कर्नाटक: चुनाव में अब 35 दिन बाकी, भाजपा को उम्मीदवारों की घोषणा में देरी पड़ ना जाए भारी
Karnataka BJP candidate list: कर्नाटक चुनाव के लिए कांग्रेस अभी तक अपने 166 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है। लेकिन, भाजपा की सूची की अभी कोई खबर नहीं है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों की समीक्षा के बाद उम्मीदवारों के चयन की योजना बनायी थी। लेकिन समीक्षा रिपोर्ट प्रतिकूल होने के कारण उम्मीदवारों के चयन का मामला फंस गया। जिताऊ उम्मीदवारों की पहचान को लेकर भ्रम बन गया। नतीजा ये हुआ कि अभी तक कैंडिडेट फाइनल नहीं किये जा सके हैं।
अब कहा जा रहा है कि भाजपा संसदीय बोर्ड 8 अप्रैल को प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देगा। जब कि कांग्रेस ने 25 मार्च को ही अपने 124 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी। 6 अप्रैल को कांग्रेस की दूसरी सूची भी जारी हो गयी जिसमें 42 उम्मीदवारों के नाम हैं। आखिर भाजपा अपने योग्य प्रत्याशियों की पहचान क्यों नहीं कर पा रही है?
मुश्किल में भाजपा, पुराने फार्मूले पर आस
कर्नाटक में भाजपा की चुनौती इस लिए बढ़ी हुई है क्यों कि यहां कांग्रेस मजबूत है। राज्य की भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगे हैं। ऐसे में भाजपा की चुनावी नैया कैसे पार होगी? भाजपा इस सवाल का जवाब अपने पुराने फार्मूले से खोजने की कोशिश कर रही है। यानी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनावी चेहरा होंगे और मतों का ध्रुवीकरण साम्प्रदायिक आधार पर किया जाएगा।
इसके अलावा आरक्षण के नये प्रावधान को भी भुनाने की कोशिश होगी। बसवराज बोम्मई सरकार ने अल्पसंख्यकों के चार फीसदी आरक्षण को रद्द कर उसे 2 फीसदी लिंगायत और 2 फीसदी वोक्कालिगा में बांट दिया है। भाजपा ने आरक्षण के इस नये प्रावधान का चुनावी फायदा उठाने के लिए कार्ड खेल दिया है। अब कांग्रेस अल्पसंक्यकों को रिझाने के लिए कह रही है अगर उसकी सरकार बनी तो उसे 4 फीसदी आरक्षण फिर दे दिया जाएगा। भाजपा कांग्रेस के इस वायदे को तुष्टिकरण की राजनीति बता तक राजनीतिक ध्रुवीकरण कर रही है। इसके अलावा भाजपा ने टीपू सुल्तान और हिजाब प्रकरण को भी चुनावी मुद्दा बनाया है।
रिटायर येदियुरप्पा कितना असर डालेंगे?
भाजपा नेता येदियुरप्पा 80 साल के हैं और राजनीति से रिटायर हो चुके हैं। 2023 में चुनाव भी नहीं लड़ रहे हैं। चूंकि वे चुनावी चेहरा नहीं है इसलिए भाजपा अंदर से खुद को कमजोर महसूस कर रही है। वे चुनाव लड़े या न लड़े लेकिन लिंगायत समुदाय के बीच आज भी उनकी अपार लोकप्रियता है। ऐसे में नरेन्द्र मोदी समेत भाजपा के अन्य बड़े नेता उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। मोदी के अलाव भाजपा को येदियुरप्पा के नाम भी जरूरत होगी। इसलिए उन्हें चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा बनाया गया है।
हालांकि भाजपा ने कर्नाटक चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को बनाया गया है लेकिन येदियुरप्पा के चेहरे को ज्यादा अहमियत दी जा रही है। बसवराज बोम्मई के पहले कर्नाटक में भाजपा के तीन मुख्यमंत्री हुए हैं- बीएस येदियुरप्पा, सदानंद गौड़ा और जगदीश शेट्टार। एकता की भावना बनाये रखने के लिए इन तीनों को चुनाव अभियान समिति में रखा गया है। अब देखना है कि ये है कि डगआउट में बैठे येदियुरप्पा चुनावी मैदान में हो रहे खेल पर कितना असर डालते हैं।
मुस्लिम समुदाय में छवि बनाने की कोशिश
इस बीच भाजपा मुस्लिम समुदाय के बीच भी अपनी छवि बनाने की कोशिश कर रही है। धवार को राष्ट्रपति भवन में जिन 55 विशिष्ट नागरिकों को पद्म सम्मान से भूषित किया गया उनमें कर्नाटक के बिदारी शिल्प के कलाकार शाह रशीद अहमद कादरी भी प्रमुख थे। उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार लेने के बाद शाह रशीद ने कहा, मैं तो यूपीए सरकार से पद्म श्री पाने की उम्मीद कर रहा था। सोचता था कि भाजपा सरकार मुझे ये सम्मान कभी नहीं देगी। फिर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरफ देख कर कहा, लेकिन आपने मुझे गलत साबित कर दिया।
शाह रशीद की इस बात पर समारोह में मौजूद प्रधानमंत्री मोदी मुसकुराने लगे। शाह रशीद यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, मैं पद्म सम्मान पाने के लिए 10 साल से कोशिश कर रहा था। हर साल प्रोफाइल बनाने में करीब 12 हजार रुपये खर्च आते थे जो बेकार चले जाते थे। जब भाजपा की सरकार बनी तो मैंने प्रोफाइल बनाना छोड़ दिया क्यों मैं सोचता था कि भाजपा सरकार मुसलमानों को कुछ नहीं देती। लेकिन अब मैं कह सकता हूं कि मेरी ये सोच बिल्कुल गलत थी।
....फिर भाजपा को कैसे मिलेगा फायदा?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब 35 दिन ही बाकी रहे गये हैं। इसके बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा अपने उम्मीदवार तय नहीं कर पायी है। उम्मीदवारों के नाम घोषित होने में जितनी देर होगी, तैयारी का वक्त उतना ही कम मिलेगा। केवल नरेन्द्र मोदी के नाम पर भाजपा कितना लाभ ले पाएगी ? अब तो कांग्रेस ने भी रणनीति बना ली है कि उसका कोई नेता नरेन्द्र मोदी पर सियासी हमला नहीं करेगा। फिर तो मोदी फैक्टर पहले की तरह प्रभावी नहीं रह पाएगा। यानी भाजपा के पास मुद्दे भी कम पड़ रहे हैं।












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