दिल्ली विश्वविद्यालय में Attendance app पर खर्च कर दिए 60 लाख- RTI
नई दिल्लीः दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में Attendance app के लिए 60 लाख रुपए खरीदने का मामला सामने आया है। एक सॉफ्टवेयर के लिए इतने पैसे खर्च करना हैरान कर देने वाला है। 60 लाख की ऐप का खुलासा आरटीआई से जरिए हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय के आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज (एडीसी) के शिक्षक ने आरटीआई दर्ज कराई थी, जिसमें सामने आया है कि डीयू ने प्रवेश संसाधन योजना (ईआरपी) (Entrance Resource Planning (ERP))के लिए 60 लाख रुपए खर्च किए हैं।

इससे पहले पूर्व शैक्षणिक परिषद (एसी) की सदस्या और जूलॉजी की टीचर शिक्षक मोनिका मिश्रा ने भी एक आरटीआई दायर की थी, जिसके बारे में बताया गया था दिल्ली विश्व विद्यालय ने साल 2014 में सितंबर महीने में कुछ सॉफ्टवेयर खरीदे थे, जिसकी कीमत 59,97,568 रुपये थे। दावा किया गया कि ये सॉफ्टवेयर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से ज्ञापन के माध्यम से खरीदा था।
मोनिका मिश्रा ने कहा कि, हमें यह भी सुनिश्चित नहीं कर सकेहैं कि ईआरपी क्या है क्योंकि इसे स्टेकहोर्डर्स के साथ बिना किसा चर्चा से लगाया गया है। लगाने से पहले तय किया था कि ये अटेंडेंस के साथ टाइमटेबल आदि के लिए भी होगा, लेकिन यहां कुछ भी नहीं हो रहा है। इसका काम सिर्फ लाइब्रेरी और अकाउंट डिपार्टमेंट में किया जाता है। इसका इस्तेमाल बाकी जगहों के लिए नहीं किया जा रहा है। ये सार्वजनिक धन की बर्बादी है। "
सॉफ्टवेयर पर उठ रहे सवालों को प्रिंसिपल ने निराधर बताया है। सॉफ्टवेयर के बारे में प्रिंसिपल सावित्री सिंह ने कहा, "मुझे इसकी कीमत तो याद नहीं है, क्योंकि ये तीन साल पहले लगा था। छात्रों की संख्या को देखते हुए ये लागत ज्यादा नहीं है।
प्रिंसिपल का कहना है कि शुरुआत में हमने सॉफ्टवेयर के लिए यूजीसी फंड का इस्तेमाल किया। लेकिन बाकी का भुगतान हम कॉलेज के पैसों से कर रहे हैं। प्रिंसिपल ने दावा किया कि हमारे पास डीयू कॉलेजों के अन्य कॉलेजों के मुकाबले हमारे कॉलेज की फीस काफी कम है।
सवाल के जवाब में आरटीआई में बताया गया है कि साल 2014-15 में ERP 9,61,400 रुपये खर्च किए गए थे। वहीं साल 2015-2016 में 14,42,100 रुपये और 2016-17 में समान राशि तो वहीं इस साल सिंतबर तक 10,08,100 रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
प्रिंसिपल सिंह ने कहा, "इस प्रणाली को लागू करके, हम सब कुछ ऑनलाइन चलाना चाहते हैं। इसके लिए हमें सरकार से भी मंजूरी मिली है। यही कारण है कि हमें सेंट स्टीफन से हाई एनएएसी ग्रेड (NAAC) मिला है।"
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