला था। यात्रा के दौरान राहुल गांधी को एक स्थान पर जनसभा करनी थी। मंच तैयार था। लोग भी बड़ी तादाद में जुटे थे। जैसे ही राहुल गांधी मंच की तरफ बढ़ने लगे अचानक बारिश शुरू हो गयी। वे मंच पर पहुंचे तो मूसलाधार वर्षा होने लगी। ऐसी स्थिति में उन्होंने न तो बारिश रुकने इंतजार किया और न ही किसी से छतरी मांगी। वे भींगते हुए ही भाषण देने लगे। श्रोता भी बारिश के बीच उनकी बात सुनते रहे। तब राहुल गांधी ने कहा था भारत जोड़ने की कोशिश को कोई रोक नहीं सकता, बारिश और तूफान भी नहीं। इसके अलवा तुमकुर जिले में भी राहुल गांधी ने बारिश के बीच पदयात्रा की थी। यानी राहुल गांधी ने पदयात्रा के दौरान कर्नाटक के लोगों के दिलों में जगह बनाने की भरपूर कोशिश की।
Recommended Video


कांग्रेस अगर नहीं टूटती तो बीजेपी नहीं आती
लेकिन कांग्रेस के साथ दिक्कत ये है कि वह चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी सरकार नहीं बना पाती या नहीं बचा पाती। राहुल गांधी विधायकों को एकजुट रखने में विफल रहते हैं। अगर 2019 में कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रख पाती तो कर्नाटक में कभी भाजपा की सरकार नहीं बन पाती। 2018 के चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति थी। भाजपा 104, कांग्रेस 80 और जेडीएस 37 सीटों पर जीती थी। भाजपा के बहुमत साबित नहीं करने पर जेडीएस- कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनी थी। लेकिन 2019 में कांग्रेस के 16 विधायकों ने बगावत कर सदन से इस्तीफा दे दिया था। इसकी वजह से जेडीएस-कांग्रेस की सरकार गिर गयी थी और
भाजपा ने सरकार बना ली थी। 2018 में कांग्रेस के 80 विधायक जीते थे लेकिन आज की तारीख में उसके 69 विधायक ही बचे हैं। जब कि भाजपा अब 104 से 117 पर पहुंच गयी है। मध्य प्रदेश में भी इसी तरह कांग्रेस सरकार का पतन हो गया था। यानी राहुल गांधी पर कर्नाटक चुनाव जीतने के साथ साथ, विधायकों को एकजुट रखने की दोहरी जिम्मेदारी है।
यह भी पढ़ेंः Karnataka election 2023 में क्या भाजपा बदल पाएगी 1985 के बाद का ये इतिहास,क्या टूटेगा ये मिथक?
-
LPG Cylinder: कमर्शियल गैस सिलेंडर पर सरकार का चौंकाने वाला फैसला, आज से बदल गए नियम! -
US Iran War Impact: LPG-Petrol के बाद ईरान बंद करेगा दुनिया का इंटरनेट? भारत में ये सेक्टर होंगे ठप! -
मौत से हुआ सामना? दुबई से हैदराबाद लौटीं सानिया मिर्जा, आपबीती सुनाते हुए बयां किया दर्द -
US Iran War: ईरान के हमलों के आगे बेबस Trump, हटाना पड़ा 100 साल पुराना कानून, अमेरिका में तेल-गैस की किल्लत? -
Iran Vs America: ईरान के बाद अब चीन पर कहर बनकर टूटेंगे ट्रंप! अमेरिकी रिपोर्ट के खुलासे से हड़कंप -
Parliament session: 'मोहब्बत हमसे, शादी मोदी से', राज्यसभा में बोले खड़गे, वायरल हुआ PM का रिएक्शन -
'वो मर्द शादीशुदा था, मैं उसके प्यार में पागल थी', फिर मिला ऐसा दर्द, 83 की उम्र में कुंवारी हैं ये एक्ट्रेस -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच लगातार गिर रहे सोने के भाव, अब 10 ग्राम की इतनी रह गई है कीमत, नए रेट -
UGC के नए नियमों पर आज फैसले की घड़ी! केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी सफाई -
Saudi Arabia Eid Ul Fitr 2026 : सऊदी अरब में 20 मार्च को मनाई जाएगी ईद, भारत में कब दिखेगा चांद? -
Gold Rate Today: थमी सोने की रफ्तार, कीमतों में जबरदस्त गिरावट! खरीददारी से पहले चेक कर लें लेटेस्ट रेट -
Silver Price Today: चांदी की कीमतें क्रैश! मार्च महीने में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट, कितना हुआ सिल्वर का रेट?












Click it and Unblock the Notifications