इलाहाबाद में आस्था का उमड़ेगा सैलाब, 50 लाख श्रद्धालु करेंगे स्नान
संगम की रेती पर बसने वाला तंबुओ का शहर यानी माघमेला कल से गुलजार हो जायेगा। 12 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर 50 लाख श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगायेंगे।
इलाहाबाद। मकर संक्रांति के चलते माघ मेले के लिए तैयारियां शुरु हो गई है। संगम की रेती पर बसने वाला तंबुओ का शहर यानी माघमेला कल से गुलजार हो जायेगा। 12 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर 50 लाख श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगायेंगे। पूरा संगम क्षेत्र कल हर-हर गंगे और प्रयागराज के जयघोष से गूंज उठेगा। लेकिन भारी भीड़ को संभालना स्थानीय प्रशासन के लिये आसान नहीं होगा। क्योंकि व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिये जमीनी स्तर पर ढेरों खामियां बिखरी पड़ी हैं। बहरहाल कल्पवासियों के संगम में पहुंचने का क्रम लगातार जारी है। ट्रैक्टर, लोडर, टैक्सी व हर तरीका जिससे लोग अपनी गृहस्थी लेकर कल्पवास के लिये पहुंच सकते हैं, कर रहे हैं। यहां एक माह तक धर्म कर्म का महान तप चलेगा। सिक्ख समुदाय के संतो का जत्था भी संगम पहुंच चुका है। ये भी पढ़ें: जानिए मकर संक्रांति का महत्व और कुछ खास बातें

बता दें कि 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर माघमेला अपने चरम की ओर बढ़ेगा। मेला प्रशासन ने भी अपने इंतजाम तकरीबन पूरे कर लिए हैं। कमिश्नर राजन शुक्ला व डीएम संजय कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि 1484 बीघे में मेला बसाया गया है। साथ ही बीते साल के मुकाबले इस बार तीन नए घाट भी बनाए गए हैं। हालांकि बीते साल माघ मेला 1540 बीघे में बसाया गया था, लेकिन कटान के कारण इस बार शुरूआत में 1432 बीघे जमीन ही मिली थी। बाद में 52 बीघा जमीन गंगद्वीप पर मिल गई। इन क्षेत्रों में संतों और संस्थाओं को सुविधा मुहैया करवा दी गई है।
इस बार के माघ मेले में 17 स्नानघाट बनाए गए हैं, जिसमें सबसे बड़ा तीन हजार रनिंग फुट का घाट संगम यमुना पट्टी पर और 1200 रनिंग फुट का घाट संगम गंगा पट्टी पर बनाया गया है। जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। स्नान क्षेत्र में कुल 8250 रनिंग फुट घाट बनाए गए हैं। जहां पर चेंजिंग रूम का भी इंतजाम किया गया है। सर्दी को देखते हुए रैन बसेरे के रूप में भी 450 टेंट लगाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि मेले में लाइट, सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी सभी इंतजाम पूरे हो गए हैं। जहां कहीं भी कोई शिकायत मिल रही है, उसे दुरुस्त कराया जा रहा है।

शहर से नदियों में गिरने वाले सभी नालों का बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट किया जा रहा है। बड़ी संख्या में सफाई कर्मी लगाए गए हैं और भारत संचार निगम लिमिटेड, रेल विभाग, डाक विभाग का भी सहयोग लेकर यात्रियों को हर सुविधा मुहैया कराने का इंतजाम किया गया है। हालांकि मेला क्षेत्र में शौचालय निर्माण पूरा नहीं हुआ है। खाकचौक, आचार्यबाड़ा, दंडी स्वामीनगर स्थित संन्यासियों के शिविर में अभी तक शौचालय बनाये जा रहे हैं। कल्पवासियों के शिविरों की दशा तो और खराब है। सार्वजनिक शौचालय का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ। फिलहाल कल प्रशासन और तैयारियों की परीक्षा होनी तय है। क्योंकि भारी भीड़ का पहला जत्था कल ही संगम नगरी में प्रवेश करेगा। ये भी पढ़ें: मकर संक्रांति 2017 का शुभ मुहूर्त और महत्व












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