गौ संरक्षण, महिलाओं को रोजगार, शुद्धता और फिर भी किफायती ! अद्भुत है Amethi की ये पेंट फैक्ट्री
Amazing Paint Factory of Amethi : जिस योजना पर ग्रामीण काम कर रहे हैं, वो है गाय के गोबर से घरों को रौनक देने वाला पेंट बनाना। जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इसके अष्ट लाभ हैं।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राहुल गाँधी के जंग के मैदान से एक बेहद उम्मीद भरी खबर सामने आई है। यहां ग्रामीणों का प्रयास एक मशहूर शायर के शेर "कौन कहता है आसमाँ में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों" को चरित्रार्थ करता दिख रहा है। जिस योजना पर ग्रामीण काम कर रहे हैं, वो है गाय के गोबर से घरों को रौनक देने वाला पेंट बनाना। जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इसके अष्ट लाभ हैं। परन्तु इसकी सबसे खास बात यह है कि ये कॉस्ट इफेक्टिव यानी बेहद ही सस्ते दामों पर उपलब्ध है। इसके इलावा अगर ये योजना बड़े स्तर पर सफल होती है, तो गाय का गोबर इस पेंट की फैक्ट्री के लिए कच्चा माल हो जाएगा और कीमती हो जाएगा। जाहिर है कि इस पेंट का उत्पादन न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार पैदा करेगा बल्कि गौ संरक्षण को भी खासा मजबूती देगा।

100 प्रतिशत प्राकर्तिक पेंट
दरअसल, उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद में राष्टीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत खादी प्राकर्तिक पेंट यानी 100 प्रतिशत प्राकर्तिक पेंट बनाया जा रहा है। बता दें कि इस पेंट में कई विशेषताएं हैं जिस वजह से इसको आसपास के क्षेत्रों में ख़ासा पसंद भी किया जा रहा है। इस पेंट की फैक्ट्री में महिलाओं को टेक्निकल सपोर्ट देने वाले धर्मजीत यादव ने बताया कि ये पेंट गाय के गोबर से बनाया जाता है और इसमें किसी भी प्रकार का कोई केमिकल नहीं मिलाया जाता है। साथ ही इसमें कई ऐसी विशेषताएं हैं जो आमतौर पर अन्य पेंट में देखने को नहीं मिलती हैं।

इसके अष्ट हैं लाभ
उन्होंने बताया कि ये पेंट एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल, ईको-फ्रेंडली, नेचुरल थर्मल इंसुलेटर, कॉस्ट-इफेक्टिव, फ्री फ्रॉम हैवी मेटल, नॉन-टॉक्सिक आदि जैसे कई और भी लाभ हैं। इस पेंट से घर में शुद्धता तो रहती ही है, साथ ही नेचुरल थर्मल इंसुलेटर होने के चलते ये पेंट घर का तापमान भी मौसम के हिसाब से बनाए रखता है। इसके इलावा बाजार में मिल रहे अन्य पेंट के मुकाबले यह पेंट काफी सस्ता भी है।
कैसे बनता है ये अनोखा पेंट
यह पेंट बनाने की विधि भी बेहद सरल लेकिन अनोखी है। इसको बनाने के लिए पहले गोबर की सफाई की जाती है। उसके बाद मशीन मे गोबर की पिसाई की जाती है। फिर गर्म पानी मे गोबर की घुलाई की जाती है। इसके बाद गोबर के घोल को केमिकल से साफ किया जाता है। गौरतलब है कि यह केमिकल केवल सफाई के लिए इस्तेमाल होता है। उसके बाद मशीन मे गर्म कर सफेद पाउडर मिलाकर उसे गर्म कर पेन्ट, पुट्टी, डिस्टेम्पर, प्राइमर आदि तैयार किया जाता है।
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रोजगार मिलने से महिलाएं बाग़-बाग़
आपको बता दें कि पेंट की इस फॅक्टरी में अधिकतर महिलाऐं ही पूरा काम संभालती हैं। महिलाओं को मिल रहे इस रोजगार से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब विकास दिखने लगा है। बता दें कि यूपी के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में एक परिवार की कुल आय या तो केवल खेती पर निर्भर होती है या फिर घर के आदमी मेहनत मजदूरी कर के अपना घर चलाते हैं। ऐसे में बच्चों की उच्च शिक्षा या बेहतर लाइफ स्टाइल तो दूर की बात बल्कि बुनयादी जरूरतों को भी पूरा करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इस पेंट फैक्ट्री में महिलाऐं अपने-अपने घर का काम निपटाने के बाद काम करने आती हैं और अच्छा ख़ासा मेहनताना कमा कर घर ले जाती हैं।
फैक्ट्री में काम करने वाली सरला देवी बताती हैं कि वह अपने इस काम से बेहद ही खुश हैं। अब उनके बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ने जा रहे हैं। पहले पैसों की बहुत दिक्कत होती थी मगर अब सारा कर्जा भी उतर गया है और सबकुछ बहुत बढ़िया चल रहा है।












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