कोरोना ने इंसान से साथ मारी 'इंसानियत', पिता की लाश रखने के बेटी से एंबुलेंस वाले ने मांगे 60 हजार रुपए
बेंगलुरु, अप्रैल 22: कोरोना महामारी ने इंसानों के साथ इंसानियत को भी मार डाला है। लोग ऐसे कठिन वक्त में एक-दूसरे की मदद करने की बजाए अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं। दवा से लेकर ऑक्सीजन के संकट के इस दौर में लोग मुंह मांगे पैसे वसूल रहे है और जरूरतमंद जैसे-तैसे करके चुका भी रहे हैं। इसी बीच कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से मानवता को शर्मसार करने देने वाली घटना सामने आई है। यहां कुछ घंटों के लिए कोरोना मरीज की बॉडी को एम्बुलेंस में रखने के लिए 60 हजार रुपए की मांग कर दी।

बैंगलोर में मैथिकेरे क्षेत्र के आरवी प्रसाद कोरोना संक्रमित हो गए थे। परिवार के लोगों ने उनको अस्पताल में भर्ती कराने के लिए बहुत प्रयास किए, लेकिन कोविड बेड ना होने के कारण एडमिट ना हो सके। इस बीच मंगलवार शाम 5.45 बजे के आसपास वो बेहोश हो गया। परिवार के लोगों ने एक निजी ऑपरेटर से एम्बुलेंस के लिए संपर्क किया और तीन घंटे तक भर्ती करवाने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। इस दौरान आरवी प्रसाद ने दम तोड़ दिया।
इस बीच रात शव को सुरक्षित रखने का फैसला किया और परिवार के लोगों ने एम्बुलेंस चालक हनुमंथा ने उन्हें एक फ्रीजर में शव को संरक्षित करने और अगले दिन दाह संस्कार के श्मशान के जाने के लिए पैसों की बात की। इस दौरान एंबुलेंस चालक ने 60 हजार रुपए की मांग कर दी। हालांकि एडवांस के तौर पर पहले ही 3 हजार रुपए चुका दिए थे। डेड बॉडी एम्बुलेंस में थी।
बुधवार को मृतक प्रसाद की बेटी भावना पीन्या श्मशान में चली गई, जहां एंबुलेेंस चालक शव लाया था और उसे 10,000 रुपये का भुगतान किया। जब उसने कहा कि वह बाकी की राशि नहीं जुटा पा रही है तो हनुमंथा ने कहा कि वह या तो उनके घर पर या सड़क पर शव को छोड़ देगा। इस जवाब के बाद मृतक की बेटी ने अपनी सोने की चेन गिरवी रखने का फैसला किया। हालांकि तब तक पुलिस अधिकारियों के पास ये पूरा मामला पहुंच गया और उन्होंने इस समस्या का समाधान किया।
एक एनजीओ के साथ काम करने वाले शख्स ने बताया कि अस्पताल से एक शव को ले जाने के लिए 35,000 रुपये ले रहे हैं। एक रात के लिए फ्रीजर देने और श्मशान में अंतिम संस्कार की कराने का खर्चा वसूल रहे हैं। कोविड मामलों और मौतों में वृद्धि को देखते हुए एम्बुलेंस की मांग बढ़ गई है। ऐसे में कुछ एंबुलेंस चालक कोरोना संकट को भुनाने में लगे हैं।












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