बलिया में नदी निगल जाती है घर-जमीन, गांव हो जाता है वीरान, इस बार भी आई मुसीबत, देखें खास रिपोर्ट
Ballia flood news today: उत्तर प्रदेश में नदियों के किनारे बसे कई जिले हैं और बाढ़ आने पर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में कुछ ऐसे गांव हैं, जिन्हें हर साल बाढ़ के बाद ऐसे जख्म मिलते हैं जो भरना मुश्किल हो जाता है।
नदी में तेजी से जलवृद्धि की सूचना मिलने पर प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को सतर्क कर दिया जाता है, खासकर उन गांवों को जो नदी के किनारे बसे हैं और बाढ़ में मकान और जमीन के बह जाने की अधिक संभावना होती है।

बलिया जिले के बांसडीह तहसील क्षेत्र के अंतर्गत टिकुलिया भोजपुरवा एक ऐसा गांव है जिस पर घाघरा नदी में आई बाढ़ के चलते संकट मंडरा रहा है। पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है इसके पहले भी जब नदी में बाढ़ आती है तो गांव पर संकट मंडराने लगता है।
घाघरा नदी के तटीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों को प्रशासन द्वारा अलर्ट किया जा रहा है। लेखपाल गांव में पहुंचकर उन परिवारों की सूची तैयार कर रहे हैं जिनके मकान कुछ दिनों में घाघरा नदी में समा जाएगा। केवल मकान ही नहीं उनकी जमीन भी नदी में समा जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ ऐसा जख्म छोड़ जाती है जिसे भरना मुश्किल होता है। मेहनत की कमाई से बनाए गए घरों के साथ-साथ नदी उपजाऊ कृषि भूमि को भी निगल जाती है और बाढ़ का पानी उतरने के बाद पूरा इलाका वीरान नजर आता है।
डेढ़ सौ परिवारों को दिया गया अल्टीमेटम
इस बारे में टिकुलिया भोजपुरवा गांव के लेखपाल सोनू कुमार से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि इस बार भी बढ़ के चलते घाघरा तटीय इलाकों में कटान देखने को मिल रहा है। लेखपाल ने बताया कि अभी तक आधा दर्जन से अधिक लोगों का मकान नदी में समा गया है।
लेखपाल द्वारा यह भी बताया गया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर गांव में सर्वे किया जा रहा है। उन सभी परिवारों की सूची तैयार की जा रही है जो नदी किनारे बने मकानों में रहते हैं और निकट भविष्य में उनके मकान नदी में बह जाने की आशंका है।
करीब डेढ़ सौ परिवारों को चिन्हित कर लिया गया है और उन सभी लोगों को जरूरत के सभी सामान को निकाल लेने के साथ ही मकान को जल्द से जल्द खाली कर देने के लिए सूचना भी दे दी गई है। अल्टिमेट मिलने के बाद ग्रामीण भयभीत हैं।
घर बह जाएगा तो जाएंगे कहां?
इस बारे में बात करने पर लेखपाल सोनू कुमार द्वारा बताया गया कि पीड़ितों के लिए सरकार द्वारा रहने और खाने का प्रबंध किया गया है। इसके अलावा जितने लोग भूमिहीन हैं और जिनकी जमीन नदी के कटान में चली जाती है उनको जमीन आवंटित किया जाता है।
इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन गांवों का दौरा कर सूची तैयार की जा रही है ताकि बाढ़ से प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो तथा बाढ़ के कारण जो भी नुकसान होगा उसकी भरपाई के लिए सरकार मदद करेगी।
अधिकारी और जनप्रतिनिधि सिर्फ वादे करके चले जाते हैं
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के बाद सरकार के निर्देश पर सरकारी अफसर और जनप्रतिनिधि गांव में जरूर आते हैं। बाढ़ के दौरान वे ग्रामीणों से मिलते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और कुछ तात्कालिक मदद के साथ ही आगे भी मदद का आश्वासन देकर गांव से चले जाते हैं।
इसके बाद जब बाढ़ का पानी उतर जाता है तो गांव में सिर्फ वीरान गांव और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के आश्वासन ही बचते हैं। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि पिछले वर्षों में बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई अभी तक नहीं हो पाई है। इस बार उम्मीद की किरण जगी है, देखते हैं क्या होता है। फिलहाल यह केवल एक गांव का मामला नहीं है बलिया में ऐसे कई गांव हैं जो इसी समस्या से जुझ रहे हैं।
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