65 की उम्र में 45 KM की दौड़, अनगिनत प्रतियोगिताओं में मेडल जीत चुका है बलिया का ये बुजुर्ग धावक
Fitness: 65 वर्षीय चंद्रभान सिंह 45 किलोमीटर तक दौड़ लगा सकते हैं। दौड़ के कुछ निजी आयोजनों में गोल्ड मेडल भी हासिल किये हैं। दौड़ की अनगिनत प्रतियोगिताओं में युवाओं के सामने भी अपना फिटनेस का लोहा मनवाया है।

फिटनेस के मामले में युवाओ से कम नहीं हैं बुजुर्ग। जहां 65 साल की उम्र में आमतौर पर लोग लाठियों का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं, वही बलिया में एक बुजुर्ग की फिटनेस ने युवाओं के लिए प्रेरणा बनने का कार्य किया है। आज हम आपको मिलाएंगे उस इंसान से जो शुद्ध रूप से तो एक किसान है लेकिन एक ऐसा धावक भी है जिसका जुनून और जज्बा देखकर नौजवानों के भी होश उड़ जाएंगे। लेकिन दुर्भाग्यवश भारत की मिट्टी पर अपने जुनून का लोहा मनवाने वाला ये देसी बुजुर्ग धावक अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दौड़ लगाने की ख्वाहिश लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

65 साल की उम्र में 45 किलोमीटर की दौड़
बलिया जनपद के कथरिया गांव के रहने वाले 65 वर्षीय चंद्रभान सिंह 45 किलोमीटर तक दौड़ लगा सकते हैं। दौड़ के कुछ निजी आयोजनों में चंद्रभान सिंह ने गोल्ड मेडल भी हासिल किये हैं। दौड़ की अनगिनत प्रतियोगिताओं में युवाओं के सामने भी अपना फिटनेस का लोहा मनवाया है। चंद्रभान सिंह का कहना है कि वह राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एथलीट के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, लेकिन पेशे से किसान चन्द्रभान सिंह के लिए विदेशों में होने वाले आयोजनों में शिरकत करना लगभग नामुमकिन है।
बुजुर्ग धावक चंद्रभान सिंह के सामने बड़ी चुनौती
चन्द्रभान सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनकी आर्थिक तंगी हैं। पेशे से किसान चन्द्रभान सिंह का जीवन खेती किसानी पर टिका है। बचपन से ही दौड़ लगाने में माहिर चन्द्रभान ने 65 साल के उम्र में भी अपने फिटनेस को कभी उम्र पर हावी नही होने दिया। लेकिन आर्थिक तंगी और बढ़ती उम्र के साथ उनका सपना कांच की तरह अब टूटता दिख रहा हैं। लेकिन हौंसलो में कोई कमी नही है। उम्मीद है कि एक दिन वो विदेशी धरती पर भारत के तिरंगे का इस उम्र में भी सम्मान बढ़ाएंगे।

Recommended Video

सरकारी व्यवस्थाओं से नाराज किसान धावक चन्द्रभान
चन्द्रभान सरकार की व्यवस्थाओं से खासा नाराज है। नाराज़ चन्द्रभान सिंह ने जिलाधिकारी बलिया को पत्र देकर मांग किया कि उन्हें आर्थिक मदद दी जाए ताकि वह अन्तर्राष्ट्रीय आयोजनों में भाग ले सकें। चन्द्रभान सिंह बताते हैं कि बचपन से ही फिटनेस को लेकर वो काफी संजीदा रहे। लेकिन सरकार की नीतियां सिर्फ युवाओं के लिए हैं, बुजुर्गों के लिए नहीं। लिहाजा शारीरिक योग्यता होने के बावजूद भी वो राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय दौड़ में भाग नहीं ले पाते हैं।
लम्बी दौड़ लगाने में माहिर, सर से पांव तक योग के पुजारी है चन्द्रभान
चन्द्रभान सिंह सौ, दो सौ और चार सौ मीटर दौड़ के साथ ही मैराथन दौड़ में भी माहिर हैं। वहीं 65 वर्षीय चंद्रभान सिंह का कहना है कि मेरी फिटनेस का राज योगा से जुड़ा हुआ है। जिसके जरिये वे खुद को तंदुरुस्त रखते हैं और वो युवाओं को भी प्रोत्साहित करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि कई युवाओं को मैं स्वयं तैयारियां कराता हूँ, जो आज देश की सेवा भी कर रहे हैं। लेकिन आज मेरे लिए सरकार के सारे दरवाज़े मानो बन्द है।













Click it and Unblock the Notifications