प्रयागराज में तैनात दरोगा की डेंगू ने ली जान, लखनऊ के मेदांत में चल रहा था इलाज
प्रयागराज, 13 सितंबर: उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद से शुरू हुआ डेंगू और वायरल फीवर का कहर अब दूसरे जिलों में भी कहर बरपा रहा है। सोमवार को संगम नगरी प्रयागराज में भी डेंगू के डंक से पहली मौत का मामला सामने आया है। सिविल लाइन इलाके के हनुमान मंदिर चौकी इंचार्ज शिखर उपाध्याय की डेंगू से मौत हो गई। दरोगा का लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। शिखर उपाध्याय की मौत से पुलिस कर्मियों में शोक की लहर दौड़ पड़ी।

डेंगू से पीड़ित से दरोगा शिखर उपाध्याय
प्रयागराज में सिविल लाइंस हनुमान मंदिर चौकी इंचार्ज शिखर उपाध्याय की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। स्थानीय अस्पताल में उपचार कराने के बाद हालत में सुधार न होने पर शिखर उपाध्याय को लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मेदांता में उपचार के दौरान सोमवार को दरोगा ने दम तोड़ दिया।
प्रयागराज में डेंगू के अब तक 87 मामले
फिरोजाबाद में डेंगू और वायरल फीवर के मामले सबसे पहले सामने आए। जिले में अब तक 50 से अधिक लोगों की डेंगू से मौत हो चुकी हैं। इनमें अधिकांश बच्चे शामिल हैं। अन्य जिलों में भी डेंगू और वायरल का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। आगरा, मथुरा, मैनपुरी के बाद अब प्रयागराज में भी लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिले में अब तक 87 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। सोमवार को दरोगा शिखर उपाध्याय की मौत हो गई। मलेरिया विभाग घरों में पैराथ्रम स्प्रे कराया। लार्वा जांच और एंटी लार्वा छिड़काव भी किया गया। एडीशनल सीएमओ सत्येन राय का कहना है कि हर साल इस सीजन में अचानक से बीमार बच्चों की भीड़ बढ़ती है। इसलिए अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी बीमार बच्चे को वापस न भेजा जाए। हालांकि इसी वजह से एक बेड पर कई बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। सत्येन राय का कहना है कि लोगों का भरोसा इस सरकारी अस्पताल पर है, इसलिए कठिन हालात में भी बच्चों का इलाज जारी है। उन्होंने कहा कि जगह भरने का हवाला देकर बीमार बच्चों को वापस भेजने से उनकी जिंदगी को खतरा हो सकता है।












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