जनता कर्फ्यू के दिन सरकारी कर्मचारी ने पिता की मौत पर रखा मृत्युभोज, 21 गांव के लोगों को बुलावा
जनता कर्फ्यू के दिन सरकारी कर्मचारी ने पिता की मौत पर रखा मृत्युभोज
अलवर। कोरोना वायरस के खतरे से दुनियाभर में दहशत है। भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च को सुबह सात बजे से जनता कर्फ्यू लगा हुआ है। राजस्थान सरकार ने भी 31 मार्च तक के लिए प्रदेश में लॉक डाउन की घोषणा कर रखी है।

12 दिन पहले हुई पिता की मौत
वहीं, दूसरी ओर राजस्थान के ही अलवर जिले में एक सरकारी कर्मचारी द्वारा जनता कर्फ्यू को गंभीरता नहीं लिए जाने का मामला सामने आया है। अलवर के गांव नांगलखेडिया में 12 दिन पहले पंचायती राज विभाग के एक कर्मचारी के पिता की मौत हो गई थी।

गांव नांगलखेडिया में लगाया पांडाल
इस पर कर्मचारी ने 22 मार्च को मृत्युभोज के लिए आस-पास के 21 गांवों के लोगों को आमंत्रित किया। इसके लिए नांगलखेडिया गांव में बाकायदा बड़ा पांडाल लगाकर लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई जबकि 22 मार्च को जनता द्वारा जनता के लिए लगाए गए जनता कर्फ्यू में देशभर के लोगों को सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक घरों में ही रहना है। ताकि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके।

चर्चा में रहा मृत्युभोज
जनता कर्फ्यू का मकसद कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के चलते लोगों के कम से कम सम्पर्क में आना है। नांगलखेडिया गांव में 21 गांवों के लोगों को मृत्युभोज के लिए आमंत्रित करने पर वहां बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना पर चर्चा होने लगी।

बहरोड़ एसडीएम मौके पर पहुंचे
सूचना पाकर अलवर जिले के बहरोड़ उपंखड अधिकारी संतोष मीणा मय टीम रविववार सुबह गांव नांगलखेडिया पहुंचे और कर्मचारी को जनता कर्फ्यू के दौरान इस तरह का सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं करने की समझाइश की, जिस पर वह मान गया और पिता की मौत पर हो रहे मृत्यभोज कार्यक्रम को रोक दिया।












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