एएमयू में 34 शिक्षकों की मौत पर वाइस चांसलर ने लिखा आईसीएमआर को पत्र, कहा- कोई खास वैरिएंट तो नहीं फैल रहा?
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के 34 शिक्षक और रिटायर्ड कर्मियों की मौत हो गई जिनमें या तो कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हो गई थी या फिर उनमें इस बीमारी के लक्षण थे। विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को पत्र लिखा है जिसमें यह स्टडी करने का अनुरोध किया है कि क्या कैंपस में कोरोना वायरस का कोई खास वैरिएंट लोगों को संक्रमित कर रहा है?

वाइस चांसलर तारिक मंसूर ने आईसीएमआर को लिखी चिट्ठी में कहा कि 16 कार्यरत और 18 सेवानिवृत शिक्षक समेत विश्वविद्यालय के अन्य कुछ कर्मचारी पिछले 18 दिनों में इस बीमारी से जान गंवा चुके हैं। उन्होंने लिखा कि हो सकता है कि वायरस का कोई खास वैरिएंट एएमयू कैंपस और आसपास के इलाकों में फैल रहा है जिसकी वजह से इतनी सारी मौतें हुई हैं। चिट्ठी में उन्होंने वायरस के प्रसार पर नियंत्रण पाने के लिए इसका अध्ययन करने पर जोर दिया।
वाइस चांसलर ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब से वायरस के सैंपल्स, इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटेड बायोलॉजी लैब, नई दिल्ली जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा गया है। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल शाहिद अली सिद्दीकी ने इस बारे में बताया कि अस्पताल के 25 डॉक्टर पिछले 15 दिनों में इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। फिलहाल तीन डॉक्टरों का इलाज चल रहा है। कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर शादाब खान की इस बीमारी से मौत हो गई। बाकी सभी डॉक्टर संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं।
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा कि यहां ऑक्सीजन का अभाव है और सिर्फ तीन लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट पर पूरी निर्भरता है। पिछले 12 दिनों में इस अस्पताल को लगातार प्रयास के बावजूद बाहर से एक भी ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पाया।












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