गजब: मां को जेल जाने से बचाने के लिए अजन्मे बच्चे ने हाईकोर्ट में याचिका की दाखिल
Allahabad News इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 28 सप्ताह के अजन्मे बच्चे ने अपनी मां को जेल जाने से बचाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर कोर्ट भी चकित है। 28 महीने के भ्रूण की ओर से दाखिल की गई याचिका फिलहाल खारिज हो गई है, लेकिन अब यह खबर मीडिया में सुर्खियां बटोर रही है।

क्या है मामला
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की रहने वाली ज्योति सारस्वत के विरुद्ध फराह थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मुकदमे में पुलिस ज्योति की गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है। गिरफ्तारी से बचने के लिए ज्योति सारस्वत ने न्यायपालिका की शरण ली और बीते नवंबर महीने में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की। हालांकि हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी वाले आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए ज्योति की याचिका खारिज कर दी। जिसके बाद अब ज्योति ने अपने गर्भ में पल रहे 28 सप्ताह के भ्रूण की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया है।

क्या हुआ कोर्ट में
इलाहाबाद हाईकोर्ट में बेबी सारस्वत (28 सफ्ताह का भ्रूण) के नाम से अधिवक्ता विनायक मिथल ने याचिका दाखिल की, जिस पर जस्टिस अभिनव उपाध्याय और जस्टिस विवेक वर्मा की पीठ ने सुनवाई शुरू की। याची की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि अजन्मा भ्रूण भी एक व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है और भारतीय दंड संहिता की धारा 11 में इसका उल्लेख मिलता है। जबकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता भी प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त है, ऐसे में अगर भ्रूण की मां को गिरफ्तार किया जाता है तो भ्रूण में पल रहा बच्चा भी बिना अपराध के गिरफ्तार हो जाएगा। ऐसे में संविधान में दिया गया अधिकार और बच्चे की स्वतंत्रता छीनी जा रही है, इसलिए भ्रूण के मां की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए।

हाईकोर्ट ने क्या कहा
याचिका पर दलील वह बहस सुनने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया और कहा कि अजन्मे भ्रूण को आजादी से कोई खतरा हो ही नहीं सकता है। क्योंकि वह गर्भ में ही सुरक्षित व स्वतंत्र है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि भ्रूण में पल रहा बच्चा अभी मां के गर्भ में है और जैसे ही जन्म लेगा वह आजाद होगा। ऐसे में बच्चे के संवैधानिक अधिकारों के हनन या स्वतंत्रता बाधित करने जैसी कोई बात ही नहीं रह जाती। फिलहाल हाईकोर्ट ने याची को किसी भी तरह की राहत देने से इंकार करते हुये याचिका को अर्थहीन मानकर खारिज कर दिया है।












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