जवाहर पंडित हत्याकांड के दोषी करवरिया बंधु 23 साल बाद भुगतेंगे जेल, इन धाराओं में हुई है सजा

इलाहाबाद/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित सपा विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में 23 साल बाद जिला अदालत ने अपना फैसला सुनाया। जिसमें दोषी करवरिया बंधुओं को आजीवन कारवास की सजा सुनाई गई, साथ ही 7 लाख 20 हजार का जुर्माना भी लगाया गया। केस की सुनवाई का जब फैसला आया तो खचा-खच भरी कचहरी में नारेबाजी और जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। बता दें कि, विगत 31 अक्टूबर को ही अदालत ने करवरिया बंधुओं को दोषी करार दिया था। जिसके बाद 4 नवंबर को सजा सुनाने का ऐलान किया गया।

समर्थकों का हुजूम उमड़ा, दोषी पाए जाने पर चुप्पी छा गई

समर्थकों का हुजूम उमड़ा, दोषी पाए जाने पर चुप्पी छा गई

संवाददाता ने बताया कि दोपहर 2 बजे के बाद नैनी जेल से कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच जवाहर हत्याकांड के आरोपी पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व विधायक उदय भान करवरिया, पूर्व विधायक सूरज भान करवरिया व इनके चचेरे भाई रामचंद्र त्रिपाठी को अदालत में पेश किया गया था। अदालत पहुंचने से पहले ही समर्थकों का हुजूम खुद को करवरिया बंधुओं के साथ दिखाने के लिये जमकर नारेबाजी के साथ जयकारे लगाता रहा।

1996 में की गई थी पंडित की हत्या

1996 में की गई थी पंडित की हत्या

13 अगस्त 1996 को पूर्व सपा विधायक जवाहर यादव उर्फ पंडित की सिविल लाइंस इलाके में गोली मारकर की हत्या कर दी गई थी। गोलीबारी के दौरान कुल तीन लोगों की मौत हुई थी। जबकि, दो राहगीर भी घायल हुए थे। इस मामले में बसपा सांसद कपिल मुनि करवरिया, पूर्व भजपा विधायक उदय भान करवरिया और एमएलसी सूरज भान करवरिया तथा उनके रिश्तेदार रामचंद्र त्रिपाठी को नामजद करते हुये मुकदमा दर्ज कराया गया था।

मुकदमे का विधिवत ट्रायल 2015 में शुरू हो सका

मुकदमे का विधिवत ट्रायल 2015 में शुरू हो सका

मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच शुरू हुई तो पुलिस की जांच से संतुष्ट न होने पर यह मामला सीबीसीआईडी को सौंप दिया गया था। सीबीसीआईडी द्वारा की गई लंबी जांच के बाद मुकदमे का विधिवत ट्रायल 2015 में शुरू हो सका। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने पक्ष को साबित करने के लिए साक्ष्यों और गवाहों को पेश किया। बीच में कोर्ट की सख्ती के बाद सभी ने न्यायालय में आत्मसर्पण किया तो सभी को जेल भेज दिया गया और पिछले दो साल से अधिक समय से चारों आरोपी जेल में बंद थे।

7.20 लाख का जुर्माना निर्धारित किया गया

7.20 लाख का जुर्माना निर्धारित किया गया

इस तरह मुकदमा पिछले 23 साल से चल रहा था और अब इसमें फैसला आया है। जिसके तहत इन चारों आरोपियों पर हत्या, विधि विरुद्ध जमाव, सशस्त्र बल प्रयोग सहित तमाम धाराओं में दोष सिद्ध हुआ और इसी के तहत इन के विरुद्ध सजा सुनाई गई है। जिला अदालत में चल रही सुनवाई के बाद अदालत ने जिन धाराओं में फैसला सुनाया, उसके अनुसार ही उम्रकैद की सजा के अलावा 7.20 लाख का जुर्माना निर्धारित किया गया है।

इन धाराओं के तहत हुई सजा

इन धाराओं के तहत हुई सजा

जिन धाराओं के तहत फैसला आया उनमें धारा 302 प्रथम व बडी धारा थी इसके तहत आरोपियों केा उम्रकैद व 1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई गयी है। जबकि धारा 307 के तहत 10 वर्ष की सजा व 50 हज़ार का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा धारा 147 के तहत 2 वर्ष की सजा व 10 हजार का जुर्माना, धारा 148 के तहत 3 वर्ष व 20 हजार का जुर्माना भी लगाया गया। कुल मिलाकर सभी धाराओं और जुर्माना राशि को संयुक्त रूप से उम्र कैद की सजा व 7.20 लाख जुर्माना तय किया गया है।

जेल में क्या करेंगे करवरिया

जेल में क्या करेंगे करवरिया

वहीं, सजा का ऐलान होते ही करवरिया बंधुओं को जेल के अंदर क्या काम मिलेगा, इसकी चर्चा होने लगी। बताया गया कि कपिल मुनि करवरिया, उदयभान करवरिया एवं सूरजभान करवरिया को अशिक्षित कैदियों को शिक्षित करने में लगाए जाएंगे। बहरहाल, तीनों को सिद्धदोष कैदी नंबर, लागू होंगे ड्रेस कोड भी दिया जायेगा। साथ ही मनमर्जी का कपड़ा पहनने के बजाय जेल के ड्रेस कोड के तहत कुर्ता पायजामा पहनेंगे। डीआईजी जेल वीआर वर्मा ने बताया कि तीनों भाई उच्चशिक्षित हैं। इसलिए उन्हें अशिक्षित एवं अल्पशिक्षित कैदियों एवं बंदियों को शिक्षित करने में लगाया जाएगा।

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