Ballia: 100 लाशों की तलाश में डॉग स्क्वायड लेकर पहुंची मानवाधिकार टीम, एक घर के बगीचे में दफ़न होने की थी खबर
उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में सौ लाशों की तलाश में मानवाधिकार की टीम एक घर मे पहुंची। जहां डॉग स्क्वायड, फॉरेंसिक टीम और एफएसएल टीम के साथ ही बड़ी संख्या में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। शिकायतकर्ता कनाडाई नागरिक शालिनी सिंह ने मानवाधिकार को शिकायत दर्ज कराई थी जिसमे उन्होंने अपने रिश्ते में नाना स्व० धर्मात्मा सिंह और साथ ही मां और मौसियों द्वारा मकान में सौ लाशें दफनाने का आरोप लगाया। फ़िलहाल हुई जांच में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा कोई भी साक्ष्य नही मिला। पर जांच पड़ताल अभी जारी है।

"1990 से 1995 के बीच कई वारदातों को अंजाम दिया गया"
दरअसल भारतीय मूल की कनाडाई नागरिक शालिनी सिंह ने मानवाधिकार को शिकायत दर्ज कराई थी कि रिश्ते में नाना स्व० धर्मात्मा सिंह और साथ ही मां और मौसियों द्वारा मकान में सौ लाशें दफन की गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक 1990 से 1995 के बीच इन घटनाओं को अंजाम दिया गया था। वही दफ्न लाशो के ऊपर पेड़ लगा दिए गए थे। मानवाधिकार आयोग के आदेश पर पहुंची जांच टीम को स्व धर्मात्मा सिंह की वारिस अन्नू सिंह के विरोध का सामना भी करना पड़ा। हालांकि जांच टीम ने डॉग स्क्वायड के साथ घर के बगीचे सहित पूरे मकान की विधिवत जांच की। इस दौरान टीम को शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़ा कोई भी साक्ष्य नही मिला।

परिवार को बदनाम करने की साजिश
इस हाई प्रोफाइल ड्रामे में ट्विस्ट तब आया जब मकान की वारिस अन्नू सिंह ने शिकायतकर्ता शालिनी सिंह के चेहरे पर बंधे कपड़े पर आपत्ति दर्ज कराते हुए उसकी पहचान उजागर करने की गुजारिश की। मानवाधिकार आयोग के एडिशनल एसपी अमित मिश्रा का कहना है कि आयोग के आदेश पर जांच की गई। जल्द ही रिपोर्ट आयोग को सौंप दी जाएगी वहीं मकान की ओनर अन्नू सिंह का कहना है कि शालिनी सिंह द्वारा उनके परिवार को बदनाम करने की नीयत से गलत आरोप लगाए गए और साथ ही आयोग और शासन प्रशासन को गुमराह किया गया। वही शिकायतकर्ता शालिनी सिंह का कहना है कि उनके द्वारा न्यायसंगत तरीके से आरोप लगाए गए, जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही आरोप लगाने की वजह बताऊंगी।












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